बहन के साथ प्रेमलीला-10

Bahan Ke Sath Prem-leela-10
जैसे प्रिया ने मेरी आवाज सुनी तो वो जैसे होश में आई हो, उसने मेरी तरफ देखा और फिर अपनी तरफ देखा और जैसे ही उसने अपने आपको देखा तो उसको अहसास हुआ कि वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी है।

तुरन्त ही उसने अपने एक हाथ से अपने वक्ष को ढक लिया और दूसरे हाथ से अपनी योनि को छुपा लिया जबकि एक एक हाथ से बूब्स और योनि को छुपा पाने में असमर्थ हो रही थी।

उसकी आँखें मुझे ही देख रही थी और मैं तो प्रिया के यौवन को निहार रहा था।

मैंने अब बिना कुछ कहे उसके पैर को अपने एक हाथ से पकड़ा और उसको थोड़ा सा ऊपर उठाने लगा।

अब की बार प्रिया ने अपना पैर थोड़ा सा ऊपर किया तो मैंने उसकी स्कर्ट एक पैर से निकाल दी, फिर वैसा ही मैंने उसके दूसरे पैर को ऊपर किया और पूरी स्कर्ट उसके जिस्म से अलग करके एक तरफ रख दी।

अब वो सम्पूर्ण रूप से मेरे सामने नंगी खड़ी थी अपने यौवन के खजाने को छुपाये हुए।

मेरा लण्ड उतेजना के मारे ऊपर नीचे हो रहा था जोकि उसे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था क्योंकि मैं तो पहले से ही नंगा हो चुका था।

मैंने अपना हाथ प्रिया के हाथ पर रख दिया जिस हाथ से उसने अपनी योनि को छुपा रखा था और धीरे धीरे उसके हाथ को सहलाने लगा और फिर मैंने प्रिया का हाथ पकड़ा और उसकी योनि से हटा दिया।

प्रिया ने कोई न नुकुर नहीं की और अपना हाथ अपनी योनि से हटा लिया पर उसने अपनी आँखें जरूर बंद कर ली थी।

अब प्रिया की चूत मेरी आँखों के सामने थी बड़ी ही मस्त लग रही थी योनि के ऊपर हल्के सुनहरी बाल उसकी चूत पर गजब ढा रहे थे।
प्रिया की चूत के दोनों तरफ की पत्ती उभरी हुई थी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी उसकी चूत से कुछ बूँदें रस की नीचे गिर रही थी और कुछ बूँदें उसकी चूत से निकल कर गिरने वाली थी।

इससे पहले चूत के रस की बूँदें बिस्तर पर गिरती, मैंने अपने मुँह से अपनी जीभ बाहर निकली और प्रिया की चूत पर उस जगह रख दी जहाँ से रस निकल कर बाहर आ रहा था।

मेरी जीभ ने जैसे ही प्रिया की चूत को टच किया ‘स्सस्सस्सीईईईईम्म्माआआआअ’ प्रिया मुंह से सिसकारी निकल गई।

प्रिया की चूत से रस टपकने से पहले ही मैं वो रस चाट गया, बहुत ही अच्छा स्वाद था उसकी चूत के रस का।

फिर मैंने उसकी चूत पर एक लम्बा सा चुम्बन किया।

अब तो प्रिया की हालत ओर भी खराब हो गई थी।

फिर मैं प्रिया की चूत की बीच की लकीर में अपनी जीभ डाल कर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर की ओर करने लगा।

प्रिया की टांगों में कम्पन होने लगा था और अब उसकी चूत ओर भी पानी छोड़ने लगी थी जिसे मैं अपनी जुबान से चाट जाता था।

मैंने प्रिया को इशारे से पैरों को और फैलाने के लिए कहा तो उसने तुरन्त ही अपने पैरों को और फैला लिया।

मैं थोड़ा सा नीचे की तरफ हुआ और उसकी चूत में अपनी जीभ डाल कर चूसने लगा।

‘ऊऊऊऊईईईम्म्म्माआआआअ’ प्रिया के मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी और साथ ही उसका एक हाथ मेरे सर पर आ गया और वो मेरे बालों को सहलाने लगी।

