डिस्को में दीदी की चुत गांड चुदाई

(Disco Me Didi Ki Chut Gand Chudai )

दोस्तो, मेरा नाम कमल है, मैं पंजाब का रहने वाला हूं. मेरी आयु 23 साल है और कद 6 फिट है. मेरा रंग गोरा और शरीर सुडौल है. मैं दिखने में सुंदर और स्मार्ट हूं. मेरा लंड 7 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा है, जो बहुत सारी लड़कियों और औरतों की प्यास बुझा चुका है.

मेरे मामाजी जी की बेटी का नाम मनजीत है. उसकी आयु 26 साल और रंग दूध की तरह सफेद है. मैं उनको दीदी बुलाता हूं. दीदी अपने माता पिता की इकलौती संतान हैं. दीदी का कद 5 फिट 7 इंच और फिगर का नाप 34डी-26-36 है. दीदी की आंखें और बाल गहरे काले और होंठ फूल की पंखुड़ियों की तरह पतले और लाल हैं. दीदी के चूचे और गांड उभरे हुए और सुडौल हैं लेकिन पेट बिल्कुल सपाट है. दीदी का बदन भरा हुआ और कसा हुआ है. दिखने में दीदी बहुत ही शरीफ लगती हैं, लेकिन अन्दर से एकदम सेक्स की भूखी रंडी हैं.

ये बात पांच साल पहले की है. मेरी आयु 18 साल की थी और मैं +2 की परीक्षा के बाद मामाजी के घर गया था. दीदी की आयु 21 साल थी और वो भी बीए की परीक्षा के बाद फ्री थीं. हम सारा दिन गप्पें मारते और टीवी देखते.

एक दिन सुबह हम टीवी देखने लगे. टीवी में एक गाना चल रहा था और उसमें लोग डिस्को में डांस कर रहे थे.
दीदी ने मुझसे कहा- कमल मेरे भाई.. मेरा डिस्को में जाने का बहुत दिल करता है.
मैंने कहा- इसमें कौन सी बड़ी बात है दीदी.. आप घूम आओ.

दीदी ने कहा- अरे डिस्को शहर में है और यहां से 40 किमी दूर है, मैं जाऊँगी किस के साथ?
मैंने कहा- दीदी आप तैयार हो जाओ, मैं ले चलता हूं और शाम तक लौट आएंगे. मैं मामाजी जी को बोल देता हूं कि हम डिस्को जा रहे हैं.
दीदी हंसने लगी और कहा- कमल तुम बिल्कुल पागल हो.
मैंने पूछा- क्यों दीदी, मैंने ऐसा क्या कर दिया?

दीदी ने कहा- पहली बात डिस्को रात को 9 बजे के बाद खुलता है. दूसरी बात वहां सिर्फ प्रेमी-प्रेमिका और पति-पत्नी को जाने की अनुमति होती है, भाई-बहन को नहीं. तीसरी बात अगर पापा को पता चला कि हमने डिस्को जाने का सोचा भी है तो मार मार कर चमड़ी उधेड़ देंगे.
मैंने कहा- फिर आप डिस्को कैसे देखोगी?
दीदी ने कहा- अगर तुम मेरा साथ दो तो काम बन सकता है.
मैंने पूछा- कैसे?

तो दीदी बोलीं- शहर में हमें कोई नहीं जानता. हम दोनों प्रेमी-प्रेमिका बन कर जाएंगे और वहां मुझे दीदी नहीं जानूं बुलाना और मैं तुझे जानेमन कहूंगी.
मैंने कहा- लेकिन रात को निकलेंगे कैसे?
दीदी ने कहा- तुम चलने की तैयारी करो और जाने की बात मुझ छोड़ दो.
मैंने आँख मार कर कहा- ठीक है जानूं.. मामाजी को मना लेना.
दीदी बोलीं- बहुत शरारती हो गए हो जानेमन..

यह कह कर उन्होंने मेरे गाल का चुम्मा ले लिया.

