भाई बहन की चुदाई के सफर की शुरुआत-17

(Behan Ki Gand Chudai : Bhai Behan Ki Chudai Ke Safar Ki Shuruat- Part 17 )

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दोस्तो, मेरी इन्सेस्ट स्टोरी यानि रिश्तों में चुदाई के सोलहवें भाग में आपने पढ़ा कि कैसे मेरे चाचू ने अपनी कमसिन बेटी की चूत चुदाई की. मुझे मेरी सेक्स कहानी पर काफी मेल मिल रहे हैं औऱ सभी पाठक कहानी की तारीफ कर रहे हैं, आप सभी पाठकों का दिल से धन्यवाद।

थोड़ी देर लेटने के बाद चाचू और चाची चले गए। उन के जाते ही ऋतु और नेहा ने एक दूसरे की चूत चाट कर साफ़ कर दी और हम तीनों वही नंगे लेट गए।
दूसरे कमरे में जाकर चाची ने शीशा हटा कर देखा और अपनी नंगी बेटी को मेरी बगल में लेटते हुए देख कर वो मुस्कुरा दी।

अगले दिन सुबह हम तीनों, यानि मैं, ऋतु और नेहा नाश्ता करने के बाद पहाड़ी की तरफ चल दिए। ऋतु आगे चल रही थी। वो वही कल वाली जगह पर जा रही थी, उस ऊँची चट्टान पर।

मैं और नेहा उसके पीछे थे। नेहा ने अपने हाथ मेरी कमर पर लपेट रखे थे और मैंने उसकी कमर पर। बीच बीच में हम एक दूसरे को किस भी कर लेते थे। बड़ा ही सुहाना मौसम था, आज धूप भी निकली हुई थी।

नेहा थोड़ा थक गयी और सुस्ताने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गयी। मैं भी उसके साथ बैठ गया। ऋतु आगे निकल गयी और हमारी आँखों से ओझल हो गयी।

नेहा ने अपने होंठ मेरी तरफ बढ़ा दिए और मैं उन्हें चूसने लगा। मैंने हाथ बड़ा कर उसके सेब अपने हाथों में ले लिए और उनके साथ खेलने लगा। उसे बहुत मजा आ रहा था।

मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था, पर तभी मेरा ध्यान ऋतु की तरफ गया और मैं जल्दी से खड़ा हुआ और नेहा को चलने को कहा। क्योंकि वो जंगली इलाका था और मुझे अपनी बहन की चिंता हो रही थी।
हम जल्दी जल्दी चलते हुए चट्टान के पास पहुंचे और वहां देखा तो ऋतु अपने उसी पोज में बैठी थी अपने कपड़े उतार कर बिल्कुल नंगी।

ऋतु ने हमसे शिकायती लहजे से पूछा- तुम क्या रास्ते में ही शुरू हो गए थे, इतनी देर क्यों लगा दी?
नेहा ने जब देखा कि ऋतु नंगी है तो उसने भी अपनी लोन्ग फ्रोक को नीचे से पकड़ा और अपने सर से उठा कर उसे उतार दिया। वो नीचे से बिल्कुल नंगी थी और वो भी जाकर अपनी बहन के साथ चट्टान पर लेट गयी।
अब मेरे सामने दो हंसती खेलती नंगी जवान लड़कियां बैठी थी, मेरा लंड मचल उठा और मैंने भी अपने कपड़े बिजली की फुर्ती से उतार डाले।

नेहा ने मेरा लंड देखा तो उसकी आँखों में एक चमक सी आ गयी, वो आगे बड़ी तभी ऋतु ने उसे पीछे करते हुए कहा- चल कुतिया पीछे हो जा, पहले मैं चूसूंगी अपने भाई का लंड!
नेहा को विश्वास नहीं हुआ कि ऋतु ने उसे गाली दी। पर जब हम दोनों को मुस्कुराते हुए देखा तो वो समझ गयी कि आज गाली देकर चुदाई करनी है… तो वो भी चिल्लाई- तू हट हरामजादी, अपने भाई का लंड चूसते हुए तुझे शर्म नहीं आती… कमीनी कहीं की…
और उसने ऋतु के बाल हल्के से पकड़ कर पीछे किया और झुक कर मेरे लम्बे लंड को मुंह में भर लिया।

