एक भाई की वासना -40

(Ek Bhai Ki Vasna-40)

This story is part of a series:

सम्पादक – जूजा जी

हजरात आपने अभी तक पढ़ा..
पहले तो जाहिरा ने अपना हाथ हटाने की कोशिश की.. लेकिन फिर उसने आख़िर अपने भाई का लंड पकड़ ही लिया।
कुछ देर तक फैजान के लंड को सहलाने के बाद जाहिरा बोली- बस भाई.. अब मुझे छोड़ दो प्लीज़.. फिर कर लेना..
फैजान- फिर कब?
जाहिरा- जब मौका मिले तब.. आप कौन सा अब मुझे बख्शने वाले हो.. जब भी मौका मिलेगा.. कुछ ना कुछ तो करोगे ही ना आप..
फैजान ने मुस्कुरा कर जाहिरा के होंठों को जोर से चूमा और जाहिरा ने भी एक बार जोर से उसके लण्ड को अपनी मुठ्ठी में जोर से दबाया और फिर उससे अलहदा होने लगी।

फैजान ने पीछे को हट कर अपने शॉर्ट्स को नीचे खींचा और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके सामने खुद को नंगा कर दिया।
जाहिरा अपनी मुँह पर हाथ रखते हुए बोली- ऊऊऊ.. ऊऊओफफ.. उफफफ्फ़.. भैया.. आप कितने बेशरम हो.. कुछ तो भाभी का ख्याल करो.. किसी ने देख लिया.. तो क्या सोचेगा कि आप अपनी बहन के साथ ही यह सब कर रहे हो?
फैजान अपने लंड को हिलाते हुए बोला- हाँ.. तो क्या है.. मैं अपनी बहन के साथ ही कर रहा हूँ ना.. किसी और की बहन के साथ तो नहीं ना..
जाहिरा चुप होकर मुस्कुराने लगी।

फैजान- यार एक किस तो कर दो इस पर..
जाहिरा- नहीं भैया.. अभी नहीं करूँगी।
फैजान- प्लीज़्ज़.. मेरी प्यारी सी बहना हो ना.. तो जल्दी से एक बार कर दो..
जाहिरा- भैया आप बहुत ही ज़िद्दी और बेसब्र हो।
यह कहते हुई वो नीचे को झुकी और अपने हाथ में अपने भैया का लंड पकड़ कर उसकी मोटी फूली हुई टोपी पर एक किस किया और फिर जल्दी से बाहर की तरफ भागने लगी।

फैजान ने फ़ौरन ही उसे पकड़ा और बोला- अब एक किस मुझे भी तो दे कर जाओ ना..

जाहिरा ने अपने होंठों को उसके आगे कर दिए.. लेकिन फैजान ने नीचे बैठ कर उसकी टाइट लेगिंग के संगम पर उसकी लेग्गी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अपनी होंठों रखा और एक जोरदार चुम्बन करके बोला- ठीक है.. अब जाओ.. बल्कि ठहरो.. मैं पहले जाता हूँ.. तुम बाद में आना..

उनकी बात सुन कर मैं जल्दी से रसोई में आ गई और फिर फैजान बाहर आ कर बैठ गया और उसने वहीं से मुझे आवाज़ दी- डार्लिंग.. क्या बात है इतनी देर लगा दी है.. कहाँ रह गई हो?
मैं मुस्कुराई और फिर खाने की ट्रे लेकर बाहर आ गई और बाहर आते हुए जाहिरा को भी आवाज़ दी- आ जाओ जल्दी से खाने के लिए..

खाने के दौरान भी मेरा दिल खाने में नहीं लग रहा था.. बल्कि मैं दोनों बहन-भाई को ही देखने की कोशिश कर रही थी कि मेरे सामने बैठ कर भी वो कैसी हरकतें कर रहे हैं।

अचानक फैजान बोला- डार्लिंग.. क्या बात है.. तुम खाना ठीक से नहीं खा रही हो.. तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना?
मैं- तबीयत.. हाँ हाँ.. ठीक ही है.. कुछ नहीं हुआ मुझे.. मैं ठीक हूँ।
फैजान- लेकिन तुम ठीक लग तो नहीं रही हो।

अचानक से मेरे दिमाग में एक ख्याल कौंधा- हाँ.. बस दोपहर से थोड़ी तबीयत ठीक नहीं है.. मेरा जिस्म थोड़ा गरम हो रहा है.. और मुझे तो बुखार सा महसूस हो रहा है।
फैजान- तो कोई दवा लो ना..
मैं- हाँ.. मैं खाना खाकर कोई दवा लेती हूँ।

