एक भाई की वासना -21

(Ek Bhai Ki Vasna-21)

This story is part of a series:

सम्पादक – जूजा जी

हजरात आपने अभी तक पढ़ा..
हम सब नाश्ते की टेबल पर आए.. तो फैजान की नजरें आज तो जाहिरा की जिस्म पर कुछ ज्यादा ही गहरी थीं और उसके नशीले जिस्म की नुमाइश से हट ही नहीं रही थीं।
मैं इस सबको देख कर मजे ले रही थी, लेकिन अभी भी वो दोनों यही समझ रहे थे कि मुझे दोनों को इनकी हरकतों का इल्म नहीं है।
अब आगे लुत्फ़ लें..

नाश्ते के बाद वो दोनों बहन-भाई चले गए और मैं रसोई का सामान समेटने के बाद नहाने के लिए चली गई। फुव्वारे से ठंडी-ठंडी पानी की गिरती बूंदों के नीचे नहाते हुए मैं यही सोच रही थी कि अब आगे क्या किया जाए.. जिससे फैजान को अपनी बहन के क़रीब आने का और भी मौका मिले और अपनी बहन का जिस्म को देखने और भोगने का भरपूर मौका मिल सके।

हालांकि मैं दोनों को बिस्तर पर तो एक-दूसरे के क़रीब ला ही चुकी थी। अब मैं उनके दरम्यान की शरम और परदे की दीवार को भी गिरा देना चाहती थी।

दोपहर को दोनों एक साथ ही वापिस आ गए। खाने की टेबल पर ही मैंने फैजान को कह दिया कि आज हम दोनों को शाम को शॉपिंग के लिए लेकर चलो.. मुझे कुछ रेडीमेड कपड़े ख़रीदने हैं।

फैजान मान गया कि शाम को खरीददारी के लिए निकलते हैं।

तक़रीबन अँधेरा ही हो चुका था जब हम लोग शॉपिंग की लिए निकले। चूंकि अगले दिन रविवार था.. इसलिए कोई फिकर नहीं थी कि रात को देर हो जाएगी या सुबह कॉलेज और ऑफिस जल्दी जाना है।

मैंने और जाहिरा ने जीन्स ही पहनी थीं और ऊपर से लोंग शर्ट्स पहन ली थीं। जो कि ज्यादा वल्गर या सेक्सी नहीं लग रही थीं। लेकिन मेरी शर्ट का गला हमेशा की तरह ही डीप था.. जिसकी वजह से मेरा क्लीवेज आसानी से नज़र आ रहा था।

जाहिरा भी आज खूब बन-संवर कर तैयार हुई थी। उसने बहुत ही अच्छा सा परफ्यूम भी लगाया हुआ था और हल्का सा मेकअप भी कर रखा था।

उसके पतले-पतले प्यारे-प्यारे होंठों पर पिंकिश लिप ग्लो लगी हुई थी.. जिसकी वजह से उसके लिप्स बहुत ही सेक्सी लग रहे थे। दिल करता था कि उनको चूम ही लें।

मैंने आज भी जाहिरा को हम दोनों के दरम्यान में बिल्कुल फैजान के पीछे बैठाया और खुद उसको फैजान की कमर के साथ दबाते हुए उसके पीछे बैठ गई।

जाहिरा की दोनों खुबसूरत चूचियाँ अपने भाई की कमर के साथ दब रही थीं और आज मुझे पक्का यक़ीन था कि फैजान भी खुद उनको अपनी पीठ से महसूस करना चाह रहा होगा।

यही वजह थी कि वो थोड़ा-थोड़ा अपनी कमर को आगे-पीछे भी कर रहा था।

मैंने अचानक ही हाथ एक साइड से आगे ले जाकर फैजान की जांघ पर रखा और फिर जैसे ही उसकी पैन्ट के ऊपर से उसके लण्ड को छुआ.. तो पता चला कि वो तो पहले से ही खड़ा हो चुका है।

फैजान के लंड के ऊपर हाथ फेरते हुए मैं थोड़ा सा ऊँची आवाज़ में जाहिरा से बोली- जाहिरा डार्लिंग.. आज तो तुम बहुत प्यारी लग रही हो और तुम्हारे लिप्स तो बहुत ही सेक्सी लग रही हैं। मेरा तो दिल करता है कि इनको चूम ही लूँ।

मैंने अपनी आवाज़ इतनी तेज रखी थी कि फैजान भी सुन सके और उसके सुनने का अहसास मुझे उसके लण्ड से हुआ.. जिसने मेरे हाथ में एक साथ दो-तीन झटके लिए।

