ममेरी भाई की शादी में बहन की गांड मारी

(Mamere Bhai Ki Shadi Me Bahan Ki Gand Mari)

दोस्तो मेरा नाम है सूर्या सोनी … मैं राजस्थान से हूँ. मैं काफी साल से अन्तर्वासना पर पोर्न कहानियां पढ़ रहा हूँ तो मैंने भी सोचा कि क्यों ना में भी मेरे पुराने हसीन पलों को आपके साथ शेयर करूँ!
आज मैं आप सभी को अपनी जिंदगी की एक सच्ची भाई बहन सेक्स कहानी बताने जा रहा हूँ.

मेरी उम्र 22 साल है और मेरी लम्बाई लगभग 6 फुट है, मैं 19 साल की उम्र में ही एयरफोर्स में जॉब लग गया था इसलिए मेरी बॉडी हमेशा से शानदार रही है.

यह कहानी मेरे और मेरे मामा की लड़की यानि मेरे बहन मनीषा की है जो मेरे ही उम्र की है. यह कहानी मैंने और मनीषा दोनों ने साथ मिलकर लिखी है पुराने हसीन पलों को याद करके!

बात उस समय की है जब मैं 20 साल का था, मेरी एयरफोर्स की ट्रेनिंग खत्म हुई थी और मैं मेरे घर छुट्टियां मनाने घर आया हुआ था.

घर आने के बाद मम्मी से पता चला कि मेरे मामा के लड़के की शादी है और मुझे भी जाना है. तो मैंने पहले तो ना कर दी फिर पापा ने भी मुझे चलने को कहा तो मैंने हाँ कर दी.
अगले दिन ही सुबह जल्दी ही मैं और मम्मी ननिहाल चले गए शादी में. वहाँ मामा, मामी, मामा जी का लड़का रोहन और मनीषा से मिला.

वो सब आँगन में बैठे इधर उधर की बाते कर रहे थे और मैं मेरे फोन में खोया हुआ था. मैंने 2-3 बार परिवार वालों की तरफ देखा तो पता चला मनीषा मुझे देख रही थी, वह थोड़ी उदास सी बैठी शायद कुछ सोच रही थी. पर मैंने ज्यादा उस पे ध्यान नहीं दिया.

दोपहर का खाना खाकर में रोहन के कमरे में सो गया और शाम को उठा तो छत पे जाकर घूमने लगा. तभी मनीषा ऊपर आ गयी और उसने मुझे हेलो कहा. मैंने भी जवाब में हैलो बोल दिया.
फिर हम दोनों इधर उधर की बात करने लगे.

मनीषा- कितने दिन की छुट्टियों पे हो?
मैं- 15-20 दिनों की छुट्टियां हैं, फिर वही एयरफोर्स और हम!
मनीषा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रैंड है क्या?
अचानक हुए इस सवाल से मैं हैरान हो गया और उसकी तरफ देखने लगा.

तभी उसने कहा- जवाब दो?
मैं- नहीं है … इसके लिए कभी समय ही नहीं मिला!
मनीषा- इतनी अच्छी बॉडी है तुम्हारी … तुम पे तो हर कोई मर मिटे!
यह बोल कर वो हँसने लगी.

मुझे उसकी बातों में कुछ शरारत सी लगी और मैं नीचे जाने लगा क्योंकि वो थी तो मेरी बहन ही!
तभी पीछे से उसने आवाज लगाई- रुको सूर्या … मुझे तुम्हें एक बात बतानी है.
मैं- हाँ बोलो?
तो वो मेरे पास आकर बोली- तुम्हें याद है क्या सूर्या … एक साल पहले तुम चाचू के लड़के की शादी में आये थे? (मतलब मेरे मामा का लड़का)
मैं- हाँ याद है.
मनीषा- हम पहली बार उसी शादी में मिले थे और जब मैंने तुम्हें पहली बार देखा था तब से आज तक मैं सिर्फ तुम्हें ही पसन्द करती हूँ.

मैं उसके मुँह से ये बात सुनकर हैरान रह गया क्योंकि मैंने कभी ऐसी बातों पे ध्यान ही नहीं दिया था- मतलब?
मनीषा- सूर्या, आई लव यू!
मैं- क्या? पागल हो तुम … मैं तुम्हारा भाई हूँ.
मनीषा- इसी कारण एक साल पहले मेरी हिम्मत नहीं हुई तुम्हें ये बोलने की … उस शादी के बाद मुझे लगा कि हम फिर कभी नहीं मिलेंगे. पर आज तुम्हें देखा फिर से तो मैं खुद को रोक नहीं पायी.

