लव की आत्मकथा-3

(Love Ki Aatmkatha-3)

This story is part of a series:

आपने मेरी कहानी के दो भाग पढ़े।
आपके पत्र मुझे मिले, आपका शुक्रगुजार हूँ कि आपने मुझे इतना प्यार दिया।
अब हाजिर हूँ अपनी कहानी का अगला भाग लेकर।

मैं उस रात काफ़ी अनमना सा महसूस कर रहा था। एक तो मुझे स्वाति की बातों का ख्याल आ रहा था, दूसरे मेरी वासना मुझ पर हावी थी। मैं दुखी सा मन लेकर सोने चला गया। पर आँखों में नींद कहाँ थी। सारी रात मैं चुदाई के सपने देखता रहा और मन मसोसता रहा। पर मैं कर भी क्या सकता था। अगली सुबह मैं स्वाति से नजरें नहीं मिला पा रहा था, मुझे लग रहा था जैसे मैं खुद की नजरों में गिरता जा रहा हूँ।
कुछ दिनों तक तो सब ठीक ठाक चलता रहा। मैंने पता नहीं क्यों सेक्स कथाएँ पढ़नी छोड़ दी थी।

चार दिन बाद मैं शाम के समय में घर की छत पर बैठकर मोबाइल फोन पर अन्तर्वासना की साईट पर प्रगति का अतीत पढ़ रहा था। तभी अचानक स्वाति आ गई और पूछने लगी- क्या कर रहे हैं।
मैंने कहा- कुछ नहीं।
तो उसने पूछा- आप किसी लड़की से बात कर रहे थे ना?
तो मैंने कहा- नहीं तो !
फ़िर उसने कहा- मुझे प्लीज एक विडियो दिखा दो ना मोबाइल पर !
मैंने कहा- ठीक है !

और जल्दी से अन्तर्वासना की साईट को बन्द करके उसे ग़दर मूवी का ‘उड़ जा काले कावां” वाला गीत लगाकर दे दिया।

वो उसे देख ही रही थी कि मम्मी ने मुझे पुकारा, मैंने स्वाति से कहा- तुम तब तक वीडियो देखो, मैं आता हूँ।

यह कह कर मैं नीचे चला गया। मम्मी ने मुझे दुकान से चायपत्ती लाने को कहा। करीब 20 मिनट के बाद मैं जब आया तो देखा स्वाति छत पर ही है। मैं भी छत पर गया तो देखा कि स्वाति जल्दी से वीडियो बन्द करना चाहती थी।

मैंने जब उससे मोबाइल लिया तो देखा उस पर बूम फ़िल्म का गाना चल रहा था। स्वाति ने कहा- छी ! कैटरीना कैफ़ कितना गन्दा सीन करती है।

मैंने कहा- इसमें गन्दा क्या है?
तो उसने कहा- कितने छोटे कपड़े पहने हैं उसने !
तो मैंने कहा- इसने तो छोटे ही सही पर कपड़ा तो पहना है, विदेश की हिरोइन तो कुछ भी नहीं पहनती है।
तो उसने कहा- आप झूठ बोलते हैं।
मैंने कहा- मैं तुम्हें अभी दिखा सकता हूँ पर तुम वादा करो कि किसी और से नहीं कहोगी।
तो उसने कहा- ठीक है।

मैं उसे नेट पर विदेशी हिरोइन की नंगी तस्वीरें दिखाने लगा। मैं उससे सटकर खड़ा था, दो चार फोटो दिखाने के बाद मैं उसके और करीब सट गया। अब मेरी कोहुनी उसकी मांसल चूचियों से सट गई। उसने कोई विरोध नहीं किया।

कुछ देर के बाद मैंने उसके कन्धे पर अपना एक हाथ रख दिया, वो कुछ नहीं बोली, वो फोटो देखने में मग्न थी। तभी धोखे से एक वीडियो खुल गया जिसमें चुदाई का सीन चल रहा था।

उसने अचानक कहा- मुझे अब नहीं देखना है !
और नीचे चली गई, मैं भी कुछ नहीं बोला।

उस दिन पड़ोस में शादी थी। मेरी मम्मी और दादी वहीं चली गई। उन्होंने स्वाति को भी चलने को कहा तो उसने कहा- मेरे सर में दर्द है।

तो मम्मी ने कहा- ठीक है, मैंने खाना बना दिया है, भैया को खिला देना और तीनों बहन भी खा लेना !
और वो चली गई।

रात में जब अदिति और दिव्या पढ़ने के लिये आई तो मैंने पूछा- स्वाति कहाँ है?
तो दिव्या ने कहा- नहीं पता !
मैने कहा- कोई बात नहीं, तुम लोग पढ़ो, मैं उसे बुला कर लाता हूँ। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

मैं दूसरे कमरे में गया तो देखा कि स्वाति रजाई ओढ़कर पेट के बल लेटी हुई है। मैंने उसे आवाज दी- स्वाति ! स्वाति !

