कोई बहन के साथ सेक्स करता है क्या?

वीरेन
मेरा नाम वीरेन है, उम्र 25 साल है, मैं पुणे में 3 साल से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का जॉब करता हूँ।
मेरी मौसी भी पुणे में पाषाण एरिया में रहती हैं। उनकी दो बेटियाँ हैं, कोई बेटा नहीं है। बड़ी बेटी स्नेहा मेरी उम्र के बराबर 25 साल की और छोटी शुभा 21 साल की है।
स्नेहा की फिगर आयशा टाकिया जैसी है, बड़े-बड़े मम्मे और बड़ी सी पिछाड़ी, जिसे देखकर ही मेरा बुरा हाल होता है। जब वो चलती है तो उसकी मटकती गाण्ड देखकर तुरंत मेरा लंड खड़ा हो जाता है।
मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी पुणे से ही की है इसलिए मैं पुणे में पिछले 7 साल से ही रह रहा हूँ। मेरा मौसी के यहाँ पर कभी-कभी हफ्ते के आखिरी दिनों में जाना होता है।
तभी से ही मुझे स्नेहा अच्छी लगती है लेकिन मुझमें कभी उससे अपने मन की बात कहने की हिम्मत नहीं हुई।
इंजीनियरिंग के लिए शहर में आने से पहले मैं गाँव में था इसलिए मुझे लड़कियों से बात करने की आदत भी कम थी।
मेरे मौसा सरकारी नौकरी में हैं इसलिए वो सरकारी मकान में रहते हैं। एक बेडरूम में मौसा-मौसी सोते हैं और दूसरे में स्नेहा और शुभा। जब मैं मौसी के यहाँ जाता हूँ तो स्नेहा और शुभा के रूम में उनके साथ बेड पर ही सोता हूँ। उनके कमरे में बेड काफी बड़ा है और उस पर 3 लोग आराम से सो सकते हैं।
स्नेहा थोड़ी आलसी होने के कारण देर से उठती थी। मैं सुबह जल्दी उठने पर स्नेहा को ही देखता रहता। सुबह के समय उसका गाऊन थोड़ा ऊपर को चढ़ा रहता था जिससे मैं स्नेहा की जाँघों को देखता रहता और उसकी गाण्ड को भी जिस पर गाऊन चिपकने के कारण चड्डी के निशान दिखाई देते थे।
कभी-कभी उसका गाऊन का ऊपर का बटन खुला होने पर उसके मम्मे भी दिखाई देते थे।
उठने के बाद मैं स्नेहा के नहाने जाने की राह देखता था और जैसे ही वो नहा कर बाहर आती मैं अपना नंबर लगा देता। गुसलखाने में अन्दर जाकर मैं उसकी ब्रा को गाऊन पर लगा कर हैंगर पर लटका कर उसके मम्मे चूसने की रियाज करता था।
उसकी पैन्टी की मादक गंध मुझे पागल कर देती थी। उसकी पैन्टी को चूमते हुए मैं मुठ मारता था और अपना सारा वीर्य निकाल देता था।
एक बार मैंने स्नेहा को बातों-बातों में बताया कि मैं कभी-कभी शराब लेता हूँ। उसके बाद जब भी मैं उसको रात को एसएमएस करता तो स्नेहा को लगता था कि मैंने दारू पी के ही एसएमएस किया है।
2009 में एक दिन रात को मैंने स्नेहा को एसएमएस किया तो उसने कहा- लगता है ज्यादा पिए हो?
जबकि मुझे कभी दारू चढ़ती ही नहीं है। मैंने सोचा इसी बात का फायदा उठाते हैं और मैंने स्नेहा को एसएमएस किया ‘आज रूम पे कोई नहीं है, अभी तुम रूम पर होतीं तो मजे करते..!’