इस वक़्त प्रिया बेड पर खड़ी थी और मैं बेड से नीचे जमीन पर खड़ा था।

मैंने भी अपनी पूरी जीभ उसकी चूत में घुसा दी अब तो प्रिया ने मेरे सर के बालों को छोड़ कर अपने दोनों हाथों से अपनी चूची को मसलने लगी।

उस वक़्त प्रिया को बहुत ही आनन्द आ रहा था जिसे वो अपनी सिसकारियों में बयान कर रही थी।

मैं जितना उसकी चूत को छेड़ता, उतना ही वो अपनी चूची को मसलती।

कुछ देर बाद प्रिया झड़ने लगी, उसने मेरा सर अपनी जांघों के बीच दबा लिया, मैं प्रिया की चूत का सारा माल चट कर गया।

जब वो पूरी तरह झड़ गई तो उसने मेरा सर अपनी जांघों से आजाद कर दिया।

अब प्रिया की वो हालत थी की उससे अब खड़ा नहीं हुआ जा रहा था।

फिर मैंने उसको मैंने बेड पर लेटने का इशारा किया और वो मेरा इशारा समझ गई।

वो बेड पर लेट गई।

प्रिया अब मेरे सामने बेड पर पीठ के बल नंगी लेटी हुई थी, उसका सर बेड के किनारे पर था।

प्रिया ने अपनी आँखें बंद की हुई थी और जो मैं अब करने वाला था वो बस अब उसका इंतजार कर रही थी।

मैं प्रिया के सर की तरफ खड़ा था।

फिर मैंने तेल की शीशी उठाई और सबसे पहले मैंने उसकी चूची को पकड़कर उस पर तेल डाला।

दोनों चूचियों पर तेल डालने के बाद मैंने तेल की शीशी एक तरफ़ रख दी और अपने हाथों से उसकी चूची पर तेल मसलने लगा।

जब दोनों चूची पूरी तेल में हो गई तो मैंने अपने दोनों हाथ उसकी चूचियों के बीच में रखे और अपने दोनों हाथ उसके बदन पर रगड़ते हुए नीचे की ओर लाने लगा फिर उसके मम्मों के नीचे से होता हुआ उसकी बगल तक हाथ ले गया फिर अपने दोनों हाथ फिर से ऊपर लाया।

अब मेरे हाथों ने प्रिया के बूब्स को इस तरह से पकड़कर ऊपर उठाये हुए थे कि उसके दोनों बूब्स आपस में मिल गए और फिर हाथ ऊपर ले जाकर एक एक उसकी चूची के ऊपर से लाता हुआ उनको दबा देता।

उसकी चूचियों की अपने दोनों हाथों से इसी तरह से मालिश करने लगा मैं।

प्रिया के बूब्स को मैं कभी कभी बड़ी ही बेदर्दी से मसल देता जिसके कारण प्रिया की मस्ती से डूबी हुई ऊऊऊउईईईईईई सिसकारियाँ निकल जाती।

पूरे कमरे में प्रिया की सिसकारियाँ गूंज रही थी।

फिर मैं उसकी दोनों चूचियों के निप्पल पकड़ कर उसको मसलने लगा।

अब तो प्रिया की और भी हालत और भी ख़राब हो गई थी इसलिए तो वो ‘स्स्स्सीईईईईइ’ करते हुए अपने ही दांतों से अपने होंठ काटने लगी थी।

प्रिया के होंठ और भी गुलाबी और भी सेक्सी हो गए थे।

मैंने भी अपने होठों पर अपनी जीभ फिराई और उसके बूब्स को पूरी ताकत से मसलते हुए मैं थोड़ा सा नीचे की ओर झुका, अपने होंठ प्रिया के होंठों पर रख कर उसके रस भरे होंठों को चूसने लगा।

प्रिया भी मेरा पूरा पूरा सहयोग कर रही थी।

कभी मैं उसके होंठों को चूसता तो कभी वो मेरे होंठों को चूसती और साथ-साथ मैं उसकी चूचियों को भी मसल रहा था।

