होली के बाद की रंगोली-13

(Holi Ke Baad Behan Ke Sath Rangoli- Part 13)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अब तक आपने पढ़ा कि कैसे खेल खेल में भाई बहनों ने धीरे धीरे बेशर्मी की सीमाएं लांघते हुए आखिर में कैसे सामूहिक बहन चुदाई का खेल खेला और रात भर दोनों भाई अपनी बहनों को चोदते चोदते आखिर सो गए।
अब आगे…

सूरज की सुनहरी किरणें पर्दों से छन-छन कर बेडरूम में दाखिल हो रहीं थीं। चार नंगे जिस्म एक बड़े से बिस्तर पर गोलाकार बनाए हुए अभी भी नींद की गोद से निकले नहीं थे। सूरज भी सोच रहा होगा कि भला ये कौन सा तरीका हुआ सोने का? लेकिन ये लोग ऐसे क्यों सोए थे इसके पीछे रात की अंधाधुंध चुदाई थी। शरीर थक कर चूर हो गया था नशा सर चढ़ चुका था लेकिन दिल है कि मानता नहीं।

आखिर सबने निश्चय किया कि कुछ ऐसा करते हैं कि आराम भी मिले और सेक्स का मजा भी। सब एक गोला बना कर, एक दूसरे की जाँघों को तकिया बना कर लेट गए। लड़के अपनी पत्नी या प्रेमिका की जांघ पर और लड़कियां अपने भाइयों की जाँघों पर सर रख कर लेट गईं।
सचिन रूपा की चूत चाट रहा था; रूपा, पंकज का लंड चूस रही थी; पंकज सोनाली की चूत में घुसा पड़ा था और सोनाली, सचिन लंड निगलने की कोशिश में लगी हुई थी।
इस तरह सब आराम से लेटे हुए भी थे और सबको मजा भी मिल रहा था। इसी तरह एक दूसरे के गुप्तांगों को चाटते चूसते सब आखिर सो गए थे।

सूरज की किरणों की थपकी से जब पंकज की आँख खुली तो सामने सोनाली की चूत थी। उसने उनींदी आँखें ठीक से खोले बिना उसे चाटना शुरू कर दिया। इस से सोनाली की नींद भी टूटी और वो अपने भाई का लंड बेड-टी समझ कर चूसने लगी। ऐसे ही सचिन और रूपा भी जाग गए।

थोड़ी देर ऐसी ही चटाई चुसाई के बाद सब उठे और नंगे ही रोज़मर्रा के कामों में लग गए। लेकिन आज काम के साथ साथ, काम वासना का खेल भी चल रहा था। जिसको जहाँ मौका मिल रहा था थोड़ी थोड़ी चुदाई कर ले रहा था। किचन में, बाथरूम में, बेडरूम में; लेकिन आखिर सब शॉवर में मिले और उस छोटी सी जगह में जहाँ मुश्किल से दो लोगों के लिये नहाने की जगह थी, चार लोगों ने अच्छे से मस्त खड़े खड़े चुदाई की।

इसका भी अलग मजा था।

सचिन, रूपा को और पंकज, सोनाली को चोद रहा था लेकिन साथ ही भाई-बहनों के नंगे शरीर भी आपस ने रगड़ रहे थे। कभी कमर, तो कभी भाई बहन के पुन्दे आपस में टकरा कर एक दूसरे
को धक्के मारने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। चुदाई से ज्यादा मजा इस मस्ती में आ रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे लंड को चूत में घुसाने के लिए नहीं बल्कि एक दूसरे के नितम्बों से अपने चूतड़ टकराने की गद्देदार अनुभूति के लिए धक्के मारे जा रहे थे।