ठन्डे मौसम में मेरा लंड उसके गर्म मुंह में जाते ही मैं सिहर उठा।
ऋतु- अच्छा तो तू इसे चूसना चाहती है, ठहर मैं तुझे बताती हूँ…
और ये कहते ही उसने नेहा की गांड को थोड़ा ऊपर उठाया और अपनी जीभ रख दी उसके गांड के छेद पर!
नेहा चिल्ला उठी… और इतने में ऋतु ने एक जोरदार हाथ उसके गोल चूतड़ पर दे मारा… और अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद में डाल दी.
“आआ आआह्ह्ह्ह… नहीईई ईईईईईई… वहान्न्न न्न्न्न.. नहीईई ईईई… ”
पर ऋतु ने नहीं सुना और अपनी छोटी बहन की गांड में दूसरी उंगली भी घुसेड़ दी… उसकी आँखें बाहर निकल आई पर उसने मेरा लंड चूसना नहीं छोड़ा।

उन दोनो की लड़ाई में मेरे लंड का बुरा हाल था क्योंकि अपने ऊपर हुए हमले का बदला नेहा मेरे लंड को उतनी ही जोर से चूस कर और काट कर ले रही थी।
मैंने नेहा के बाल वहशी तरीके से पकड़े और उसका चेहरा ऊपर करके उसके होंठ काट डाले।
वो दर्द से बिलबिला उठी- छोड़… कुत्ते… आआआ आयीईईईई… भेन चोद… भूतनी के… आआआआआह…
वो चिल्लाती जा रही थी क्योंकि उसकी गांड में ऋतु की उंगलियाँ थी जिससे उसकी गांड फट रही थी और ऊपर से मैं उसके होंठ काट काट कर उसकी फाड़ रहा था।

नेहा के मुंह से लार गिर रही थी और उसके पेट पर गिर कर उसे चिकना बना रही थी। अचानक ऋतु ने अपने दूसरे हाथ को आगे बढ़ा कर मेरी गांड में एक उंगली डाल दी। मेरे तन बदन में बिजली दौड़ गयी। मैं उछल पड़ा, पर मैंने नेहा को चूसना नहीं छोड़ा।

मैंने अपनी बलशाली भुजाओं का प्रयोग किया और नेहा को किसी बच्चे की तरह उसकी जांघों से पकड़ कर ऊपर उठा लिया और उसने अपनी टाँगें मेरे मुंह के दोनों तरफ रख दी और अपनी चूत का द्वार मेरे मुंह पर टिका दिया।

ऋतु ने चूस कर उसकी चूत को काफी गीला कर दिया था। मेरे मुंह में उसका रस और ऋतु के मुंह की लार आई और मैं सपड़ सपड़ करके उसे चाटने लगा। नेहा ने मेरे बालों को जोर से पकड़ रखा था और मैं चट्टान पर अपनी गांड टिकाये जमीन पर खड़ा था। नेहा मेरे मुंह पर चूत टिकाये चट्टान पर हवा में खड़ी थी और ऋतु नीचे जमीन पर किसी कुतिया की तरह अब मेरे गांड के छेद को चाट रही थी।

पूरी वादियों में हम तीनों की सिसकारियां गूंज रही थी। मैंने अपना हाथ पीछे करके नेहा की गांड पर रख दिया और उसकी गांड के छेद में एक साथ दो उंगलियाँ घुसा दी। अब उसे भी अपनी गांड के छेद के द्वारा मजा आ रहा था।
पिछले दो दिनों में वो मुझ से और अपने बाप से चुद चुकी थी… पर आज उसके मन में गांड मरवाने का भी विचार आने लगा।

अपनी गांड में हुए उत्तेजक हमले और चूत पर मेरे दांतों के प्रहार से नेहा और भड़क उठी और वो अपनी चूत को ओर तेजी से मेरे मुंह पर घिसने लगी और झड़ने लगी- आआहह आआआअह्ह्ह… ले कुत्ते… भेन के लोड़े… पी जा मेरा रस… आआह्ह…
उसकी चूत आज काफी पानी छोड़ रही थी। मेरे मुंह से निकल कर नेहा की चूत के पानी की बूंदें नीचे गिर रही थी और वहां बैठी हमारी कुतिया ऋतु अपना मुंह ऊपर फाड़े उसे कैच करने में लगी हुई थी।