इसके बाद दीदी बाहर आईं, वहां मामाजी और मामीजी खाना खा रहे थे. दीदी उनके पास गईं और कहा कि उसकी एक सहेली का जन्म दिन है. आज रात शहर में उसके घर पार्टी है. सभी सहेलियां वहां आएंगी और उसे भी जाना है. रात को आने में देरी हो जाएगी तो मुझे साथ लेकर जाएगी.

मामीजी ने मुझे बुलाया और रात को दीदी के साथ जाने को कहा. मैंने हामी भर दी और दीदी ने गिफ्ट देने के लिए मामाजी से 5000 रुपए भी ऐंठ लिए.

इसके बाद हम दोनों रूम में आ गए. रूम में मैंने दीदी से कहा- मैं तो तुम्हें बहुत शरीफ समझता था जानू.. पर तुम तो बहुत चालू हो.
दीदी ने कहा- अभी तुम ने देखा क्या है जानेमन.. अभी रात को देखना मैं कितनी चालू माल हूं.
मैंने कहा- क्या मतलब?
दीदी ने कहा- पहले वादा करो किसी को नहीं बोलोगे.
मैंने वादा कर लिया और दीदी अपना मोबाइल ले आईं.

दीदी ने मुझे तस्वीरें दिखाईं, जिसमें दीदी कहीं कैपरी, कहीं जींस और कहीं स्कर्ट में थीं और सब अलग अलग जगह की तस्वीरें थीं. दीदी ने दो लड़कों के साथ भी दो वीडियो दिखाईं, जिसमें दीदी और वो लड़के नंगे थे. एक वीडियो में दीदी एक लड़के का लंड चूस रही थीं और दूसरे में वो एक और लड़के की गोद में बैठी मस्ती कर रही थीं.

मैं अपनी चुदक्कड़ दीदी को नंगा देखा कर गर्म होने लगा और बोला- जानूं, मुझे भी अपने होंठों का रस पिला दो.

दीदी ने अपने होंठों को मेरे होंठों से लगा दिया और हम एक दूसरे को चूमने लगे. मैं दीदी के बड़े-बड़े चूचे दबाने लगा और दीदी कपड़ों के ऊपर से मेरा लंड मसलने लगीं.

तभी किसी के अन्दर आने की आहट हुई गए और हम ठीक से बैठ गए.
मामीजी अन्दर आ गईं.
दीदी ने मुझसे धीरे से कहा- इस गर्मी को रात के लिए संभाल कर रखना.

मैं बाथरूम में गया और मुठ मार कर लंड को शांत किया. दीदी ने मुझे कंडोम ला कर रखने को कहा, क्योंकि रात में दुकानें बंद हो सकती थीं. मैं दुकान पर गया और एक बड़ा वाला पैकेट कंडोम का ले लिया और साथ में सेक्स उत्तेजना वाली दो गोलियां भी ले लीं.

रात को हम तैयार हो गए और मैंने गाड़ी निकाल ली. मैंने सफेद रंग की शर्ट और नीली जींस पहनी थी. दीदी ने गुलाबी रंग का पंजाबी सूट, पैरों में पंजाबी जूती और आंखों पर नज़र का चश्मा लगा था. इन कपड़ों में दीदी निहायत ही शरीफ और सीधी-सादी लड़की लग रही थी. लेकिन मैं जान चुका था कि इस शरीफ लिबास के पीछे एक बहुत बेशर्म और वासना की भूखी रंडी छिपी हुई है.

दीदी गाड़ी में बैठ गईं और उनके हाथ में बैग था, जो पिछली सीट पर रख दिया. मैंने दीदी से कहा- दीदी, इन कपड़ों में बहुत शरीफजा़दी लग रही हो.
दीदी ने कहा- ये सब लोगों को और घर वालों को दिखाने के लिए है.

हम रास्ते में मस्ती करते गए और गाड़ी धीमे चलाई. शहर की सीमा आने पर एक जगह दीदी ने मेरे हाथ पर गाड़ी रोकने का इशारा किया तो मैंने गाड़ी पार्क की.

दीदी ने कहा- तुम कोल्ड ड्रिंक लेकर आओ, मैं दस मिनट में बाथरूम हो कर आती हूं.