मुझे लगा इससे थोड़ी बात बनेगी और स्नेहा भी मेरे बारे में सोचने लगेगी। लेकिन इसका असर उल्टा हुआ, स्नेहा ने मुझे डांटते हुए पूछा तो मैंने उसे कहा- वो एसएमएस उसके लिए नहीं था गलती से उसे भेज दिया था।
और उसको ‘सॉरी’ बोला ताकि किसी को न बताए।
इसके बाद मैंने स्नेहा को चोदने का ख्याल छोड़ दिया और उसके बारे में सोच कर मुठ मारने में ही खुश रहने लगा।
इंजीनियरिंग के बाद मुझे पुणे में ही जॉब मिल गया, इसी बीच स्नेहा ने भी बी.कॉम. पूरा किया और काल-सेंटर में जॉब शुरू किया।
एक दिन मौसी और मौसा को किसी जरुरी काम से दो दिन के लिए बाहर जाना था, तो मौसी ने मुझे फोन किया और दो दिन घर पर सोने के लिए आने को कहा तो मैंने तुरंत ‘हाँ’ कर दिया और मन ही मन बहुत खुश हो गया।
मैंने मन ही मन ठान लिया था कि इन दो दिनों में मैं कुछ न कुछ करके रहूँगा।
रात को मैं 8 बजे मौसी के घर पहुँचा। घर पर सिर्फ शुभा थी और स्नेहा जॉब से रात दो बजे आती थी।
मैंने शुभा के साथ खाना खाया और थोड़ी देर बातें करने के बाद शुभा सो गई।
अब मैं स्नेहा के आने की राह देखने लगा।
मैं स्नेहा को पटाने कि तरकीबें सोचने लगा। मुझे मालूम था कि स्नेहा आने के बाद सोने से पहले थोड़ी देर अपने कंप्यूटर पर समय बिताती है इसलिए मैंने अपना लैपटॉप निकाला, उसकी स्क्रीन का वालपेपर बदल कर मैंने वहाँ एक नंगी लड़की का फोटो लगाया और मेरे लैपटॉप में जितनी भी ब्लू-फिल्म थीं, उनमें से जिनका नाम ‘फकिंग कजिन/सिस्टर’ था, उनको डेस्कटॉप पर ही रखा ताकि वे लैपटॉप चालू होने पर तुरंत दिखाई दें।
मैंने अपना लैपटॉप स्नेहा के कंप्यूटर के बिल्कुल पास रखा और मैं दो बजने की राह देखने लगा।
दो बजे स्नेहा ने दरवाजा खोलने के लिए मुझे फोन किया।
मैंने दरवाजा खोला और नींद में होने का नाटक करके मैं शुभा के बाजू में सो गया। मुझे मालूम था अगर मैं नींद में होने का नाटक न करता तो स्नेहा मुझे मौसी के कमरे में सोने को कहती और मेरी योजना फेल हो जाती।
स्नेहा फ्रेश होने गई तो मैंने जानबूझ कर मेरा एक हाथ शुभा के मम्मे पर रखा और पैर चूत पर। शुभा गहरी नींद में थी, इसलिए उसे पता नहीं चला।
मैं आज स्नेहा की लेकर ही मानने वाला था। जब स्नेहा फ्रेश होकर आई तो मैंने नींद में होने का नाटक करके शुभा को और जकड़ लिया, जिसको देखकर स्नेहा ने मुझे उससे थोड़ा दूर हटाया और कंप्यूटर पर गई। उसे लगा मैं नींद में ही हूँ।
वहाँ उसने मेरा लैपटॉप देखा तो कंप्यूटर की जगह मेरा लैपटॉप ही चालू किया।
मेरी योजना की शुरूआत सही हुई। मैंने सोचा कि सब योजना के मुताबिक हुआ तो आज मेरा काम बन सकता है।
मैंने दरवाजे से झाँक कर देखा तो स्नेहा वो ब्लू-फिल्म देख रही थी। मैंने सोचा कि यह देख कर वो समझ जाएगी कि अमेरिका और बाकी जगह कजिन के साथ भी सेक्स करते हैं तो अपने यहाँ क्यों नहीं..!