झड़ने के बाद नेहा मेरे मुंह से नीचे उतर आई और चट्टान पर अपनी टाँगें चौड़ी करके बैठ गयी। मैंने अपना फड़कता हुआ लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा ही था कि उसने मुझे रोक दिया और बोली- बहन चोद, आज मेरी गांड में डाल…
मैंने हैरानी से उसकी आँखों में देखा और उसने आश्वासन के साथ मुझे फिर कहा- हां… बाबा… चलो मेरी गांड मारो… प्लीज…

मैंने अपनी वही पुरानी तरकीब अपनाई ओर एक तेज झटका मारकर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया.
वो चिल्लाई- अबे… भेन चोद… समझ नहीं आती क्या… गांड मार मेरी… चूत नहीं कुत्ते…
पर मैं नहीं रुका और उसकी चूत में अपना लंड अन्दर तक पेल दिया ओर तेजी से झटके मारने लगा।

अब मेरा लंड नेहा की चूत के रस से अच्छी तरह सराबोर हो चुका था, मैंने अपना लण्ड निकाला… नेहा की आँखों में विस्मय के भाव थे कि मैंने उसकी चूत में से अपना डंडा क्यों निकाल लिया। मैंने उसे उल्टी लेटने को कहा, कुतिया वाले पोज में। वो समझ गयी और अपनी मोटी गांड उठा कर चट्टान पर अपना सर टिका दिया।

ऋतु जो अब तक खामोश बैठी अपनी चूत में उँगलियाँ चला रही थी, उछल कर चट्टान पर चढ़ गयी और अपनी टाँगें फैला कर नेहा के मुंह के नीचे लेट गयी। नेहा समझ गयी और अपना मुंह उसकी नर्म और गर्म चूत पर रख दिया और चाटने लगी।

ऋतु ने अपनी आँखें बंद कर ली ओर चटवाने के मजे लेने लगी। वो नेहा के सर को अपनी चूत पर तेजी से दबा रही थी- चाट कुतिया… मेरी चूत से सारा पानी चाट ले… आआहह आआअह्ह… भेन चोद… हरामजादी… चूस मेरी चूत को… आआआह्ह्ह्ह!

नेहा ने उसकी चूत को खोल कर उसकी क्लिट को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी। ऋतु तो पागल ही हो गयी- ओह.. ओह.. ओह.. ओह.. ओ.. ओह.. ओह.. ओह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह.. अह…
वो बुदबुदाये जा रही थी और चुसवाती जा रही थी।

पीछे से मैंने नेहा की गांड की बनावट देखी तो देखता ही रह गया। उसके उठे हुए कूल्हे किसी बड़े से गुब्बारे से बने दिल की आकृति सा लग रहा था। मैंने उसे प्यार से सहलाया और अपने एक हाथ से उसे दबाने लगा।

नेहा ने ऋतु की चूत चाटना छोड़ा और पीछे सर करके बोली- अबे भेन चोद… क्या अपना लंड हिला रहा है पीछे खड़ा हुआ… कमीने, मेरी गांड मसलना छोड़ और डाल दे अपना हथियार मेरी कुंवारी गांड में… डाल कुत्ते…
वो लगभग चिल्ला ही रही थी।

मैंने अपना लंड थूक से गीला किया और उसकी गांड के छेद पर टिकाया, थोड़ा सा धक्का मारा- अयीईईई… मर… गयीईई… अह्ह्ह ह्ह्ह्ह… नहींईईईईइ…
मेरे लंड का टॉप उसकी गांड के रिंग में फंस गया था।

मैंने आगे बढ़ कर अपने लंड को निशाना बनाकर थूका… जो सही निशाने पर लगी, लंड गीला हो गया। मैंने एक और धक्का मारा- आआआ आआआ आआअह्ह्ह…
मेरी चचेरी बहन की ये चीख काफी लम्बी थी… उसने अपने दांत ऋतु की चूत में गाड़ दिए।
ऋतु भी बिलबिला उठी- हटट… कुतियाआ… अपनी गांड फटने का बदला मेरी चूत से ले रही है… आआआ आआह्ह्ह्ह… धीरे चाट… नहीं तो तेरी चूत में लकड़ी का तना डाल दूंगी…
ऋतु ने नेहा को धमकी दी।

