तेरा लंड टेड़ा है पर अब मेरा है-1

(Tera Lund Teda Hai Par Mera Hai Part-1)

मुंबई से आने बाद पहली बार पुणे में मैंने सुनयना नाम की शादीशुदा भाभी को चोदा और आज तक उस भाभी की चूत चुदाई भूल नहीं पा रहा हूँ।
नमस्कार दोस्तो मैं दीप पुणे से.. मेरी पिछली कहानी
सेक्स की प्यासी आंटी और दोस्त की बहन की साजिश
के बारे में आप सबने पढ़ा था। इस कहानी में आंटी ने मुझे चोदना सिखाया था और अब आपके लिए नई कहानी ‘तेरा लंड टेड़ा है पर मेरा है’ ले कर आया हूँ। मुझे उम्मीद है कि आप सभी को ये सेक्स भरी चुदाई की कहानी पसंद आएगी।

पिछले साल की बात है.. जब मैं मुंबई से पुणे वापिस आया था। पुणे में आने के बाद मेरा काम में मन नहीं लग रहा था बार-बार आंटी की चूत दिखाई देती थी। इस वजह से न तो मेरा दिल किसी काम में दिल लग रहा था, ना किसी के साथ बात करने में मन लग रहा था। फिर कुछ दिनों बाद मेरे काम का प्रेशर बहुत बढ़ गया था.. और इसी वजह से मैं वापिस नॉर्मल हो गया।

लेकिन इसके बाद अब जब भी कभी कोई आंटी दिख जाती हैं.. तो मैं उसके बारे में गंदी बातें सोचने लगता था और अपने लंड को हाथ से ठण्डा कर लेता था। लेकिन ये तो आप जानते ही हैं कि लंड को एक बार चूत की आदत लग जाए तो हाथ से उतना मजा नहीं आता।

इसलिए मैंने पुणे में कोई आंटी पटाने की सोची, पर बहुत ढूँढने के बाद एक भी उस टाइप की आंटी नहीं मिली, जिससे लंड की प्यास बुझाई जा सके।
फिर कुछ दिनों बाद मेरे नसीब से एक चुत मिली।

मेरा पुराना दोस्त आकाश पुणे में अकेला ही रहता था, उसकी शादी तय हो गई थी। तो वो अपनी होने वाली वाइफ की शादी की शॉपिंग करने में लगा हुआ था। वो शनिवार और रविवार अपनी फैमिली से मिलने अपने गाँव जाता था तो उन दो दिन के लिए मैं उसके फ्लैट में सोने जाता था।

एक दिन मैं आकाश को बस स्टॉप पर छोड़ने के लिए जा रहा था, तभी उसके पड़ोस वाली भाभी रास्ते में मिल गईं। उन्होंने आकाश से शादी की डेट पूछी और दोनों में बहुत देर तक बातें चलती रहीं। फिर चूंकि हम दोनों बहुत लेट भी हो गए थे.. सो भाभी से विदा लेकर चल दिए। उधर से निकलते ही मैंने भाभी के बारे में आकाश को पूछा तो आकाश ने बताया कि भाभी का पति सिविल इंजीनियर है.. वो हमेशा घूमता ही रहता है। बेचारी भाभी की शादी को 3 साल हो गए.. पर अभी भी एक भी बच्चा नहीं हुआ।
ये सुनकर मैंने उससे कहा- भाभी उनके साथ क्यों नहीं जाती हैं?
आकाश ने कहा- अरे पहले तो जाती थी.. पर भैया एक ही जगह पर ज्यादा दिन रुकते नहीं हैं.. तो भाभी दिन भर कमरे में अकेली बोर होती रहती थीं.. इसलिए वो अब यही रहती हैं।

उतने में आकाश की बस आई और वो मुझे ‘बाय’ कहकर चला गया। मैं भाभी के बारे में सोचने लगा और जल्दी ही फ्लैट पर आ गया। तभी मैंने सोचा भाभी से कैसे पहचान बनाऊं.. ये सोचते सोचते रात हुई.. तो करीब 9 बजे मैं चाय बनाने गया। तभी मैंने देखा कि नल में पानी नहीं आ रहा था तो मैंने सोचा चलो पानी के बहाने से भाभी के घर हो आऊं.. पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि रात के टाईम कैसे जाऊं।

लेकिन भाभी की मस्त जवानी के बारे में सोच-सोच के मेरा लंड भी बहुत टाइट हुआ जा रहा था। फिर मैंने बिना सोचे बोतल उठाई और उनके घर की डोरबेल बजा दी।

अगले ही पल भाभी नाइट गाउन में मेरे सामने खड़ी थीं। उनको देखकर तो मेरा लंड और भी टाइट हो गया। मुझे समझ में नहीं आया कि अब क्या कहूँ, तभी उन्होंने पूछा- हाँ बोलिए.. क्या चाहिए?

मैंने एकदम से होश में आते हुए कहा- मैं आकाश का फ्रेंड हूँ और घर में पानी नहीं है.. आकाश भी अभी गाँव चला गया है.. मुझे समझ नहीं आया तो आपके पास पानी लेने आया हूँ।
भाभी मेरी मासूमियत पर हंसने लगीं और उन्होंने कहा- अरे हाँ, मैंने अभी आपको उनके साथ ही देखा था इसलिए मैं भी वही सोच रही थी कि आपको कहीं तो देखा है.. अरे आपसे यही खड़े होकर बात करने से अच्छा है कि आप अन्दर आ जाइए।

यह कहते हुए भाभी ने मेरे हाथ से बोतल ली और मुझे हॉल में सोफे पर बैठने को कहकर वो किचन में जाने लगीं।
उनके घूमते ही मैं उनकी गांड को हिलते हुए देखने लगा और इतनी खतरनाक गांड देख कर मेरे होश ही उड़ गए।