मैंने देखा कि थोड़ी देर बाद स्नेहा ने एक हाथ अपनी चूत में डाल दिया और दूसरे हाथ से अपने मम्मे दबा रही थी। यहाँ मेरी हालत खराब होती जा रही थी इसलिए मैं बेड पे आके लेट गया।
थोड़ी देर बाद स्नेहा आई और मेरे बाजू में सो गई। एक घंटे बाद मैंने उसके मम्मे पर हाथ फेरना शुरू किया, इतने में वो जाग गई, वो समझ गई मैं सोने का नाटक कर रहा हूँ।
उसने गुस्से में मुझे जगाया और बाजू के कमरे में ले गई। डर के मारे मैंने दूसरे कमरे में जाते ही उससे माफी मांगी।
उसने कहा कि वो एक शर्त पर ही माफ करेगी, अगर वो नहीं मानी तो वो सबको बता देगी।
मैंने शर्त बिना सुने ही ‘हाँ’ कह दी।
उसने बोला- उसे मेरे लैपटॉप से सारे ब्लू-फिल्म चाहिए।
मैं तुरंत लैपटॉप और पेनड्राइव लाया। उसने मुझे सिर्फ अच्छी फिल्म्स ही कॉपी करने बोला, तो मैंने बोला- तुम खुद ही देख लो और अपनी पसंद की चुन लो।
तो वो मान गई। मैंने एक मस्त मूवी चालू की, जिसमें लड़का अपनी बहन के साथ सेक्स कर रहा था।
उसने मुझे बोला- कोई अपनी बहन के साथ सेक्स करता है क्या?
तो मैंने उसे अपने रिश्तेदारों के खोटे किस्से उसे सुनाए। मैं समझ गया कि स्नेहा यह सुन कर थोड़ी खुश हुई है और मेरे साथ सम्भोग करने की सोचने लगी है। ब्लू-फिल्म चालू थी और स्नेहा भी गर्म हो गई थी।
स्नेहा ने गुलाबी रंग का गाऊन पहना था जिसका गला थोड़ा नीचे था और उसके मम्मे थोड़े से दिख रहे थे।
ब्लू-फिल्म और सामने स्नेहा को देख कर मेरा लंड खड़ा हुआ था और मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था तो मैंने जल्दी से स्नेहा को पीछे से पकड़ लिया और उसके मम्मे पर हाथ फिराने लगा।
इस बार भी स्नेहा ने थोड़ा विरोध किया लेकिन फिर भी मैंने उसके दोनों मम्मे दबाने चालू रखे।
अब सामने ब्लू-फिल्म चालू देखकर स्नेहा भी गर्म हो गई थी इसलिए कुछ नहीं बोल रही थी।
मैंने थोड़ी देर गाऊन के ऊपर से ही उसके मम्मे सहलाए।
थोड़ी देर बाद मैंने उसका गाऊन नीचे से उठाया तो उसने भी हाथ ऊपर करके गाऊन निकालने में मेरा सहयोग दिया।
स्नेहा ने अन्दर सफ़ेद रंग की ब्रा और गुलाबी पैन्टी पहनी थी। स्नेहा को पहली बार ब्रा और पैन्टी में देख कर मेरा लंड और सख्त हो गया और मैं स्नेहा के मम्मे दबाते-दबाते उसे चूमने लगा।
अब मैं पीछे से ही एक हाथ से उसके मम्मे दबाने लगा और दूसरा हाथ उसकी चूत पर फिराने लगा। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
मैं और जोर से उसके मम्मे दबाने लगा तो उससे रहा न गया और वो मेरे तरफ मुड़ गई तो मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और जोरों से चूमने लगा, वो भी मेरा सहयोग करने लगी।
अब मैंने धीरे से उसकी ब्रा का हुक निकाला और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा। मैंने देखा तो उसके मम्मे बहुत बड़े थे। शायद उसकी मां से भी बड़े। जैसे दो बच्चे की मां के होते हैं ठीक उतने बड़े..!
