बहनचोद भाई की कहानी: घर की लाड़ली-7

(Behanchod Bhai Ki Kahani: Ghar Ki Ladli- Part 7)

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दोनों भाई उठे और अपने कमरे में चले गए. दोनों भाइयों में लगभग छह महीने से बातचीत बंद थी और इतने दिन के बाद वो आपस में बातचीत करने वाले थे. दोनों को थोड़ा अजीब लग रहा था पर अब बात करना इतना जरूरी हो गया था कि क्या कहें. अगर वो बात कर के आपस में सुलह नहीं करते तो उनकी वो कामदेवी बहन उन्हें अपना चूत तो क्या एक चुम्बन भी नहीं देने वाली थी.

अंदर जाते ही रजत ने बातचीत की पहल की:

रजत- भैया… मुझे सच में नहीं पता था कि आपका सपना के साथ कुछ चक्कर चल रहा है? और जिस दिन मुझे पता चला उसी दिन से मैंने उस से बातचीत करना बंद कर दिया. कसम से…
विक्रम- मैं अब समझ गया छोटे… ये मेरी ग़लतफहमी थी… मयूरी सच कह रही है, सपना ने हम दोनों का चूतिया काटा है… पर मैं यह बात समझ नहीं पाया… मुझे माफ़ कर दे…

और ऐसा कहते हुए विक्रम रजत के गले लग गया… फिर रजत ने कुछ महसूस किया और बोला शरारती अंदाज में- भैया… आपका लंड तो अभी से खड़ा है?
विक्रम झट से उसके लंड को पकड़ते हुए- और ये क्या है? तेरा खड़ा नहीं है क्या?
रजत हँसते हुए- पर भैया… अपने अपनी छोटी बहन की चूचियां दबायी… चूत चाटी और उसको अपना लंड भी चुसाया? छी… छी… आपको शर्म नहीं आयी?
विक्रम- और तूने…? अपनी बड़ी बहन की चूचियों को मसला? उसकी चूत तो चाटी ही, उसकी गांड भी चाटी? और अब तेरा ये लंड उसकी चूत फाड़ने को बेताब है?

रजत- हाँ भैया… जिसकी बहन इतनी धमाकेदार माल हो, वो अपनी बहन को चोदे बिना कैसे रह सकता है? पता नहीं अब तक कैसे मैंने अपने आपको कण्ट्रोल में रखा… जब भी इसकी भारी-भारी चूचियों और बड़े-बड़े गांड को देखता तो तो बस मुठ मार के रह जाता था. पर आज ईश्वर ने ये मौका दिया है… चलो… दोनों भाई पक्का बहनचोद बन जाते हैं… और उसकी चूत के चीथड़े उड़ाते हैं.
विक्रम- हाँ मेरे भाई… सपना ने अपनी चूत मारने नहीं दी, पर इसकी तो मैं छोडूंगा नहीं… चल!

दोनों भाई कमरे से बाहर आये और मयूरी के पास पहुंचे. बाहर आते ही दोनों ने मयूरी की ब्रा को निकाल फेंका और उसकी एक एक चूची को अपने हाथ में भर लिया.
फिर विक्रम बोला- मयूरी, तू यही चाहती है ना कि हम दोनों भाई एक साथ तुझे चोदें… तो तेरी ये ख्वाहिश हम जरूर पूरी करेंगे… हमने अपनी पुरानी बातों पर सुलह कर ली है… और अब तुझे एक-साथ अपने दोनों भाइयों का लंड का मजा मिलेगा… अब तो तू खुश है न?

मयूरी को पक्का पता था कि यही होने वाला है. इतनी अच्छी चूत चटाई और लंड चुसाई के बाद मयूरी के शरीर का भोग करने से तो स्वयं भगवान् भी मना नहीं कर सकते थे, ये तो फिर भी दो सामान्य इंसान थे.
विक्रम की बात सुन लेने के बाद ख़ुशी से अपने दोनों भाइयों का लंड अपने एक-एक हाथ में भरते हुए मयूरी बोली- हाँ मेरे भाइयो… मुझे पता था… तुम दोनों मेरी जवानी की प्यास को ऐसे तड़पने के लिए नहीं छोड़ोगे… मुझे पता था कि तुम मेरी राखी का कर्ज जरूर उतारोगे. आओ मेरे बहनचोद भाइयो… चोद दो अपनी बहन को… और इतना चोदो कि मैं तृप्त हो जाऊँ… मेरी जवानी की प्यास बुझ जाये.