ऐसी ही बातें करते हुए हमने खाना खत्म किया और जाहिरा ने ही बर्तन समेटने शुरू कर दिए।
कुछ बर्तन लेकर जाहिरा रसोई में गई तो बाक़ी के बर्तन उठा कर फैजान भी उसके पीछे ही चला गया.. हालांकि कभी उसने पहले ऐसे बर्तन नहीं उठाए थे।

अन्दर रसोई में बर्तन छोड़ कर उसने बाहर आने में काफ़ी देर लगाई। मुझे पता था कि अन्दर क्या हो रहा होगा.. लेकिन मैं सोफे पर लेटी रही और उठ कर देखने नहीं गई।

थोड़ी देर के बाद फैजान बुखार की दवा लाया और मुझे पानी के साथ दी। मैंने वो दवा खा ली और बोली- तुम लोग एसी वाले कमरे में सो जाओ आज.. मैं जाहिरा के कमरे में सो जाऊँगी.. एसी में तो ज्यादा सर्दी लगेगी ना..

फैजान के चेहरे पर फैलती हुई ख़ुशी की लहर को मैंने फ़ौरन ही महसूस कर लिया और दिल ही दिल में मुस्कुरा दी।

मैं उठ कर जाहिरा वाले कमरे में गई और वहीं बिस्तर पर लेट गई।

कुछ ही देर में जाहिरा मेरा हाल पूछने आई और बोली- भाभी मैं भी आपके पास ही सो जाती हूँ.. थोड़ा रेस्ट ही तो करना है ना..

मैं- नहीं नहीं.. तुम उधर एसी में सो जाओ जाकर.. ऐसे हम बातें ही करते रहेंगे.. मैं थोड़ी देर के लिए आँख लगाना चाहती हूँ.. तुम जाओ.. मैं ठीक हूँ।

जाहिरा मुस्कुराई और बोली- लगता है कि भाभी सुबह आपकी जिस्म की गर्मी नहीं निकल पाई ना.. इसलिए आपको बुखार हो गया है।
मैं मुस्कुराई और बोली- तुझे बड़ी बातें आने लग गईं हैं ना..
वो हँसने लगी और बोली- भाभी आप कहो तो मैं आपकी कुछ ‘मदद’ करूँ?

मैं मुस्कुराई और बोली- नहीं रहने दे तू.. और करने ही है.. तो जाके अपने भैया की ‘मदद’ कर देना..
जाहिरा थोड़ा घबराई और फिर बोली- नहीं भाभी.. अब मैं जाग रही हूँ ना.. तो उनको कोई ऐसा मौका नहीं दूँगी..

पता नहीं क्यों.. वो सब कुछ मुझसे छुपाना चाहती थी और मैं भी अभी इस गेम को इसी तरह से खेलते रहना चाह रही थी।
खैर.. जाहिरा चली गई.. तो मैं भी उसके बिस्तर पर लेट कर सोने का इन्तजार करने लगी।

क़रीब 5 मिनट की बाद मैं उठी और बाथरूम के रास्ते जाकर अन्दर झाँकने लगी.. तो अन्दर कमरे की रोशनी में मेरे ही बिस्तर पर दोनों बहन-भाई एक-दूसरे से लिपटे हुए पड़े थे।
जाहिरा- प्लीज़ भैया.. भाभी आ जाएंगी..
फैजान- अरे यार.. नहीं आती वो अब दवा लेकर सो गई है।

फैजान ने जाहिरा को सीधा किया और उसकी टी-शर्ट को ऊपर करने लगा। टी-शर्ट को ऊपर तक उसकी गले तक ले जाकर उसे निकालने लगा।
तो जाहिरा बोली- नहीं भैया.. यहीं तक रहने दो.. फिर जल्दी में पहनने में दिक्कत होगी।

फैजान ने ‘ओके’ कहा और फिर झुक कर अपनी बहन की ब्रेजियर के ऊपर से उसकी चूची पर किस करके बोला- बहुत खूबसूरत चूचियाँ हैं तुम्हारे. इतने दिन से देख रहा था और दिल ललचा रहा था।
जाहिरा- सिर्फ़ दिल ही नहीं ललचा रहा था.. बल्कि मुझे रातों में तंग भी कर रहे थे ना आप.. और आपने पहले से ही इनको छू-छू कर भी चैक कर लिया हुआ है।

फैजान चौंक कर जाहिरा के चेहरे की तरफ देखता हुआ बोला- तो क्या तुमको पता था कि मैं ऐसे कर रहा हूँ?
जाहिरा- तो भैया यह कैसे हो सकता है कि कोई किसी लड़की की चूचियों को और नीचे ‘उधर’ भी छुए और उसे पता ही ना चल सके?
फैजान मुस्कुराया और उसकी दोनों चूचियों को जोर से अपनी मुठ्ठी में दबाते हुए बोला- बहुत चालाक हो तुम..