मैं मुस्करा दी और आहिस्ता से अपने होंठ जाहिरा की गर्दन से थोड़ा नीचे पीठ के ऊपरी हिस्से को चूम लिया।
जाहिरा कसमसाई- भाभी.. क्या करती हो यार..
मैं उसकी गर्दन के नीचे अपने होंठ आहिस्ता-आहिस्ता चलाते हुए बोली- डार्लिंग तू प्यारी ही इतनी लग रही है आज.. तो मैं क्या करूँ..
वो चुप रही।

मैंने फिर पूछा- तू बता.. तूने क्या क्या लेना है?
वो बोली- कुछ नहीं भाभी..
मैंने आहिस्ता से उसकी चूची को एक साइड से छुआ और बोली- नई ब्रेजियर ही ले लो.. आज तो तेरे भैया भी साथ ही हैं।
जाहिरा ने पीछे को हौले से अपनी कोहनी मेरी पेट में मारी और बोली- भाभी कुछ तो शरम करो.. भैया भी साथ हैं।

मैं जोर-जोर से हँसने लगी और फिर उसके कान में बोली- उस दिन से भी तो अपने भैया की ही लाई हुई ब्रा पहन रही है ना.. तो उनके साथ आकर लेने में क्या शरम है तुझे?

जाहिरा चुप रही लेकिन मैंने देखा कि वो मुस्करा रही थी। मुझे यक़ीन था कि मेरी यह नोक-झोंक फैजान ने भी सुन ली होगी और यही मैं चाहती थी कि वो भी मेरी यह बातें सुन कर एन्जॉय करे।

फैजान ने एक बड़े शॉपिंग माल के बाहर बाइक रोकी और हम नीचे उतर आए।

फैजान बाइक पार्क करने गया तो जाहिरा बोली- भाभी.. यार कुछ तो शरम किया करो न.. भैया अगर सुन लें तो.. क्या सोचेंगे?
मैंने दिल ही दिल में सोचा कि उस वक़्त तो तुझे शरम नहीं आती.. जब तेरे भैया तेरी चूचियों और जिस्म पर हाथ फेर रहे होते हैं। उस वक़्त तो बड़े मजे ले रही होती हो।
लेकिन मैं चुप रही और बोली- अरे कुछ नहीं होता.. उसे हमारी बातों का क्या पता..

इतने मैं फैजान भी आ गया और हम तीनों मॉल में दाखिल हो गए।

ये काफ़ी मॉड किस्म का माल था.. जहाँ पर मुख्तलिफ किस्म की दुकानें थीं और आजकल कुछ दुकानों पर सेल भी चल रही थी.. इसलिए मैं यहाँ आई थी वरना फैजान की इनकम में ज्यादा महँगी शॉपिंग अफोर्ड नहीं हो सकती थी ना..

हम लोग एक दुकान में गए.. तो वहाँ पर मुख्तलिफ किस्म की ड्रेसेज को मॉडल्स के ऊपर पहनाया गया था.. कुछ मॉडल्स के ऊपर ब्रा और पैन्टी पहना कर रखी हुई थीं।
कुछ बुतों पर मुकम्मल ड्रेस भी थी.. तो कुछ में काफ़ी सेक्सी किस्म की जालीदार लिबास सजाए गए थे।

इस दुकान पर आकर जाहिरा का चेहरा तो शरम से सुर्ख ही हो गया था। वो इधर-उधर देखते हुए बहुत शर्मा और घबरा रही थी।

अपने भाई की मौजूदगी की वजह से उसे ज्यादा शर्म महसूस हो रही थी।

वहाँ पर कपड़े देखते हुए मुझ एक मॉडल पर पहनी हुई एक बहुत ही कामुक किस्म की ड्रेस नज़र आई, इसके कन्धों पर सिर्फ़ पतली सी डोरियाँ थीं और छाती का ऊपरी हिस्सा बिल्कुल नंगा था।
आप यूँ समझ लें कि इसमें से चूचियों का भी ऊपरी हिस्सा नंगा हो रहा था..
लेकिन बाक़ी चूचे नीचे तक का हिस्सा सिल्की टाइप के बिल्कुल झीने से कपड़े से कवर था और उस ड्रेस की लम्बाई भी सिर्फ़ कमर तक ही थी जिससे सिर्फ पेट कवर हो सके, नीचे उस मॉडल पर उस ड्रेस के साथ सिर्फ़ एक छोटी सी पैन्टी बंधी हुई थी।

दरअसल यह एक जालीदार ड्रेस शौहर और बीवी के लिए तन्हाई में पहनने के लिए था।

मुझे वो ड्रेस पसंद आ गया.. मैंने फैजान से कहा- मुझे यह ड्रेस पसंद आया है।
पास ही जाहिरा भी खड़ी थी.. वो थोड़ा और घबरा गई।

आप सब इस कहानी के बारे में अपने ख्यालात इस कहानी के सम्पादक की ईमेल तक भेज सकते हैं।
अभी वाकिया बदस्तूर है।
[email protected]

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