रजत- हाँ दीदी… आज हम दोनों भाई तुम्हें इतना चोदेंगे कि तुम्हें अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए किसी और का चेहरा और लंड देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. हम दोनों भाई मिलकर तुम्हारी चूत के चीथड़े-चीथड़े कर देंगे.

और ऐसा कहते हुए रजत ने मयूरी की पैंटी उतार कर फेंक दी. अब मयूरी अपने दोनों भाइयों के सामने एकदम आदमजात नंगी खड़ी थी, उसके शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं था. उसकी आँखों के सामने उसके दोनों भाई उसके इस कामुक शरीर से खेल रहे थे और वो उन हर एक छुअन का आनन्द ले रही थी.

वो उन दोनों का लंड पकड़कर टीवी के पास से चलकर सोफे तक ले आई और दोनों भाइयों को सोफे पर बैठाया पर खुद खड़ी रही. और फिर बहन ने अपना सीना आगे कर दिया जिससे दोनों उसकी चूचियों से खेल सकें.

दोनों भाई उसकी एक-एक चूची को अपने हाथ से मसलना शुरू कर चुके थे और एक-एक हाथ से उसकी गांड के एक-एक भाग का जायजा लेने में लग गए थे.
थोड़ी देर में रजत अपना एक साथ मयूरी की जांघों से होते हुए उसकी चूत तक ले गया और उसकी चिकनी चूत जो पहले से ही गीली हो चुकी थी, को धीरे धीरे अपने उँगलियों से छेड़ने लगा.

इसी बीच विक्रम अपना एक हाथ गांड से होते हुए गांड की छेद पर ले गया और अपनी उँगलियों से मयूरी की गांड की दरार और छेद को छेड़ने लगता है.
अब मयूरी के आनन्द की सीमा नहीं थी. वो बस सिसकारियां और आहें भर रही थी.

मयूरी- आह… आ… माँ… आह… मुझे बहुत… मजा आ रहा है मेरे बहनचोद भाइयो… तुम मुझे स्वर्ग की सैर करा रहे हो.

मयूरी खड़ी थी और उसके दोनों भाई सोफे पर बैठ कर उसके जिस्म के साथ खेल रहे थे. उनकी हरकतों की वजह से मयूरी को अब खड़ा नहीं हुआ जा रहा था, उसकी टाँगें जवाब दे रही थी, मदहोशी के उस आलम में वो एकदम बेजान हुई जा रही थी. वो इस समय बस आहें भर पा रही थी… उसको और किसी चीज़ का कोई होश नहीं था.

थोड़ी देर तक ऐसे ही उसके जिस्म के साथ खेलने के बाद रजत उठा और मयूरी के रसभरे कम्पकपाते होंठों पर अपने होंठ रख दिए. और वो उसके होंठों के साथ अपनी जबान और होंठों से कलाकारी दिखाने लगा… मयूरी को रजत की यह अदा बहुत जी ज्यादा पसंद आयी. वो कुछ बोल नहीं पा रही थी, बस आनन्द ले रही थी.

इधर विक्रम ने मयूरी की एक टांग को उठाकर अपने कंधे पर रख लिया और अपने चेहरे का रुख मयूरी की चूत की ओर कर दिया… उसने देखा कि गुलाब की पंखुड़ियों की तरह मयूरी की चूत एकदम गुलाबी-सी है… उसकी चूत के आस-पास बाल को कोई नामो-निशान तक नहीं था.

मयूरी की चूत गीली हो चुकी थी… उसने अपने होंठ और जीभ से मयूरी के चूत का स्वाद लेना शुरू कर दिया.
मयूरी इस दोतरफे हमले से एकदम विचलित हो गयी … उसकी सिसकारियां तेज़ हो रही थी… पर रजत उसने मुँह को बंद कर रहा था अपने मुँह से… मयूरी के होंठों पर रजत के होंठों का ताला इतना गहरा था की उसके मुँह से बस ऐसी आवाज़ ही आ पा रही थी.

मयूरी- ममम… आ… मम… ..म … ऊ… म…

रजत ने अपने हाथ से मयूरी की मखमल जैसी कोमल गांड पर अपना हाथ फेरना शुरू कर दिया और फिर धीरे-धीरे उसके हाथ की उंगलियाँ मयूरी की गांड की दरार में चलने लगी. मयूरी के आनन्द की चरमसीमा आ चुकी थी… वो इतनी देर में कम-से-कम पांच बार झड़ चुकी थी. अब उसका अपनी टांगों पर खड़ा रहना मुश्किल हो रहा था. उसने अपने होंठों का ताला रजत से जबरदस्ती खुलवाया और धप्प से सोफे पर बैठ गयी.
अब विक्रम खड़ा हो गया. रजत तो पहले से ही खड़ा था. अब उसके दोनों भाई उसके सामने खड़े थे और वो अपने मादक-मदमस्त नग्न शरीर के साथ उनके सामने बैठी थी.