ये सब बोलकर उसने मुझे गले लगा लिया और रोने लगी, वो मुझे गर्दन पर चुम्बन करने लगी और फिर मैं भी पिघल गया. पिघलता भी क्यों नहीं … मनीषा का फिगर था ही ऐसा 34-30-36
मैंने भी उसको किस किया और फिर समझाकर नीचे भेज दिया कि यहाँ कोई देख लेगा. जब भी मौका मिलेगा तब ये सब करेंगे.
तो वो मुझे होंठों पे किस करके नीचे चली गयी.

उसी दिन से मेरा दिमाग हर मिनट ऐसी ही बातें सोचने लगे गया और बाथरूम में जाकर मैंने मुठ मारकर खुद को शांत किया.
उस दिन की रात बड़ी मुश्किल से निकली हम दोनों की!

अगली सुबह जब मैं उठा तो देखा सभी अपने सामान पैक करके गाड़ी में डाल रहे थे. मेरे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था तो मैंने मामा जी पूछा इसके बारे में तो उन्होंने बताया कि शादी का बाकी प्रोग्राम भवन में है इसलिए सभी को भवन जाना है. और मामा जी ने मुझे भी जल्दी तैयार हो जाने को कहा.

फिर हम सब भवन आ गए.
जब मैं भवन में आया तब मनीषा दिखी. उसने साड़ी पहन रखी थी और बहुत सेक्सी लग रही थी. उसने मुझे देखकर स्माइल दी और मैंने भी.
फिर सभी अपने अपने काम में लग गए.

लगभग शाम को मामा जी मेरे पास आये और बोले- सूर्या, घर की अलमारी में रुपये पड़े हैं और मनीषा को पता है. तो तू मनीषा को साथ ले जाना और घर से रुपये ले आ!
मैंने कहा- ठीक है मामाजी, अभी जाता हूँ.

फिर मैंने मनीषा को ढूंढा और बोला- मामा जी ने एक काम करने को बोला है.
तभी वो बोली- पता है मुझे … मैंने ही पापा को बोला था तुम्हें मेरे साथ भेजने के लिए!
मैं तो जवाब सुनकर हैरान रह गया.

फिर हम दोनों घर आ गए. घर में घुसते ही मनीषा ने मुझे गले लगा लिया और मुझे किस करने लगी. मैं भी उसे किस करने लगा. हम दोनों के होंठ एक दूसरे से मिले हुए थे.
उसने मेरी टी शर्ट और बनियान खोल दी और मेरी चौड़ी छाती पर किस करने लगी.

पैंट से मेरा लंड बाहर निकलना चाह रहा था और वो चाहत मनीषा ने पूरी कर दी. उसने नीचे बैठकर मेरे लंड को बाहर निकाला और उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगी.
उसके चूसने के अंदाज से साफ पता चल रहा था कि वो पहले भी इसका स्वाद ले चुकी है.

आपको बता दूँ कि मेरा लन्ड मोटा ज्यादा है मोटाई 4 इंच और लम्बाई 6.5 इंच है. उसके मुँह में मेरा लंड बड़ी मुश्किल से जा रहा था फिर भी वो चूस रही थी.
यह मेरा पहली बार था इसलिए मैं जल्द ही उसके मुँह पर झड़ गया.

वो बाथरूम में गयी और चेहरा साफ करके वापस आई और मुझे फिर से किस करने लगी.
मैं फिर से गर्म होने लगा और मेरा लंड फिर से जोश में आ गया, मैंने जल्दी से मनीषा के सारे कपड़े उतार दिए और उसने भी मेरे सारे कपड़े उतार के मुझे नंगा कर दिया.

मैं पहली बार किसी लड़की को बिना कपड़ों के देख रहा था … बड़े बड़े उसके बूब्स और चूत पर एक भी बाल नहीं … जैसे उसने आज ही झाँट साफ़ की हों!
मुझे मनीषा के शरीर में सबसे अच्छी उसकी गांड लगी. आज भी सोचता हूँ तो लन्ड खड़ा जो जाता है. कसम से बहुत बड़ी और सेक्सी थी उसकी गांड।

मैं मनीषा को लेकर बेड पे आ गया और हम फिर से एक दूसरे से चिपक गए.
तभी मनीषा बोली- सूर्या जल्दी करो, अब सहा नहीं जा रहा, जल्दी से प्यास बुझा दो. जल्दी करो, वहाँ भवन में पापा इंतजार कर रहे होंगे.