मैंने सेक्स उत्तेजना की गोलियां पीस कर कोल्ड ड्रिंक्स में मिला दीं और गाड़ी के पास दीदी के आने का इंतजार करने लगा.

कुछ देर बाद दीदी आई तो मैं देखते ही रह गया. दीदी ने नए छोटी सी लाल स्कर्ट और छोटा सा सफेद टॉप पहना था. स्कर्ट और टॉप दीदी के सिर्फ चूतड़ और चूचों का कुछ हिस्सा ढक रहे थे और बाकी का बदन नंगा था. दीदी के चूचों की आधी गोलाइयां टॉप के गले बाहर निकली हुईं थीं. अब दीदी बहुत बेशर्म, गर्म और चालू लड़की लग रही थीं.

दीदी बहुत सेक्सी तरीके से गांड हिलाते हुए मेरे पास आईं और पूछा- कैसी लग रही हूं?
तो मैंने कहा- बहुत सेक्सी माल लग रही हो.
दीदी ने मुस्कान दी और मेरी तरफ पीठ करके पूछा- अब?

दीदी की पीठ बिल्कुल नंगी थी, टॉप एक बारीक धागे से बंधा हुआ था. मैंने दीदी की पीठ को सहला कर और चूम कर कहा- आह एकदम चुदक्कड़ रंडी लग रही हो जानूं.

प्यार से दीदी ने मेरे चूतड़ों पर चपत लगा कर कहा- जानेमन तुम भी सेक्स की भाषा बोलने लगे.

हम कोल्ड ड्रिंक्स पी कर डिस्को के लिए चल दिए. करीब दस मिनट में लगभग 10:00 बजे डिस्को के अन्दर आ गए. वहां म्यूजिक चल रहा था और लड़के लड़कियां चिपक कर डांस कर रहे थे. कुछ लड़के लड़कियां कोनों में खड़े चूमने और एक दूसरे के जिस्म से खेलने में मगन थे. मैं और दीदी भी चिपक कर डांस करने लगे. मैं दीदी की मुलायम पीठ को सहलाते हुए डांस कर रहा था. दीदी मुझसे कस कर लिपटी हुई थीं.

दीदी के बड़े-बड़े चूचे मेरी छाती में दबे हुए थे. बीच बीच में कभी दीदी और कभी मैं एक दूसरे को चूम लेते और मैं दीदी की मोटी गांड को सहलाने लगा. मैंने चारों ओर देखा सभी लड़कियों ने सेक्सी कपड़ों में थीं लेकिन किसी के भी चूचे और गांड दीदी जितने बड़े नहीं थे. उन सब लड़कियों में दीदी सब से सेक्सी दिख रही थीं और सब लड़कों की नज़र दीदी के कामुक बदन को निहार रही थीं.

मैंने दीदी से कहा- जानू, सभी लड़के अपनी गर्लफ्रेंड को छोड़ कर तुम्हारे बदन का मज़ा ले रहे हैं. अगर तुम मामूली सा इशारा भी कर दो तो अपनी गर्लफ्रेंड को छोड़ तुम्हारे पास आ जाएंगे.

दीदी ने कहा- लड़कियों को देखो, वो तुझे लाईन मार रही हैं. यहां कोई प्यार व्यार नहीं होता, सब एक दूसरे के जिस्म का मज़ा लूटने आते हैं. हर लड़के का 5-6 लड़कियों और हर लड़की का 5-6 लड़कों से चक्कर होता है. आज एक के साथ कल दूसरे के साथ.

मैंने दीदी से पूछा- तुम्हारा कितनों के साथ चक्कर है जानूं.
दीदी बेशर्मी से बोलीं- अभी तक 8 से सेक्स किया है और तुम नौंवे हो जिसके साथ चुदाई करूंगी.
मुझ पर सेक्स चढ़ चुका था और मैंने भी दीदी का दूध मसल कर कहा- हां जानूं आज तुम्हें चोद कर बहनचोद बन जाऊंगा.
दीदी ने मेरी आंखों में वासना से देखा और कहा- असली बहनचोद तब बनोगे जब रानी को चोदोगे.