मेरा लंड आधा उसकी गांड में घुस चुका था… मैंने उसे निकाला और थोड़ी और थूक लगाकर फिर से अन्दर डाला। अब मैं सिर्फ आधा लंड ही डाल रहा था। नेहा भी अपनी गांड धीरे धीरे मटका कर घुमाने लगी। मैं समझ गया की उसे भी मजा आ रहा है।

नेहा की गांड मोटी होने के साथ साथ काफी टाईट भी थी। आठ दस धक्के लगाने के बाद मैंने फिर से आगे की तरफ झटका मारा… तो नेहा फिर से चिल्लाई- माँ के लौड़े… तेरी माँ की चूत… भोंसड़ी के… कमीने… कुते… फाड़ डाली मेरी गांड… आआ आआह्ह्ह आआआआह्ह्ह्ह…
वो चिल्लाती जा रही थी और अपनी गांड मटकाए जा रही थी, मैं समझ नहीं पा रहा था कि उसे मजा आ रहा है या दर्द हो रहा है।

उधर ऋतु का बुरा हाल था, चटवाने से पहले उसे बड़े जोर से पेशाब आ रहा था पर चटवाने के लालच में वो कर नहीं पायी थी। अब जब नेहा उसकी चूत का ताना बाना अलग कर रही थी तो उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अपने तेज पेशाब की धार सीधे नेहा के मुंह में दे मारी।

पहले तो नेहा को लगा कि ऋतु झड़ गयी है पर जब पेशाब की बदबू उसके नथुनों में समायी तो उसने झटके से अपना मुंह पीछे किया और ऋतु की चूत पर थूक दिया।
ऋतु की चूत का फव्वारा बड़ी तेजी से उछला और नेहा के सर के ऊपर से होता हुआ नेहा की पीठ पर गिरा। मेरे सामने ऋतु अपनी चूत खोले अपने पेशाब से नेहा की कमर भिगो रही थी। नेहा की कमर से होता हुआ ऋतु का पेशाब, मेरे गांड मारते लंड तक फिसल कर आ गया और उसे और लसीला बना दिया और मैं और तेजी से नेहा की गांड मारने लगा।

नेहा ने अपना मुंह तो हटा लिया था पर उसके गले से कुछ बूँदें उसके पेट में भी चली गयी थी। उसका स्वाद थोड़ा कसैला था.. पर उसे पसंद आया। आज नेहा किसी जंगली की तरह बर्ताव कर रही थी। उसने उसी जंगलीपन के आवेश में अपना मुंह वापिस बारिश कर रहे फव्वारे पर टिका दिया और जलपान करने लगी।

ऋतु ने जब देखा कि उसकी बहन उसका पेशाब पी रही है तो वो और तेजी से झटके दे देकर अपनी चूत नेहा के मुंह में धकेलने लगी। मेरा लंड भी अब काफी गीला हो चुका था… थूक, पेशाब और नेहा की चूत के रस में डूब कर… मेरा लौड़ा किसी पिस्टन की तरह नेहा की गांड में अन्दर बाहर हो रहा था। नेहा की गांड का कसाव मेरे लंड पर हावी हो रहा था।
मेरे लंड ने जवाब दे दिया और उसने नेहा की गांड में उल्टी कर दी।

नेहा ने भी अपनी गांड में गर्म वाला महसूस करते ही झड़ना शुरू कर दिया और वहां ऋतु की चूत ने भी जवाब दे दिया और वो भी रस टपकाने लगी।

नेहा ने अपनी गांड से मेरा लंड निकाला और अपना मुंह ऋतु की चूत की तरफ घुमा कर अपनी गांड उसके मुंह पर टिका दी। ऋतु उसकी गांड से बहते हुए मेरे लावे को चाटने लगी और अपना रस नेहा को चटवाने लगी।
मैं जमीन पर खड़ा हुआ अपने मुरझाते हुए लंड को देख रहा था और उन दोनों कुतियों को एक दूसरे की चूत चाटते हुए देख रहा था।

सारी चुदाई की कथा ख़त्म होने के बाद हम तीनों ने अपने कपड़े पहने और नीचे की तरफ चल दिए। नेहा थोड़ा धीरे चल रही थी… चले भी क्यों न… मेरी बहन की गांड जो फट गयी थी आज!
हम तीनों को काफी समय हो गया था।

आगे की इन्सेस्ट स्टोरी अगले भाग में। आप अपने विचार मुझे मेल कर सकते है साथ ही इंस्टाग्राम पर भी जोड़ सकते है।

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