उसके इतना बोलते ही मैं उसके ऊपर आ गया और उसकी टाँगें चौड़ी करके लन्ड डालने लगा. पर मेरा लंड मेरी बहन की चूत पर से बार बार फिसल रहा था. तब मनीषा ने मेरे लन्ड को मुँह में लेकर गीला किया और लन्ड को अपने हाथों से पकड़ कर चूत पर रखा और मुझे जोर लगाने को बोला.

मैंने अब जोर लगाया तो लन्ड चूत में धीरे धीरे जाने लगा. अभी तक आधा लन्ड चूत में जा चुका था और मुझे थोड़ा दर्द भी हो रहा था क्योंकि यह मेरा पहली बार था.
तभी मनीषा बोली- भाई, जोर से झटका मारो.

जैसे ही मैंने झटका मारा तो लन्ड पूरा चूत में चला गया और मनीषा चिल्लायी ताकि मुझे यह लगे कि उसका पहली बार है. पर मैं समझ गया था कि ये साली पहले से ही चालू माल है, चुदक्कड़ है.
मुझे इससे क्या … मुझे तो उसकी अब सिर्फ चुदाई से मतलब था. और मैं उसे जोश के साथ झटके मार रहा था और वो भी नीचे से उछल उछल कर मजा ले रही थी.

कुछ ही मिनट की चुदाई में ही मनीषा पहली बार झड़ गयी और उसका शरीर ढीला पड़ गया. पर मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं धक्के पे धक्के मार रहा था और उसके बूब्स चूस रहा था और वो ‘आ ऊ आ दर्द हो रहा है उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ कर रही थी.

मैं 15 मिनट से लगातार उसकी चूत पे धक्के मार रहा था और मेरा भी होने वाला था तो मैंने उसे बोला- मेरा होने वाला है!
तो उसने बोला- मेरे मुँह में झड़ना, मुझे तुम्हारा स्वाद चखना है.
तो मैंने उसकी चूत से लन्ड निकाल कर उसके मुँह में दे दिया और वो मुँह में लेकर चूसने लगी. 2 मिनट बाद मैं उसके मुँह में ही झड़ गया और मनीषा मेरा सारा पानी पी गयी और मैं बेड पे उसके पास लेट गया.

तभी मनीषा बोली- मजा आ गया यार आज तो!
मैं- क्यों पहले जिससे तुम चुदी, उससे मजा नहीं आया क्या?
मनीषा- क्या मतलब है तुम्हारा?
मैं- ज्यादा भोली मत बनो! मुझे पता है तुम पहले भी लन्ड का मजा ले चुकी हो। अब बता भी दो कब और किससे चुदी हो?
मनीषा- सॉरी सूर्या … यह सच है कि मैं पहले से चुदी हुई हूँ. पर जबसे तुम्हें देखा था एक साल पहले तब से मैं तुम्हारी बनकर रह गयी.

मैं- पहले बताओ कब और किस से चुदी थी तुम?
मनीषा- एक साल पहले मेरा एक बॉयफ्रेंड था, उसी ने मेरी चूत की सील तोड़ी थी और अब तक मैं उसके साथ 6-7 बार सेक्स कर चुकी हूँ पर तुमसे मिलने से पहले ही हमारा ब्रेकअप हो गया था.

तभी मनीषा के फोन पे मामा जी का कॉल आया और वो बोले- इतनी देर कहाँ लगा दी?
तो उसने कहा- पापा, हम थोड़े ट्रैफिक में फंस गए थे आते समय, हम अभी आ रहे हैं 20 मिनट में!
और फोन काटकर मनीषा ने मुझे किस किया और कहा- अब हमें चलना चाहिए.

पर मेरा मन नहीं था जाने का … क्योंकि मुझे तो मनीषा की गांड दिख रही थी.

मनीषा ने कपड़े पहनने शुरू कर दिए और मुझे भी मजबूरी में पहनने ही थे तो हम दोनों कपड़े पहनकर तैयार हो गए. मनीषा अंदर वाले कमरे में जाकर रुपये लेकर आई और शादी वाले भवन जाने को कहा पर मैं तो कुछ और ही सोच रहा था.

तभी उसने मेरे कान पे अपने दाँतों से काटा और कहा- कहाँ खो रहे हो?
मैं- कहीं नहीं!
मनीषा- बताओ ना … क्या सोच रहे थे?
मैं- कुछ भी नहीं सोच रहा था.
मनीषा- कोई तो बात है अब बोलो भी?