इस चुदाई स्नान के बाद सब फ्रेश हो कर बाहर आए। पंकज और सचिन ड्राइंग-रूम में नंगे ही बैठे बातें करने लगे, तब तक रूपा और सोनाली भी तैयार हो कर और पूजा की थाली सजा कर ले आईं थीं।
लेकिन कुछ अजब ही तरीके से तैयार हुईं थीं दोनों। बालों में गजरा, चेहरे पर सुन्दर मेक-अप, कानो में झुमके, गले में भरा हुआ सोने का हार, हाथों में मेंहदी और पैरों में महावर। दोनों बिल्कुल दुल्हन लग रहीं थीं, लेकिन एक ही बात थी जो अलग थी। दोनों ने कपड़ों के नाम पर बस एक लाल थोंग पहनी थी।
सचिन- ये क्या रक्षाबंधन की तैयारी है? ऐसा है तो चलो हम भी कपडे वपड़े पहन कर तैयार हो जाते हैं।

रूपा- रात भर मस्त अपनी बहन चोदने के बाद, तुमको रक्षाबंधन मनाना है?
सचिन- तो फिर ये पूजा की थाली क्यों? और उसमें राखी भी रखी है।
सोनाली- अब यार, भेनचोद भाई के हाथ में राखी बाँधने का तो कोई मतलब है नहीं; लेकिन तू यहाँ राखी मनाने ही आया था, तो बिना राखी घर जा के क्या जवाब देगा?
सचिन- तो फिर ये रूपा मना क्यों कर रही है?
रूपा- क्योंकि हम रक्षाबंधन नहीं मनाएँगे; हम चुदाई-बंधन मनाएँगे।
सचिन- अब ये क्या नया आइटम ले कर आई हो तुम? चुदाई-बंधन!
रूपा- ये रक्षा-बंधन का सेक्सी रीमिक्स है। ही ही ही…

इस बात पर सभी थोड़ा बहुत तो हंस ही दिए। सचिन की नज़रें पंकज पर टिक गईं क्योंकि ऐसे ज्ञान की बातों में उसकी विशेष टिप्पणी ज़रूरी थी। सचिन के देखने के तरीके से ही पंकज समझ गया कि सचिन उसकी राय जानना चाहता है। पिछले कुछ दिनों में उसने सचिन को ऐसे विषयों पर कुछ ज्यादा ही ज्ञान दे दिया था।

पंकज- देखो सचिन ऐसा है, रक्षाबंधन का मतलब है कि भाई अपनी बहन को वचन देता है कि वो उसकी रक्षा करेगा। अब लड़कियों की रक्षा का मतलब अक्सर उनकी इज्ज़त, लाज या अस्मिता की रक्षा करना होता है। यहाँ तो हमने ही अपनी बहनों को चोद दिया है; तो अब उस वचन का को कोई खास मतलब रह नहीं जाता। बाकी हिफाज़त तो हम अपने परिवार के सभी लोगों की करते ही हैं।
सचिन- ठीक है रक्षाबंधन ना मनाओ, लेकिन अब ये चुदाई-बंधन का क्या वचन देना है?
रूपा- ये हुआ ना सही सवाल!

सोनाली- सिंपल है यार, तुम कसम खाओगे कि जब भी मैं तुमको चोदने को कहूँगी तो तुम मुझे ज़रूर चोदोगे। बीवी बाद में बहन पहले। चुदाई का वचन, चुदाई-बंधन! समझे?
सचिन- समझ गया, ठीक है फिर बाकी सब तो वही है ना? वचन तो पहले भी कौन सा बोल कर देते थे वो तो मन में ही हो जाता था।
रूपा- नहीं यार! अपन नए ज़माने के लोग हैं। जब राखी का मतलब बदल गया, तो तरीका भी तो बदलना जरूरी है ना? मैंने कहा ना, सेक्सी रीमिक्स है। अभी तुम बताओ पहले राखी कैसे मनाते थे?
सचिन- देखो, सबसे पहले तो नहा-धो कर तैयार हो कर आमने-सामने बैठ जाते थे। फिर… दीदी मेरे हाथ में नारियल देती थी; फिर मुझे माथे पर तिलक लगाती थी; फिर मेरी आरती उतारती थी;
उसके बाद मुझे राखी बांधती थी; फिर वो मुझे मिठाई खिलाती थी और मैं उसे कोई गिफ्ट या पैसे देता था। बस…
रूपा- हाँ तो बस यही करना है लेकिन थोडा तरीका बदल गया है। एक काम करो पहले तुम ही आ जाओ मैं बताती जाऊँगी क्या करना है।