आज तक बाहर से मुझे कभी अंदाज नहीं आया था, शायद वो कम नंबर की ब्रा पहन कर उन्हें दबा कर रखती थी, क्योंकि जैसे ही मैंने ब्रा खोली वैसे ही उसके मम्मे उछलते हुए बाहर आए।
मैंने मेरा मुँह उसके बाएं निप्पल पर रख दिया और उसे जोरों से चूसने लगा। स्नेहा भी मेरा सर पकड़ कर जोरों से अपने मम्मों पर दबा रही थी।
मैंने मम्मे चूसते-चूसते एक हाथ उसकी पैन्टी के अन्दर डाल दिया और उसकी चूत पर फिराने लगा। उसकी चूत गुलाब के फूलों जैसी मखमली और एकदम गरम लग रही थी।
मैं एक उंगली उसकी चूत में घुमाने लगा।
अब स्नेहा के निप्पल कुछ सख्त होने लगे थे और उसकी चूत भी गीली हो गई थी।
स्नेहा अब ज्यादा उत्तेजित हो गई थी और मेरा पूरा साथ दे रही थी। उसके मुँह से बहुत सेक्सी आवाजें निकल रही थी, वो ‘उऊऊ ऊऊऊ..आह ह्ह… अयययईईईई..’ जैसी आवाजें निकाल रही थी।
उसकी चूत देखे बिना मुझसे रहा नहीं जा रहा था और उसकी चूत की मादक गन्ध ने मुझे पागल कर दिया था। इसलिए मैंने उसे लिटा दिया और तुरंत उसकी पैन्टी उतार फेंकी।
अब उसकी चूत मेरे आंखों के सामने थी, बहुत ही प्यारी थी उसकी चूत, करीब दो इंच लम्बा चीरा था, उसकी चूत के होंठ बहुत ही प्यारे थे और उस पर एक भी बाल नहीं था।
शायद उसने एक दिन पहले ही उसकी सफाई की थी।
मैंने अपना मुँह उसकी चूत से लगा दिया और जोर से उसकी चूत चूसने लगा।
अब स्नेहा के मुँह से और ज्यादा आवाज निकलने लगी और थोड़ी देर बाद स्नेहा झड़ने लगी। मैं उसका सारा पानी पी गया, उसका स्वाद बहुत अच्छा था।
मैंने उसकी चूत चूसना चालू रखा तो कुछ ही देर में स्नेहा फिर गर्म हो गई।
अब उसने खड़े हो कर मेरे सारे कपड़े एक मिनट में ही निकाल फेंके और नीचे बैठकर मेरा लंड चूसने लगी। कुछ देर बाद मैं उसके मुँह में ही झड़ गया और हम थोड़ी देर लेटे रहे।
फिर थोड़ी दर बाद मैंने फिर से उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरू किया और मम्मे चूसने लगा, जल्द ही वो फिर से गर्म हो गई।
मेरा लंड भी फिर से खड़ा हो गया था और स्नेहा की चुदाई के लिए तैयार था। अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैं अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा।
अब स्नेहा को भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था, वो भी जोर-जोर से कहने लगी- वीरेन.. अब रहा नहीं जाता.. फाड़ दे मेरी चूत को फाड़डड़ दे..’
मैंने अपना लंड पकड़ा और उसकी चूत के मुँह पर ठीक से रखा और धीरे से एक धक्का लगाया तो मेरा लंड सिर्फ थोड़ा सा अन्दर गया और स्नेहा जोरों से चीख पड़ी।
मैंने तुरंत अपना मुँह उसकी मुँह पर रख दिया और जोरों से पांच-छ धक्के लगाए तो मेरा लंड पूरा अन्दर घुस गया।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरू रखा, थोड़ी देर बाद स्नेहा का दर्द कम हुआ तो मैंने अपना मुँह उसके मुँह से हटा दिया और अब उसके मम्मों पर रख दिया और उन्हें चूसते-चूसते धक्के लगाता रहा।
लगभग पंद्रह मिनट तक धक्के लगाने के बाद स्नेहा ने मुझे कसके पकड़ लिया और अपने पैरों को मेरी गाण्ड के ऊपर कस दिया।
मैं समझ गया कि स्नेहा की चूत का पानी निकलने वाला है, मैंने भी अपनी गति बढ़ा दी।
अब उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।
अचानक उसका बदन ऐंठने लगा और उसने मुझे कस कर पकड़ लिया।
इसी बीच मेरे लंड से भी गर्म वीर्य का लावा निकल कर उसकी चूत में भरने लगा, हम दोनों एक साथ झड़ गए।
उस रात स्नेहा को मैंने 3 बार जी भर कर चोदा और दूसरे दिन भी स्नेहा मेरे साथ ही सोई।
अब मैं स्नेहा को कभी भी चोद सकता हूँ।
उम्मीद है कि मेरी यह कहानी सभी को पसंद आई होगी।
आपके ईमेल आने के बाद मैं और एक कहानी बताना चाहूँगा जिसमें मैंने स्नेहा की छोटी बहन शुभा को भी चोदा।
मुझे आपके मेल का इंतजार रहेगा।
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