रानी मेरी सगी बहन है. रानी दीदी और मनजीत दीदी एक ही आयु की हैं.

मैंने कहा- वो तो बहुत शरीफ है. उसने कभी ऐसे काम के बारे सोचा भी नहीं होगा.
दीदी हंसते हुए बोलीं- शरीफ और रानी हा.. हा…हा.. तुम बिल्कुल बुद्दू हो, रानी मुझसे भी बड़ी रंडी है. वो कम से कम 15-16 लंड अपनी चूत और गांड में ले चुकी है और हर रोज़ चुदाई करती है. उसकी नज़र अब तुम्हारे लंड पर है. जब तुम सो जाते हो तो वो तुम्हारा लंड चूसती है. उसी ने मुझे तुम्हारे लंबे मोटे लंड के बारे बताया है.

मैं खुश हो गया क्योंकि मैं बहुत देर से दीदी को ख्यालों में लाकर मुठ मारता था. लेकिन मुझे यकीन नहीं हो रहा था क्योंकि रानी दीदी मुझे बहुत शरीफ लगती थीं.

दीदी मुझे कोने में ले गई और मोबाईल में रानी दीदी की तस्वीरें दिखाने लगीं. तस्वीरों में रानी दीदी अलग अलग लड़कों के साथ लिपटी हुई थीं. दीदी ने मुझे रानी दीदी की खींची हुई चार सेल्फी दिखाईं, जिसमें वो मेरा सोये हुए का लंड चूस रही थीं.

तभी दीदी ने रानी दीदी को फोन किया और उससे कहा- कमल को बता दे तू इससे क्या चाहती है.
मुझे शर्म आ रही थी लेकिन दीदी ने मेरे कान पर मोबाईल लगा दिया.

रानी दीदी ने कहा- मैं तुमसे सेक्स करना चाहती हूं छोटे.
रानी दीदी मुझे छोटे कह कर बुलाती है. मैंने कहा- ये बात आप मुझे पहले बता देतीं, मैं कबसे आपको चोदना चाहता था.
रानी दीदी ने कहा- अब पहले मनजीत की प्यास बुझा दे, उसके बाद हम घर में कभी भी कर सकते हैं.

मैंने शिकायत करते हुए कहा- अगर पहले बोल देतीं, तो अब तक कितनी बार मज़ा कर लेते और मुझे बार बार बाथरूम में मुठ नहीं मारनी पड़ती.
दीदी ने कहा- मुझे मालूम है तू मुझे चोदना चाहता है और मैंने बहुत बार तुझे मेरी तस्वीरों को हाथ में लेकर मुठ मारते देखा है. मुझे भी तेरा लंड बहुत पसंद है और मैं भी जान बूझकर तुम्हारे सामने झुककर अपने चूचे दिखाती हूं. तुम्हारे सामने गांड हिलाकर चलती हूं और तुम से सटकर बैठती हूं. ये सब तुझे गर्म करने के लिए करती हूं ताकि तेरा लंड खड़ा हो जाए क्योंकि मुझे तुझे गर्म करने में बहुत मज़ा आता है. एक बात और आज से आप और दीदी कहना बंद कर दे.. तुम और रानी कहना चालू कर. दीदी लोगों के सामने और अकेले में मैं तुम्हारी रखैल हूं.

मैंने कहा- मनजीत दीदी सच कहती थीं, तुम उससे भी बड़ी रंडी हो और तुम बहुत खराब हो रानी.. मैं तुझे चोदने के लिए मरता रहा और तुम मुझे तड़पते हुए देखती रहीं.

रानी दीदी ने सच बता दिया कि वो मुझ से पहले चुदना चाहती थीं, पर मनजीत दीदी ने जिद की वो मेरा कुंवारा लंड लेगी. क्योंकि पहले उनको जो कुंवारा लड़का मिला था, उसके साथ रानी दीदी ने पहले चुदाई की थी. अब मनजीत दीदी कुंवारे लंड का मज़ा लेना चाहती थीं.

मनजीत दीदी ने फोन काट दिया और कहा- चल बहनचोद फोन पर ही लगा रहेगा, मैं लंड लेने के लिए पागल हुई जा रही हूं और तू फोन पर गांड मरवा रहा है.