उसने दोनों भाइयों को अपने कपड़े उतरने का इशारा किया. दोनों ने बिना वक्त गंवाए अपने कपड़े निकाल फेंके. अब वो दोनों भाई अपनी बहन के सामने एकदम नंगे खड़े थे और दोनों का लंड एकदम जैसे उफान मारता हुआ खड़ा था. मयूरी ने दोनों के लंड को बड़े प्यार से देखा और अपने दोनों हाथों से उनको पकड़ लिया. उसने नोटिस किया कि दोनों का लंड साइज और मोटाई में लगभग एक जैसा ही है. दोनों लंड मोटे थे और लम्बे-तगड़े थे.

उसने पहले अपने बड़े भाई विक्रम के लंड को अपने मुँह में लिया और रजत के लंड को अपने हाथ से हिलाने लगी. फिर थोड़ी देर बाद वो रजत के लंड को अपने मुँह में डालकर विक्रम के लंड को हाथ से हिलाने लगी.

इस तरह से मयूरी बारी-बारी से कभी एक का लंड चूसती और दूसरे का लंड अपने हाथ से हिलाती, फिर अगले ही क्षण दूसरे का लंड चूसती और पहले का लंड अपने हाथ से हिलाती. इस तरह से वह दोनों के लंड से बहुत देर तक खेली और फिर थोड़ी देर बाद दोनों के लंड से एक साथ अमृत की बरसात हुई… दोनों के लंड से जो वीर्य का ज्वालामुखी फटा, वो मयूरी के चेहरे पर फ़ैल गया और ढलते हुए उसकी चूचियों पर गिरने लगा.
मयूरी ने बड़े प्यार से जितना हो सके उनके अमृतरस को चाट लिया और बाकी अपने बदन पर मलने लगी.

अब तक सब लोग थक चुके थे, रजत और विक्रम भी अब सोफे पर बैठ गए.

फिर थोड़ी ही देर में दोनों का तूफानी लंड फिर से उफान मारता हुआ खड़ा हो गया तो विक्रम ने पूछा- तो मयूरी बहन, अपनी चूत की सील किससे तुड़वाना पसंद करोगी?
मयूरी- तुम दोनों में जिस की मर्जी जो… मेरी चूत की सील खोल सकता है… मुझे कोई ऐतराज़ नहीं…
विक्रम- रजत तुम्हारा क्या कहना है?
रजत- भैया… जो भी दीदी की इस प्यारी सी चूत का सील तोड़ेगा वो बहुत ही खुसनसीब होगा… पर मैं ये मौका आपको देना चाहता हूँ… समझ लो सपना के बदले में मेरी तरफ से आपको तोहफा…
विक्रम- धन्यवाद मेरे भाई… तुम्हारा ये मुझ पर एहसान रहा… जो मैं जिंदगी भर कभी भूल नहीं पाऊँगा.

रजत- तो फिर देर किस बात की? तोड़ दो इस रंडी की चूत का सील…
विक्रम- ठीक है फिर… आज मैं वो खुशनसीब भाई बनने जा रहा हूँ अपनी सगी बहन की चूत का सील तोड़ेगा… बहन भी ऐसी-वैसी नहीं… एक अप्सरा जैसी बहन… तुम्हें कभी बताया नहीं मैंने … पर तुम्हारी जवानी को देखकर कई बार मुठ मारी है मैंने… आज मुझे उसी लंड से तुम्हारे चूत का चोदने का मौका मिल रहा है… तो ठीक है फिर… मयूरी?
मयूरी- हाँ भैया?

विक्रम- थोड़ा दर्द होगा… देखो ये मेरे लिए भी पहली बार है… तो मुझे भी सील तोड़ना तो दूर, चूत चोदने का भी अनुभव नहीं है… पर मैं कर लूंगा… तुम थोड़ा बर्दाश्त करना मेरी बहन… क्योंकि थोड़े से दर्द के बाद बहुत मजा आने वाला है.
मयूरी- तुम चिंता मत करो भैया… मैं इस दर्द के लिए कई सालों से तड़प रही हो… आज चाहे जो भी हो, तुम रुकना मत… मैं कितना भी रोऊँ, चिलाऊँ, तुम मेरी चूत की चुदाई चालू रखना… आज मुझे लड़की से औरत बना दो भाई और खुद मर्द बन जाओ… मेरे इस कौमार्य को भंग करो.

बहन की चूत की कहानी जारी रहेगी.
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