मैं- एक बात पूछूँ?
मनीषा- हाँ जरूर!
मैं- तुम्हारा बॉयफ्रेंड मुझसे अच्छा था क्या शक्ल सूरत या सेक्स करने में?
मनीषा- नहीं … शक्ल सूरत तो उसकी ठीक ठीक थी पर सेक्स में तुम उससे काफी बेहतर हो. उसका तुम्हारा जितना लम्बा तो था पर मोटा नहीं था. और वो लगातार सिर्फ 3-5 मिनट ही सेक्स कर सकता था. पर तुम 15 मिनट तक नहीं रुके … यू आर अमेजिंग!

यह सुनकर मेरे चेहरे पे थोड़ी खुशी आयी. तभी मैंने अपने मन का सवाल पूछा- तुमने कभी पीछे (गांड में) लन्ड डलवाया है?
मनीषा- नहीं … आज तक सिर्फ आगे ही डलवाया है. क्यों तुम ये सवाल क्यों पूछ रहे हो?
मैं- मनीषा, तुम्हारी चूत का मुहूर्त मैं नहीं कर सका पर तुम्हारी गांड का मुहूर्त में करना चाहता हूँ. प्लीज मना मत करना.
मनीषा- फिर कभी सूर्या … अभी देर हो रही है. पापा का फ़ोन आ जायेगा फिर से.

मैं- नहीं, मुझे एक बार पीछे डालना है सिर्फ 5 मिनट ही.
मनीषा- सूर्या जिद मत करो … अभी चलो प्लीज!
मैं- मैं नहीं जाऊँगा तुम्हारे साथ! तुम जाओ … और फिर कभी मत बोलना कि तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो.

मैं उदास सी शक्ल बना कर बैठ गया, तभी मनीषा का जवाब सुना तो खुशी से मन झूम उठा जैसे माँगी मुराद मिल गयी हो.
मनीषा- ओके … कर लो! पर जल्दी करना!
मैं- ओके.

इस बार मैंने उसके सारे कपड़े नहीं खोले बल्कि उसकी साड़ी को नीचे से ऊपर किया और उसे बेड पे हाथ रखकर आगे की तरफ झुका दिया मतलब डॉगी स्टाइल! पहले मैं उसकी गांड के छेद पे जीभ रखकर चाटा और वहाँ पर खूब गीला किया. फिर मैंने एक उंगली डाली तो मनीषा थोड़ी चीखी. फिर मैंने दो उंगलियां एक साथ डाली तो इस बार उसे थोड़ा ज्यादा दर्द हुआ और वो बोली- सूर्या, प्लीज फिर कभी गांड मार लेना, अभी बहुत दर्द हो रहा है.
मैं- थोड़ा सा दर्द होगा … मैं बड़े प्यार से करूँगा.

मैंने फिर कमरे में रखी क्रीम की डब्बी से बहुत सारी क्रीम निकालकर उसकी गांड पे लगा दी और फिर मैंने अपने लन्ड पे थूक लगा कर गांड की छेद पे रखा और थोड़ा झुककर अंदर की और जोर लगाया तो मेरा आधा लन्ड सरक सरक कर मेरी बहन की गांड में चला गया.
और मनीषा की जोर से चीख निकली, वो बोली- बाहर निकालो! बहुत दर्द हो रहा है.

मैंने उस पर पूरी पकड़ बना रखी थी तो मैंने और जोर लगा दिया और लन्ड पूरा अंदर चला गया. मैंने लन्ड को थोड़ी देर गांड में ही रखा जब तक मनीषा को दर्द कम नहीं हो गया.
थोड़ी देर बाद में लन्ड को आगे पीछे करने लगा. जब मनीषा का दर्द कम हो गया तो उसे भी मजा आने लगा और मैंने भी स्पीड बढ़ा दी और तेजी से झटके लगाने लगा.

गांड की गर्मी के कारण मैं 10 मिनट ही झटके लगा पाया और उसकी गांड में ही झड़ गया.
तब मैंने मनीषा को लिप किस के साथ थैंक यू बोला. फिर मैंने वहीं पड़ी चादर से उसकी गांड और अपने लन्ड को साफ किया.

इस दोहरी चुदाई के बाद मनीषा और मैंने कपड़े सही किये और शादी वाले भवन आ गए.

शादी के इस अवसर पर जब भी हमें मौका मिला, हम भाई बहन ने सेक्स किया और मैंने हर बार उसकी गांड मारी. शादी के बाद मैं मेरे घर आ गया और फिर अपनी एयरफोर्स की ड्यूटी पर!
जय हिन्द। वन्दे मातरम्।

मुझे ईमेल पर मैसेज करके बताना कि आपको भाई बहन सेक्स कहानी कैसी लगी.
आप सभी का स्नेह भरा सूर्या
धन्यवाद.
[email protected]

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