मैंने कहा- सबर कर मेरी रंडी बहन आज तुझे चोद चोद कर निहाल कर दूंगा. तुझे रंडी बना कर ऐसे चोदूंगा कि आज तक जितने लंड लिए हैं, सबको भूल जाएगी.

दीदी ने मुझे 2000 रुपए दिए और काऊंटर पर देने को कहा. मैंने पैसे काऊंटर पर जमा करवा दिए.

वहां बैठी एक 30 साल की बहुत ही सेक्सी औरत ने मुझे चाभी दी और कहा- दूसरी मंजिल, रूम नंबर 104 में मजे करो.
‘ओके.’
ये कह कर उसने प्यारी सी स्माइल देकर कहा- तुझे पहले कभी देखा नहीं.
मैंने कहा- मैं यहां पहली बार आया हूं.. आप क्या वो यहां पर नौकरी करती हो?
उसने बताया कि वो डिस्को की मालकिन है और फिर पूछा कि मैं पहले कहां जाता था. मैंने बताया कि ये मेरा पहली बार है.
उसने स्माईल देते हुए कहा- तो आज तुम्हारी नथ उतरने वाली है और लड़के से मर्द बन जाओगे.
मैं हंस दिया.

उसने मुझसे पूछा- क्या मुझे किसी सेक्स उत्तेजना वाली कोई गोली, स्प्रे या कंडोम की जरूरत तो नहीं?
मैंने मना कर दिया, उसने मुझे अपना कार्ड दिया और कहा- फ्री टाईम में बात करना.

मैं वहां से चलने लगा तो उसने मुझे वेस्ट ऑफ़ लक बोला और मैंने भी थैंक्यू कहा और दीदी के साथ रूम में आ गया. मैंने दरवाजा लॉक कर दिया और हम आमने-सामने कुर्सी पर बैठ गए.

मैंने दीदी से कहा- जानू, मुझे तो सेक्स के बारे कुछ पता नहीं है.
दीदी ने कहा- मैं हूं न तुझे सिखाने के लिए.. तुझे सब सिखाने ही तो यहां लाई हूं, अगर तुम्हें पहले आता होता तो यहां क्यों आते, घर में कभी भी चुपके से कर लेते.
मैंने कहा- दीदी.. सॉरी.. जानूं तुम डिस्को में आई सब लड़कियों से कहीं ज्यादा सेक्सी हो.
दीदी ने कहा- यहां कोई नहीं है तुम मुझे कुछ भी बुला सकते हो.. चाहे दीदी चाहे चाहे जानूं या कुछ और जो तुम्हें अच्छा लगे.
मैंने कहा- दीदी ही कहूंगा क्योंकि मुठ मारते हुए भी दीदी बोलता हूं.

मैंने दीदी को दीवार से लगा लिया और होंठों को चूमने लगा. दीदी भी साथ दे रही थीं और हम प्यार से चुम्बन करने लगे. कुछ देर बाद हम पागल होने लगे और एक दूसरे के होंठों को मुँह में खींच कर चूसने लगे. हम एक दूसरे के मुँह में जीभ डालकर घुमाते और होंठों को दांतों से काट लेते.

दीदी मुझे पकड़ कर सोफे पर ले गईं और हम वहां चूमा चाटी करने लगे. मैं टॉप के ऊपर से दीदी के चूचे दबाने लगा और दीदी जींस के ऊपर से मेरा लंड मसलने लगीं. इसके साथ-साथ हम एक दूसरे को चूम भी रहे थे. दीदी ने मेरी शर्ट निकाल दी और मेरी छाती को जीभ से चाटने और दांतों से काटने लगीं.

दीदी मेरे पेट को चूसने लगीं और मैं मस्ती के आलम में छटपटाने लगा.

दीदी ने मेरी जींस खोल दी और मेरा लंड देखकर उछल पड़ीं. दीदी ने कहा- रानी सच बोल रही थी, तेरे जितना लंबा और मोटा लंड मुझे आज तक नहीं मिला.

