ओरल सेक्स स्टोरी: घर की लाड़ली-5

(Oral Sex Story: Ghar Ki Ladli- Part 5)

This story is part of a series:

मयूरी इसी मौके की तलाश में थी शायद. उसने रजत को शांत करते हुए कहा- रजत भाई, घबराओ नहीं… पर मेरी बात सुनो… तुमने मुझे पूरी नंगी देख लिया है… और मेरी गांड में उंगली भी की है… तो अब तुम्हें इसके बदले में मेरे लिए कुछ करना होगा.
रजत- क… क्या… करना होगा दीदी?
मयूरी- तुम अपने कपड़े उतारो… सारे!
मयूरी ने अपना फरमान जारी किया.

रजत बिल्कुल समझ नहीं पा रहा था कि यह उसके साथ क्या हो रहा है, वो अवाक् रह गया पर फिर धीरे से बोला- अरे? क्यूँ दीदी?
मयूरी- क्योंकि तुमने मुझे पूरा नंगा देख लिया है तो अब मुझे अच्छा नहीं लग रहा है. इसलिए मैं भी तुमको पूरा नंगा देखूंगी… फिर मुझे बराबर लगेगा… तुम समझ रहे हो न?
रजत घबरा भी रहा था और शर्मा भी रहा था. उसको कुछ समझ नहीं आया, उसने पूछा- पर इससे क्या होगा?
मयूरी- बोला न… मुझे अच्छा लगेगा.

रजत एकदम बेबस महसूस कर रहा था. वो अपनी ही बहन के आगे नंगा मजबूर था जो इस समय खुद ही नंगी थी, पर यह उसके लिए राहत की बात थी क्योंकि किसी नंगे आदमी के सामने नंगा होने में उतना बुरा नहीं लगता. पर अगर वो नंगा इंसान अगर आपकी खुद की बहन हो तो मामला थोड़ा अलग होता है.

रजत आग्रह करते हुए- पर ये मेरा ल.. लंड तो छोड़ दो!
मयूरी- नहीं, अगर तुम भाग गए तो? मैं तो नंगी हूँ, अभी तुम्हारा पीछा भी नहीं कर सकती इस अवस्था में?
रजत हथियार डालते हुए- ठीक है.

रजत ने अपनी टी-शर्ट उतारी और फिर बनियान. फिर उसने अपने शॉर्ट्स उतारे और सिर्फ चड्डी में खड़ा हो गया. वैसे भी उसका लंड पहले से ही बाहर था जो उसकी कमसिन नंगी बहन ने अपने हाथ से पकड़ा हुआ था. फिर भी वो अपना चड्डी उतारने में थोड़ा सकुचाया.
मयूरी- उतरो यार इसको भी… मैं तुम्हारे सामने एकदम नंगी खड़ी हूँ और तुम शर्मा रहे हो? मुझे याद है कि अभी तुमने अपनी उंगलियाँ मेरी गांड में डाल रखी थी. जल्दी करो… वैसे तुम घबराओ नहीं… मैं वादा करती हूँ कि तुम्हें इस बात के लिये कभी भी जीवन में पछतावा नहीं होगा.

अब मयूरी का रोना बंद हो चुका था और उसके चेहरे पर शरारती मुस्कान ने अपनी जगह ले ली थी. रजत भी धीरे-धीरे सामान्य महसूस कर रहा था पर उसका लंड अभी भी अपनी बहिन के इस स्वरूप को देखकर एकदम खड़ा था. ऊपर से मयूरी ने उसका लंड अपने हाथ से पकड़ रखा था और बीच-बीच में दबा भी रही थी.

रजत को अब शायद इस बात का एहसास हो चुका था कि आगे क्या होने वाला है.
उसने अपनी चड्डी भी उतार दी और बोला- ये लो दीदी… हो गया मैं भी एकदम नंगा… अब तुम्हें अच्छा लग रहा है?
मयूरी- हाँ… बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है… और तुम्हें?
ऐसा कहते हुए मयूरी रजत के एकदम करीब आ गयी और उसके लंड को गौर से देखने लगी.

रजत अब मयूरी की चूचियों को बेहिचक देख रहा था- मेरा क्या? मैं तो वही कर रहा हूँ जो तुम कह रही हो!
मयूरी- अच्छा? तुम्हें अपना लंड ऐसे खड़ा करने के लिए मैंने कहा क्या? और जो तुम इतनी देर में कभी मेरी चुत तो कभी मेरी ये चूचियां देख रहे हो इसके लिए मैंने कहा क्या? और जो थोड़ी देर पहले तुम अपनी उंगलियाँ मेरी गांड में चला रहे थे, वो? उसके लिए भी मैंने कहा था क्या?
रजत- वो… वो… नहीं… पर…
मयूरी- और ये क्या तुम मेरी चूचियों को ऐसे घूरे जा रहे हो? इनको खा जाओगे क्या?
रजत- न… नहीं तो… मैं नहीं देख रहा?