प्रिया को पूर्ण नग्न करके उसके रसीले होंठों को चूसने का मज़ा ही कुछ अलग था।

प्रिया का तो शायद लाइफ इस तरह का पहला चुम्बन था इसलिए मुझसे ज्यादा मज़ा तो उसको आ रहा होगा।

मैं प्रिया को दोहरा मज़ा दे रहा था किस का और बूब्स के मर्दन का भी।

कुछ देर बाद जब मैं प्रिया से अलग हुआ तो प्रिया के होंठ ऐसे हो गए थे जैसे कि अभी उनमें से खून निकल पड़ेगा।

फिर मैंने प्रिया के पेट पर तेल डाला और उसकी मालिश करने लगा, उसका नाजुक पेट और उसकी गहरी नाभि बड़ी ही मनमोहक लग रही थी।

फिर मैंने अपना हाथ पेट से नीचे ले जाकर उसकी चूत की उभरी हुई पत्तियों की मालिश करने लगा।

मालिश करते हुए मैं अपनी उंगली प्रिया की चूत के अन्दर कर दिया करता जिससे वो उछल पड़ती थी।

प्रिया की चूत फिर से गीली हो चुकी थी, उसकी चूत से रह रहकर पानी निकल रहा था।

कुछ देर मैं ऐसा ही करता रहा, और फिर मैंने उसको पलटने के लिए कहा तो वो पलट कर लेट गई।

उसके लेटने के बाद मैंने कुछ तेल उसकी कमर और गांड के उभरे हुए चूतड़ों और उनकी दरार में डाल दिया।

इससे आगे मेरे हाथ नहीं जा सकते थे, यह बात प्रिया भांप गई और वो खुद ही आगे की ओर सरक गई।
अब उसकी गर्दन बेड से बाहर की ओर निकली हुई थी।

उसके बाद मैंने अपने दोनों हाथ उसके नंगे जिस्म पर रखे और तेल को उसके बदन पर फैलाने लगा।

अब मेरे हाथ उसकी गांड पर से होते हुए चूत पर भी पहुँच रहे थे और उसके चूतड़ों की मालिश करता हुआ मैं प्रिया की चूत भी सहला देता था।

प्रिया का मुंह अब मेरे लण्ड के बहुत ही करीब था तो उसने भी अब अपने हाथों को हरकत दी और उसने अपने एक हाथ से मेरी कमर को पकड़ कर, दूसरे हाथ से मेरा लण्ड धीरे धीरे अपने हाथों से सहलाने लगी।

मेरा लण्ड तो पहले से ही खड़ा हुआ मचल रहा था।
मैंने प्रिया को देखा और उसने मुझे देखा और नजरें मिलते ही वो मुस्कुरा दी और फिर थोड़ा सा आगे की ओर आ गई मेरे लण्ड के और करीब।

उसके ऐसा करने से मुझे भी बहुत आनन्द आ रहा था इसलिए मैं भी अपने दोनों हाथों से प्रिया की कमर को कसकर मसलने लगा, फिर कुछ देर बाद ही प्रिया मेरे लण्ड का टोपा खोलकर उसको अपने नाजुक होंठों के बीच रखकर उसको चूसने लगी।

अब तो मेरी भी हालत और भी खराब होने लगी तो मैं भी प्रिया की गांड के ऊपर अपने हाथ फिराता हुआ उसकी चूत को छेड़ने लगा।
अब प्रिया और मैं दोनों ही मदहोशी के आलम में खोते जा रहे थे, मैं खड़ा था और प्रिया उलटी पेट के बल लेट कर मेरा लण्ड चूस रही थी।

प्रिया की चूत तो इतना पानी छोड़ रही थी मानो वो मूत रही हो और मुझे भी अब लगने वाला था कि मैं कहीं इसके मुंह में ही न झड़ जाऊँ।
इसलिए मैंने उसकी मालिश रोक दी।

मेरे रुकते ही प्रिया ने मेरा लण्ड अपने मुंह से निकाला और मुझसे पूछने लगी- क्या हुआ भाई? आप रुक क्यों गए? बहुत मज़ा आ रहा था।
कहानी जारी रहेगी।

 

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