आसन तो थे नहीं, तो दो योगा मैट बिछा कर उन पर ही सचिन सोनाली, दोनों आमने सामने बैठ गए और बीच में पूजा की थाली रख दी गई। रूपा किसी पंडित की तरह उनको निर्देश देने लगी।
रूपा- हम्म, तो अब नारियल की जगह बहन अपनी इज्ज़त भाई के हाथ में देगी…
सोनाली ने उठ का अपनी लाल थोंग बड़े ही मादक तरीके से कमर मटकाते हुए निकाली और वापस बैठ कर उसे सचिन के हाथ में रख दिया।

सचिन ने अपनी बहन की चिकनी चूत को देखते हुए उस थोंग को सूंघा और फिर गोद में रख लिया।
रूपा- अब बहन, भाई को तिलक लगाएगी। इसके लिए थाली में खाने में डालने वाला लाल रंग रखा है, उसे बहन अपने भागोष्ठों (चूत के होंठों) पर लगा कर फिर भाई के माथे पर लगाए। ये बहन की चूत की सील है जो सबको बताएगी कि ये लड़का भगिनीगामी (बहनचोद) है।

इस बात पर सब के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई। सोनाली ने खाने के रंग को अपनी चूत पर लगाया और खड़ी हो कर सचिन के पास अपने दोनों पैर चौड़े करके खड़ी हुए और उसका सर अपने पैरों के बीच ठीक से सेट करके अपनी चूत से चिपका दिया। सोनाली ने ना जाने कितनी बार अपने पैरों के बीच पंकज का सर दबाया था लेकिन हमेशा उसकी चूत पंकज के मुह पर होती थी। ये माथे पर चूत लगाने का उसका पहले अनुभव था।

रूपा- अब आरती उतारने की जगह बहन अपने भाई का लंड खड़ा करेगी. अपनी श्रद्धानुसार चूस कर या हिला कर आप ये क्रिया संपन्न कर सकती है।
रूपा के बोलने के तरीके ने एक हँसी मजाक जैसा माहौल बना दिया था। लेकिन फिर भी उत्तेजना की कोई कमी नहीं थी, इसीलिए सचिन का लंड सोनाली के हाथ लगाते ही खड़ा हो गया, और एक दो झटकों में एकदम कड़क भी हो गया।
रूपा- अब बहन अपने भाई के तने हुए लंड पर राखी बांधे।
पंकज- राखी तुम हाथ पर ही बाँध देना। लंड के लिए मैंने बेशरम की वेबसाइट से ये कॉक-रिंग आर्डर कर दी थीं। लंड पर तुम इसे पहना दो।
पंकज ने वो कॉक-रिंग सोनाली को देते हुए जब ऐसा कहा तो सब की नज़र उस कॉक-रिंग पर ही थी।
सोनाली उसे सचिन के लंड पर पहनाने लगी।

रूपा- अब ये क्या बला है?
पंकज- देखो जो लंड होता है वो खून के दबाव से खड़ा होता है। जैसे कार के टायर में हवा भर के कड़क करते हैं वैसे ही लंड में खून भरा होता है। धमनियां खून लाती हैं और शिराएँ उसे वापस ले जाती हैं लेकिन उत्तेजना के समय धड़कन बढ़ जाने से, धमनियां तो बहुत खून लाती हैं लेकिन शिराएं सिकुड़ का खून को वापस जाने से रोक देती हैं और इससे उसमे दबाव के साथ खून भर जाता है और लंड खड़ा हो जाता है।
सोनाली- वो सब तो ठीक है लेकिन इन सब बातों का इस लंड की अंगूठी से क्या वास्ता?
पंकज- ये वास्ता है कि ये रबर की बनी है और लंड को हल्का सा दबा के रखती है। धमनियां शरीर में अन्दर गहराई में होती हैं लेकिन शिराएं काफी ऊपर होती हैं तो ये हल्का दबाव शिराओं को सिकोड़ कर रखता है और लंड खड़ा ही रहता है। इस तरह से ये अंगूठी लंड को ज्यादा देर तक खड़ा रखने में मदद करती है। जब रूपा ने पहली बार बताया था कि वो राखी कुछ अलग ढंग से मनाने वाली है तभी मैं समझ गया था, और मैंने ये आर्डर कर दी थी।