मयूरी ने फिर वही तीर मारने की सोची जो उसने कल रात को अपने बड़े भाई पर मारा था.
मयूरी थोड़ा मायूस होते हुए- मतलब मेरी चूचियां देखने लायक नहीं हैं क्या?
रजत- अरे नहीं… ये तो कमाल की है.
मयूरी- फिर तुमने ये क्यूँ कहा कि तुम नहीं देख रहे? मतलब मैं तुम्हारे सामने एकदम नंगी हूँ… और तुम मेरी चूचियों को देखो भी ना तो ये तो वही बात हुई ना कि ये उतनी आकर्षक नहीं है?
रजत- दीदी… ऐसी बात नहीं है… ये इतनी आकर्षक हैं कि इन पर से नजर हटाना मुश्किल है. मेरा तो जी करता है कि इनको खा जाऊँ.
मयूरी ख़ुशी और आश्चर्य से- सच रजत??
रजत- हाँ दीदी… सच में…
मयूरी- और क्या करना चाहते हो तुम मेरे साथ?
रजत- तुम तो काम की देवी हो दीदी… तुम्हारा शरीर तो जैसे वरदान है इस संसार के ऊपर!

और ऐसा कहते हुए रजत ने अपना एक हाथ मयूरी की चूची पर रख दिया और हल्के से दबा दिया.
मयूरी चिहुँक पड़ी… हालाँकि वो इस चीज़ के लिए पहले से तैयार थी पर सेक्स को लेकर वो भी पहले से अनुभवी नहीं थी. उसको भी इसका हर सुख नया-नया सा लग रहा था. वो धीरे से फिर से रजत के गले लग गयी और बोली- तो अगर तुम मेरे साथ कुछ करना चाहते हो रजत तो यही वक्त है… तुम्हें मेरी अनुमति है मेरे शरीर से खेलने की.
रजत- सच दीदी…
मयूरी- हाँ मेरे प्यारे छोटे भाई… खा जाओ अपनी दीदी के इस जवान शरीर को!

रजत आगे बढ़ा और अपने होंठ मयूरी के होंठ पर रख दिये, उसका एक हाथ मयूरी की जांघों के बीच चुत के साथ छेड़छाड़ करने में व्यस्त हो गया जबकि दूसरा हाथ उसकी एक चूची को उमेठने में लग गया.
मयूरी आंखें बंद करके इन सुखद पलों का आनंद लेने लगी, साथ ही साथ वो रजत के लंड के साथ खेलती रही.

रजत थोड़ी देर मयूरी को गहरा चुम्बन देने के बाद उससे अलग हुआ और नीचे बैठ गया. वो अपना मुँह मयूरी की चुत के पास ले जाकर उसको सूंघने लगा और मयूरी ने अपनी चुत की झाँटें आज ही साफ़ की थी तो उसका योनिक्षेत्र एकदम साफ़ सुथरा था. मयूरी की कंवारी चुत एकदम गुलाबी-गुलाबी लग रही थी और उसकी खुशबू रजत को पागल कर रही थी. रजत के लिए जीवन में यह पहली बार था जब वो किसी लड़की की नंगी चुत को इतने नजदीक से देख रहा था. और किस्मत की बात थी कि वो चूत उसकी खुद की बड़ी बहिन की थी, वो कमाल की सुंदरी थी, बल्कि कहा जाये तो कामदेवी थी.

मयूरी ने अपना एक पाँव उठाकर बिस्तर पर रखकर रजत को अपने चूत चाटने का आमंत्रण दिया. रजत अपनी जबान से मयूरी को सुख देने में जुट गया और मयूरी अब स्वर्ग का आनंद लेने लगी. दोनों भाई-बहन काम वासना में लिप्त सब कुछ भूलकर एक दूसरे पर कुर्बान हो जाना चाहते थे. क़रीब 15 मिनट की लगातार चुत-चटाई में मयूरी एक बार झड़ गयी और रजत अपनी कामुक सगी बहन के कामरस का एक एक बून्द चाट गया.