फैजान ने अब झुक कर जाहिरा की खूबसूरत चूचियों के दरम्यान उसकी गोरी क्लीवेज को चूम लिया और फिर आहिस्ता आहिस्ता उसमें अपनी ज़ुबान को फेरने लगा।

जाहिरा की चूचियों की चमड़ी इतनी सफ़ेद और नरम थी कि जैसे ही वो जोर से वहाँ पर किस करता.. तो उसकी चूचियों पर सुर्ख निशान पर जाता।
जाहिरा- भैया थोड़ा धीरे करो ना.. क्यों इतने ज़ालिम बन रहे हो..
फैजान- तुम्हारी चूचियाँ भी तो इतनी ज़ालिम हैं ना.. कि खुद पर कंट्रोल ही नहीं हो रहा।

जाहिरा मुस्कुरा दी और अपने भाई की सिर के बालों में अपना हाथ फेरने लगी।
फैजान ने जाहिरा की ब्रा के कप्स को ऊपर को उठाया और उसकी दोनों चूचियों को नंगा कर लिया।
उसकी अपनी सग़ी बहन की खुबसूरत छोटी-छोटी साइज़ की गोरी-गोरी चूचियाँ और गुलाबी निप्पल उसकी नजरों के सामने खुले हुए थे।

फैजान ने झुक कर आहिस्ता से अपनी बहन की नंगी चूचियों को चूमा और फिर अपने होंठ उसके गुलाबी छोटे से निप्पल पर रख कर एक किस कर लिया।
जाहिरा का जिस्म तड़फ उठा।

फैजान ने अब आहिस्ता-आहिस्ता उसके निप्पलों को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा।

कभी अपनी बहन के एक निप्पल को अपने मुँह में डालता और कभी दूसरे निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगता। फैजान का एक हाथ फिसलता हुआ नीचे को अपनी बहन की कुँवारी चूत की तरफ आने लगा और फिर अपनी बहन की चुस्त लैगी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा।

कुछ देर तक जाहिरा की चूत को सहलाने और उसकी चूचियों को चूसने के बाद फैजान उठ गया और नीचे उसकी टाँगों की तरफ आ गया।

फैजान ने उसकी लेग्गी को पकड़ा और नीचे खींच कर उतारने लगा। जाहिरा ने एक बार उसे रोका.. लेकिन फिर खुद से ही अपनी गाण्ड को ऊपर उठा दिया और फैजान ने अपनी बहन की लेग्गी को उसकी टाँगों से निकाल कर बिस्तर पर रख दिया।

अब जाहिरा का निचला जिस्म लगभग पूरी तरह से उसके भाई की सामने नंगा था। जाहिरा ने फ़ौरन से अपनी चूत को छुपा लिया।
फैजान ने मुस्कुरा कर उसे देखा और फिर उसका हाथ पकड़ कर उसकी चूत से हटा दिया।

जाहिरा की बिल्कुल कुँवारे बालों से पाक चूत.. अपने भाई की आँखों की सामने थी।
फैजान- वाउ.. क्या प्यारी चूत है.. लगता है तुमने आज ही हेयर रिमूविंग की है।

जाहिरा ने शर्मा कर कहा- हाँ सुबह आपके जाने के बाद किए थे।
फैजान- यानि कि तुमने मेरे लिए अपनी चूत के बाल साफ़ किए हैं ना?

जाहिरा शर्मा कर बोली- अब ज्यादा भी खुशफ़हमी में ना रहें आप.. मैंने तो वैसे ही बस रुटीन में साफ़ कर लिए थे। अब मुझे क्या पता था कि आप आकर इसे देखोगे?

फैजान हंसा और अपनी होंठ जाहिरा की चूत पर रख दिए और उसकी कुँवारी मुलायम चूत को चूम लिया।
फिर फैजान ने अपनी कुँवारी बहन की कुँवारी चूत की लबों को खोला और अपनी ज़ुबान से उसे अन्दर से चाटने लगा।
धीरे-धीरे जैसे-जैसे उसकी ज़ुबान अपनी बहन की चूत को चाट रही थी.. तो उसके साथ-साथ ही जाहिरा की हालत खराब होती जा रही थी।

आप सब इस कहानी के बारे में अपने ख्यालात इस कहानी के सम्पादक की ईमेल तक भेज सकते हैं।
अभी वाकिया बदस्तूर है।
[email protected]

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