उसने कुछ नहीं बोला। मैं उसे हिलाकर उठाने लगा, तभी अचानक मेरी अन्तर्वासना ने फिर से जोर मारा। मैं उसके बगल में जाकर लेट गया और रजाई खींचकर ओढ़ ली।
मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया, वो कुछ नहीं बोली।

मैं धीरे-धीरे उसकी पीठ को सहलाने लगा। वो उसी तरह लेटी रही। मैंने अपना घुटना उठाकर धीरे से उसके चूतड़ों पर रख दिया। मेरा 6’ का लौड़ा खड़ा हो गया और उसकी कमर से मैं सट गया। मैं अपना हाथ उसके बगल से ले जाकर उसकी चूचियों को सहलाने लगा। मैं अपने दायें हाथ से उसकी दाईं चूची को सहला रहा था।

मैं तो जैसे जन्नत की सैर कर रहा था। क्या गुदाज और मांसल चूचियाँ थी उसकी।
अब मुझसे रहा नहीं गया और और मैंने उसको अपनी ओर घुमा दिया।

वो थोड़ी सी कुनमुनाई पर मेरी ओर घूम गई। अब मेरा पैर उसकी जान्घों पर था और मेरा हाथ उसकी चूचियों पर ! मैं उसके स्वेटर के बटनों को एक एक करके खोल दिया और अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिए। अब मैं पूरी तरह से स्वाति के ऊपर चढ़ गया। मैं अपने दायें हाथ से उसकी चूची को सहला रहा था और बायाँ हाथ से उसकी चूत को जो कि मेरे लण्ड के नीचे थी।

कुछ देर तक यूँ ही करने के बाद मैंने उसके टॉप को खोल दिया। अब स्वाति भी मेरे होंठ चूस रही थी। तभी मुझे कुछ आवाज सुनाई दी, मैं झटपट उठा और बाहर निकल आया तो देखा दिव्या रो रही थी।

मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो अदिति ने कहा- कह रही है कि दादी के पास जाना है शादी देखने !
मुझे तो मानो मनचाही मुराद मिल गई, मैंने कहा- ठीक है, जाओ इसे दादी के पास ले जाओ।

अदिति दिव्या को लेकर चली गई। मैंने दरवाजा बन्द किया और स्वाति के कमरे में आ गया स्वाति अभी भी उसी तरह बिना टॉप के रजाई के अन्दर लेटी हुई थी। मैं भी रजाई के अन्दर गया और उसके चुचूक को चुसना शुरू कर दिया। उसका एक हाथ मेरे सर पर आ गया और वो मेरे बालों को सहलाने लगी। अब मैं बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों को चूसने लगा, ना जाने कौन सा आनन्द आ रहा था, मेरे लण्ड से कुछ चिपचिपा सा निकल रहा था।

मैंने उसके स्कर्ट को नीचे सरका कर निकाल दिया फिर पैंटी को भी उतार दिया। अब वो पूरी तरह नंगी थी। हालाँकि कमरे में कम रोशनी के कारण मैं उसके बदन को देख नहीं पाया पर उसके सारे शरीर को टटोल रहा था।

मैंने उसकी चूची को चूसना छोड़ा और उसकी बुर को जीभ से सहलाने लगा। उसने दोनों हाथों से मेरे सिर को थाम लिया और मेरे बालों में उंगलियाँ फिराने लगी।

मैं धीरे धीरे उसकी बुर को चाटे जा रहा था। मैंने अपना शर्ट और पैंट खोला और अण्डरवीयर भी उतार दिया अब मैं भी पूरी तरह से नंगा था।

मैं उल्टा लेट गया और अपना लण्ड उसके मुँह में दे दिया। दो सेकण्ड मुँह में रखने के बाद उसे उबकाई आने लगी तो मैंने अपना लण्ड उसके मुँह से निकाल कर उसके हाथों में थमा दिया।

पहले तो उसने उसे पकड़ने में ना-नुकुर किया पर कुछ देर बाद वो मेरा लण्ड पकड़कर आगे-पीछे करने लगी। मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से सहला रहा था।

कुछ देर के बाद मैं उसके ऊपर आ गया और उसको बोला- अपनी टाँगों को थोड़ा सा फैला !

तो उसने फैलाया मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रखकर दबा दिया, वो दर्द से कराह उठी और मुझे अपने ऊपर से धकेलने लगी। मैंने लण्ड उसकी चूत से हटाया और उसके ऊपर ही लेटकर उसकी चूचियों को चूसने लगा। जब वो थोड़ा रिलैक्स हुई तो मैंने उसे कहा- पहली बार थोड़ा दर्द होता है, तुझे बरदाश्त करना होगा।

तो उसने कहा- ठीक है।

मैंने फिर से उसकी चूत पर अपन लण्ड सटाया और धीरे से दबाना शुरु कर दिया। वो अपने होठों को दांतों से दबाये दर्द पीने की कोशिश कर रही थी। मैंने जोर से अपने लण्ड को दबाया तो लण्ड उसकी चूत को चीरता हुआ उसके अन्दर चला गया, उसके मुँह से दबी दबी सी आह निकल पड़ी। मुझे लगा जैसे मेरा लण्ड किसी ने छिल दिया हो, इतने जोर का दर्द हुआ कि मन किया लण्ड को उसकी चूत से निकाल लूँ।

पर मैं यह मौका गवाँना नहीं चाहता था, कुछ देर वैसे ही उसके ऊपर लेटे रहने के बाद मैंने अपने लण्ड को उसकी बुर में धीरे-धीरे ऊपर नीचे करना शुरु कर दिया।

धीरे-धीरे मेरी स्पीड बढ़ती चली गई। एकाएक हम दोनों एक साथ ही एक दूसरे से जोर से चिपक गये। हम दोनों ही की आँखें बन्द हो गई और एक आनन्द की धार सी फ़ूट पड़ी। कुछ देर बाद हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए। स्वाति ने मेरे लब चूम लिए और उठकर खड़ी हो गई। उसका नंगा जिस्म मेरे सामने था, कसी-सख्त चूचियाँ, चूत पर हल्के रेशमी बाल, हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने, बिछावन पर थोड़ा लाल लाल खून लगा हुआ था।

स्वाति ने उसे बाथरूम में साफ किया। उस रात हमने एक बार चुदाई और की।
आपको कहानी कैसी लगी, जरूर बताइयेगा।
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