फिर उसने मयूरी को पलटने को बोला और उसके पीछे जाकर उसकी गांड के छेद पर अपनी ज़बान रखी और बड़ी ही कला के साथ वो अपनी बहन की गांड को अपने ज़बान से चाटने लगा।
मयूरी के लिए यह सुख एकदम नया था, वो पागल हुई जा रही थी। उसको विश्वास नहीं हो रहा था कि गांड को चटवाने में इतना मज़ा आता होगा। पर अभी उसको ये सुख मिल रहा था।

थोड़ी ही देर में मयूरी ने इतने सुख का अनुभव किया कि वो चरम सीमा पर पहुँच गयी और उसके चूत ने अपना अमृत छोड़ दिया। रजत को इस बात का अहसास हुआ और वो झट से अपना मुँह आगे को लाया और उसकी चूत से निकले हुए अमृत की एक एक बून्द फिर से चाट गया.

मयूरी ने अब रजत को बिस्तर पर बैठने को कहा. रजत ऐसे बैठा था कि उसके पाँव नीचे जमीन पर लटक रहे थे. मयूरी ने उसके पैर फैलाये और उसके लंड को अपने हाथ से पकड़कर अपने रसीले होंठों पर रख लिया. पहले तो उसने अपनी जबान से उसके लंड को चाटा फिर उस प्यार से मूसल जैसे लंड को अपने मुँह में ले लिया और अपना मुँह आगे-पीछे करने लगी, जैसे वो अपना मुँह अपने छोटे भाई के लंड से चुदवा रही हो.

लगभर दस मिनट की इस नायाब क्रिया के बाद जब रजत के लंड ने अपना पानी छोड़ा तो मयूरी ने उसके लंड से निकले हुए एक-एक कतरे को चाट-चाट कर साफ कर दिया.

फिर रजत ने मयूरी को उठाया और उसके गुलाबी रसीले होंठों पर अपने होंठ रख दिए. रजत को उसके मुँह से अपने ही वीर्य का स्वाद आ रहा था पर वो इस समय हर उस चीज़ का आनंद ले रहा था जिसको वो अब तक गन्दा समझता रहा था.

थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे के होंठ और जबान को चाटते रहे कि अचानक घर के दरवाजे की घंटी बजी.

मयूरी- लगता है मम्मा आ गयी.
रजत- हाँ… शायद!
मयूरी- अब?
रजत- अब तो बाकी का काम बाद में करना पड़ेगा.
मयूरी- ठीक है मेरे राजा… अपनी दीदी की चूत को एक बार प्यार से अलविदा कहो और जाकर दरवाजा खोलो… मुझे कपड़े पहनने में थोड़ा वक्त लगेगा.
रजत- ठीक है मेरी जान!

ऐसा कहते हुए रजत ने मयूरी की चूत पर एक लम्बा सा चुम्बन दिया और अपने कपड़े पहनता हुआ बाहर चला गया. बाहर जाते समय उसने अपने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था ताकि मयूरी आराम से अपने कपड़े पहन सके.

मयूरी ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहने और मुस्कुराती हुई अपने बिस्तर पर लेट गयी. बाहर से उसको शीतल (उसकी माँ) की रजत से बातचीत की आवाज़ आ रही थी तो वो समझ गयी कि माँ आ गयी है.

अब वो अपने आगे के योजना के बारे में सोचने लगी. अब तक उसने अपने दोनों भाइयों को ट्राई कर लिया था और दोनों उसके चंगुल में फंस चुके थे. उसने दोनों को अपने चुत का स्वाद चखा दिया था और दोनों के लंड का स्वाद चख चुकी थी. अब वो ये सोच रही थी कि आगे किस भाई से अपने चुत चुदवायेगी।

फिर उसको ख्याल आया कि क्यूँ ना दोनों से एक साथ सेक्स का मजा लिया जाये?
पर यह कठिन काम था… क्योंकि दो बड़े कारण थे – एक तो यह कि दोनों सगे भाई थे और दोनों को एक दूसरे के साथ मयूरी के सम्बन्धों के बारे में पता नहीं था. दूसरा यह कि दोनों की कुछ महीनों से आपस में बनती नहीं थी.

फिर मयूरी ने निश्चय किया कि यही सही मौका है दोनों भाइयों को मिलाने का… इसी बहाने दोनों में सुलह भी हो जाएगी और उसको दोनों के लंड से एक साथ चुदवाने का मौका भी मिल जायेगा. अब वो अपने आगे की योजना पर काम करने लगी.

कहानी जारी रहेगी. ओरल सेक्स स्टोरी कैसी लग रही है, मुझे मेल करें!
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