सचिन- बात तो जीजाजी बिलकुल सही कह रहे हैं। इन्होने इतना ज्ञान पिला दिया लेकिन लंड अभी भी खड़ा हुआ है बैठा नहीं। मतलब काम तो करती है ये चीज़।
इस बात पर सब हंस पड़े।

लेकिन अभी तो बहुत कुछ बाकी था। रूपा ने सोनाली को कहा कि वो अपने भाई को मिठाई खिलाए। सोनाली थाली से उठा कर एक छोटा रसगुल्ला, सचिन को खिलाने लगी लेकिन रूपा का कुछ और ही प्लान था।
रूपा- अरे नहीं भाभी ऐसे नहीं… रसगुल्ला अपनी चूत में डाल लो फिर सचिन अपने मुंह से चूस कर निकालेगा और खाएगा। अब समझ आया आपको कि तिलक के लिए चूत पर खाने वाला रंग क्यों लगवाया था?

सोनाली ने वैसा ही किया, और अब उसे ये भी समझ आ गया कि ये रसगुल्ले रस में डूबे हुए क्यों नहीं मंगवाए थे, क्योंकि उनको चूत के रस में जो डूबना था।

सोनाली ने रसगुल्ला अपनी रसीली चूत में डाला और नीचे लेट कर दोनों टाँगें ऊपर कर दीं। सचिन ने आ कर सोनाली की चूत को बहुत चूसने के बाद रसगुल्ला आखिर निकाल ही लिया और खा लिया।

रूपा- मिठाई खा ली! अब गिफ्ट में अपना लंड दे दो अपनी बहन की चूत में और चोद दो। हो गया चुदाई बंधन!

सचिन ने वैसा ही किया। कॉक-रिंग की वजह से उसका लंड पहले से ही पत्थर के जैसे कड़क था, वो अपनी बहन को वहीं योगा-मेट पर चोदता रहा और रूपा-पंकज उन दोनों का हौसला बढ़ाते रहे। आखिर सचिन अपनी बहन की चूत में ही झड़ गया लेकिन तब भी उसका लंड ढीला नहीं पड़ा और वो उसके बाद भी कुछ देर तक चुदाई करता रहा और तब तक सोनाली दोबारा झड़ चुकी थी।
उसके बाद पंकज और रूपा ने भी ऐसे ही अपना चुदाईबंधन मनाया।

तो इस तरह भाई-बहनों की इस चौकड़ी ने एक नए त्यौहार की शुरुआत की।

दोस्तो, मैंने रिश्तों में चुदाई को लेकर कई कहानियां पढ़ी हैं जिसमें होली के माहौल में भाई बहन चुदाई करते हैं। यहाँ तक कि दीवाली और अन्य त्यौहार भी कई बार इन कहानियों में देखे हैं मगर कभी रक्षाबंधन से सम्बंधित कोई खास कहानी पढ़ने को नहीं मिली थी, इसलिए मेरा मन था कि मैं एक ऐसी कहानी लिखूं।

जब पंकज सिंह जी की “बहना संग होली” कहानी पढ़ी तो सोचा इसे आगे बढ़ा कर रक्षाबंधन तक लाया जा सकता है। इसलिए मैंने ये पूरी कहानी की शृंखला लिखी।

अब मेरी वो तमन्ना तो पूरी हो गई है। अगले भाग में इस कहानी का समापन हो जाएगा। अगर आपको यह विषय पसंद न आया हो तो क्षमा चाहता हूँ लेकिन भाई-बहन में चुदाई के उदाहरण मैंने अपने असली जीवन में भी देखे हैं इसलिए यह कहानी लिखने का विचार स्वाभाविक था।
आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर बताएं। आप मुझे ईमेल कर सकते हैं।
आपका क्षत्रपति
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