मैंने कहा- देर से ही सही लेकिन आज मेरा लंड मेरी रंडी बहन की चूत का भोसडा़ बना देखा.
दीदी बोली- मालिक तेरे जैसा बहनचोद भाई सबको दे. मुझे रानी से जलन हो रही है, काश तू मेरा सगा भाई होता और मैं रोज़ तेरे लंड से चुदाई करवाती.

दीदी ने मेरे लंड पर चुम्मा लिया और टॉप निकाल कर पीठ के बल टेबल पर लेट गईं. दीदी का सिर नीचे लटका हुआ था, मैंने खड़ा होकर अपना लंड दीदी के होंठों पर रख दिया. दीदी ने मुँह खोल कर लंड मुँह में ले लिया और गर्दन हिलाकर चूसने लगीं.

मैंने झुककर दीदी के चूचे पकड़ लिए. दीदी के चूचे मेरी सोच से काफी बड़े थे. मैं दीदी के खरबूजों के आकार के चूचों को हाथों में लेने की कोशिश कर रहा था लेकिन वो मेरे हाथों में समा नहीं रहे थे.

मैंने कहा- दीदी आपके चूचे तो बहुत बड़े और सेक्सी हैं. ऐसे सेक्सी चूचे तो किसी हीरोइन के भी नहीं होंगे.

दीदी मेरी बातें सुनकर और जोश में आ गईं और वो मेरा लंड जोर-जोर से चूसने लगीं. मुझसे रहा नहीं गया, मैं दीदी को चेहरे से पकड़ कर मुँह में धक्के देना लगा. मैं पूरा लंड दीदी के मुँह में धकेल देता और बाहर निकाल देता. मेरा लंड दीदी के मुँह से होता हुआ उसके गले में उतर जाता. मैं कुछ देर लंड दीदी के गले में अटका कर रखता, फिर बाहर खींच लेता और दोबारा गले में घुसेड़ देता.

दीदी बहुत आराम से मज़ा लेते हुए मुँह चुदवा रही थीं और मेरे चूतड़ दबा रही थीं. दीदी ने अपनी पैंटी उतार दी और टेबल पर टांगें रखकर सोफे पर बैठ गईं. मैं दीदी की टांगें खोलकर बीच में बैठ गया. मैंने दीदी की टांग और जांघ को जीभ से चाटते हुए अपना मुँह दीदी की चूत पर रख दिया. मैं एक हाथ से दीदी की जांघ सहलाता रहा और दूसरे हाथ से दीदी का बोबा मसलता रहा, साथ-साथ दीदी की चूत में जीभ डालकर चूत चाटने लगा.

दीदी एक हाथ से मेरा सिर अपनी चूत पर दबाया और दूसरे हाथ से मेरी पीठ सहलाते हुए गांड उचका उचका कर चूत मेरे मुँह पर रगड़ने लगीं.

मैंने जीभ को दीदी की चूत के अन्दर घुसेड़ कर घुमाया, तो दीदी ने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए. दीदी ने मेरा चेहरा पकड़ कर मेरा मुँह अपने एक चूचे पर रख दिया और मैं दीदी का बोबा चूसने लगा. मैंने जैसे ही चूचे के निप्पल पर जीभ घुमाई, दीदी का निप्पल कठोर हो गया. दीदी मुझे चुदाई करने को कहने लगीं.

मैंने झट से कंडोम पैकेट निकाला.
दीदी ने तभी झपट्टा मारा और सारे कंडोम छिना कर अपने पास रख लिए, वे बोलीं- जब ये लगाने की जरूरत होगी, तब मैं खुद लगा दूंगी.

दीदी टेबल पर हाथ रखकर झुक कर खड़ गईं और मैं दीदी के पीछे खड़ा हो गया.

दीदी ने मेरा लंड पकड़ कर अपनी गीली चूत के छेद पर लगाया और मुझे जोर से धक्का मारने को कहा. मैंने जोर से धक्का मारा, तो चूत के गीलेपन की वजह से मेरा लंड एक बार में ही चूत की दीवारों को चीरता हुआ जड़ तक बैठ गया.

दीदी के मुँह से चीख निकल पड़ी. एक पल रुकने के बाद दीदी मुझे धक्के मारने को कहने लगीं.

मैं जोर-जोर से दीदी की चूत में लंड पेलने लगा. कुछ देर बाद दीदी मुझे लंड निकालने को कहा और गांड पर थूक लगाने को कह दिया. मुझे भी गांड में लंड पेलने का मन हो रहा था. मैंने वैसे ही किया. दीदी मेरे लंड पर कंडोम लगा कर गांड चोदने का कह दिया.

वो पहले की तरह कुतिया बन कर खड़ी हो गईं. मैंने दीदी की गांड के छेद पर लंड लगाया, तभी दीदी ने अपनी गांड पीछे धकेल कर धीरे-धीरे सारा लंड गांड के अन्दर समा लिया. मैं दीदी की गांड चोदने लगा और दीदी भी अपनी मोटी गांड को गोल गोल घुमा कर लंड का मज़ा लेने लगीं.

इस सबमें दीदी के चूचे हवा मेरा झूल रहे थे. मैंने दीदी की कमर पकड़कर दनादन गांड में लंड ठोकना चालू कर दिया.

पूरा रूम फचचच. फचचच…. और हमारी कामुक आवाजों से गूंज रहा था.

कुछ देर बाद दीदी ने मुझे सोफे पर बिठा दिया और कंडोम निकाल दिया. अब वो घुटने मोड़ कर सोफे पर बैठीं और चूत को मेरे लंड पर टिका कर अपनी गांड को जोर से नीचे धकेल दिया. लंड दीदी की बुर का मजा लेने लगा. दीदी मेरे कंधों पर हाथ और होंठों पर होंठ रखकर लंड पर उछलने लगीं. मैं दीदी को डांस करते चूचों को हाथों में पकड़कर मसलने लगा. दीदी भी मस्ती में और भी तेज़ी से उछलने लगीं. मैं भी नीचे से गांड उठा उठा कर लंड पेलने लगा. हमारे मुँह से कामुक आवाज़ें निकल रही थीं. दीदी ने चूत से लंड निकाल कर फिर से कंडोम लगा दिया. फिर उसी मुद्रा में लंड को गांड में ले लिया.

इस बार दीदी ने एक ही बार में लंड अन्दर ले लिया था. अब दीदी उछल-कूद करके गांड में लंड ले रही थीं और मैं जोर-जोर से दीदी के चूचों को चूस कर लाल कर रहा था.

दीदी टांगें खोलकर टेबल पर बैठ गईं और मैं कंडोम उतार कर दीदी की चूत में लंड पेलने लगा. दीदी ने मुझे कस के पकड़ लिया. दीदी के चूचे मेरी छाती पर दबे हुए थे और हम एक दूसरे की पीठ खरोंच रहे थे. मैं दनादन दीदी की चूत पेल रहा था.

तभी अचानक दीदी का बदन अकड़ गया और वो झड़ गईं. मैं भी झड़ने वाला हो गया था. मैंने उनको बताया तो दीदी ने मेरा लंड मुँह में ले लिया.

मैं दीदी का मुँह चोदने लगा. दीदी की जीभ का कोमल स्पर्श पा कर मेरे लंड ने माल उगल दिया. मेरा वीर्य दीदी के गालों से होता हुआ उनके चूचों पर गिर रहा था. कुछ देर चुदाई का मजा लिया और हम दोनों ने खुद को साफ करके कपड़े पहन कर कमरे से निकल आए.

अब हम दोनों गाड़ी में आ गए.

घर लौटते समय हम एक कच्चे रास्ते पर गाड़ी लगा कर चुदाई का मजा लिया. इस चुदाई के बाद दीदी ने फिर से पंजाबी सूट पहन लिया और शरीफ लड़की बन गईं.

मैं वहां एक महीना रुका और हम हर रोज़ चुदाई के मजे़ लूटते रहे. अपने घर आकर मैंने अपनी सगी बहन को कैसे चोदा और असली बहनचोद कैसे बना, अगली कहानी में लिखूंगा. तब तक सब को लंड उठा कर सलाम.

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