क्या मस्त लग रही थी उनकी गांड.. मेरे हिसाब से 36 इंच की तो पक्का रही होगी। भाभी की गांड क्या कमर हिलते हुए चलती थी.. मुझे तो लगा शायद मैं उनका चोदन ही कर दूँगा।

मैं अभी भाभी के बारे में ही सोच रहा था कि तभी वो मेरे सामने बोतल लेकर खड़ी हो गईं। मुझे पता ही नहीं चला कि वो कब आ गईं। मैं तो उनकी चुत को कल्पना में ही चोद रहा था।

मेरी इस सोच भरी स्थिति को देख कर उनको भी पता चल गया क्योंकि मेरी आँखें में तो साफ दिखाई दे रहा था कि मैं भाभी की जवानी पर लार टपका रहा था।

फिर भाभी हँसते हुए मेरे सामने बैठ गईं और उन्होंने पूछा- तुम्हारा नाम क्या है?
मैंने कहा- दीप!
उन्होंने अपना नाम बताया सुनयना..

फिर थोड़ी देर तक इधर-उधर की बातें हुईं और मैंने कहा- भाभी जी चलता हूँ.. किसी होटल में जाकर खाना भी खाना है।
उन्होंने कहा- ऐसे खाने के लिए हमें भी कभी बुलाया करो।
फिर क्या.. मुझे तो इसी मौके का इंतजार था तो मैंने कहा- अभी चलो.. फिर वैसे आज अकेला ही हूँ।
तो भाभी भी तुरंत बोलीं- हाँ मुझसे ज्यादा कौन समझेगा अकेले में खाने का गम.. तुम रुको मैं रेडी होकर आती हूँ।

मैं भी उनके घर पर रुक गया।

थोड़ी देर बाद वो साड़ी पहन कर आईं। उनको देख कर तो मेरे होश ही उड़ गए और मैं उनको देखता ही रहा।
वो फिर हंसने लगीं और पूछा- क्या हुआ इतना क्यों घूर रहे हो?
तो मैंने थोड़ा होश में आते हुए कहा- कुछ नहीं भाभी आप इतना जल्दी रेडी हुई हो.. इसलिए थोड़ा कंफ्यूज हो गया।
उन्होंने कहा- अरे अभी कहाँ तैयार हुई हूँ थोड़ी 15 मिनट और रुको न.. बस अभी आई।

इतना कहकर वो बेडरूम में गईं फिर आईं तो देखा कि वो मेकअप करके आई थीं।
आते ही भाभी ने कहा- अब चलो।
तो मैंने भी उनसे कहा- आप बाहर गेट के बाहर रुकिए.. मैं अभी रूम को लॉक करके आता हूँ।

वो मुझे अजीब से तरीके से देख रही थीं और मैं जल्दी अपने घर पर जाकर बाईक की चाभी ली और डोर लॉक करके नीचे खड़ी बाईक पर बैठकर बाहर भाभी के पास जाकर रुक गया।
भाभी लपक कर बाईक पर बैठीं और बाइक आगे चल दी।

जब थोड़ी देर तक भाभी ने कुछ भी नहीं कहा तो मैंने उनसे पूछा- क्या हुआ आपको.. आप कुछ भी बातें नहीं कर रही हो?
उन्होंने थोड़े गुस्से से कहा- तुम अभी मुझे गेट पे जाकर रुकने के लिए क्यों कहा।

मैंने भी उनको समझाया.. अगर आपको और मुझे एक साथ कोई देख लेता तो लोग हमारे बारे में कुछ भी उल्टा-सुल्टा बोलते।

इस पर उन्होंने कहा- पर हम तो सिर्फ खाना खाने जा रहे हैं तो इतना क्यों सोचने का?
तो मैंने कहा- हाँ वो तो सब सही है.. पर लोग इसी बात को ज्यादा नहीं समझते वो तो बस बातें करने लगते हैं। मुझे इस बात से कोई भी दिक्कत नहीं होती, पर आप तो मैरिड हैं और मैं नहीं चाहता कि मेरे वजह से आपको कुछ प्रॉब्लम हो।
तभी वो समझ गईं और कहा- ओके, तुम ठीक कह रहे हो।

फिर हम एक वेज होटल में गए, वहाँ हम दोनों ने पहले सूप पिया.. थोड़ा स्टार्टर वगैरह खाया फिर खाना मंगवा लिया। खाने के बाद आते टाइम आईसक्रीम और मिल्कशेक पिया।
भाभी बहुत खुश हो गईं और उन्होंने कहा- तुम्हारी गर्लफ्रेंड तो तुम से बहुत ही इम्प्रेस होती होगी?
मैंने कहा- मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.. पर सहेलियां हैं.. वो बहुत खुश रहती हैं।
भाभी ने कहा- हाँ वो सब लकी होंगी।
तो मैंने भी कहा- क्यों?
तो उन्होंने कहा- आज का डिनर तुमने जिस तरीके से मुझे ट्रीट किया.. उससे लगा।
मैंने पूछा- आपका कॉलेज टाइम में बॉयफ्रेंड था?
तो उन्होंने कहा- नहीं.. मैंने अरेंज मैरिज की है।

फिर भाभी ने अपने बारे में बताना चालू किया। उनकी बातों से तो लगा कि वो अपने पति से बहुत प्यार करती हैं।
मैंने भी उनसे उनकी लाइफ के बारे में और पूछा तो उन्होंने कहा- थोड़ी देर कहीं रुको ना.. बैठ कर बातें करते हैं।
मैंने एक छोटी से टी-स्टाल पर बाइक रोकी और हम चाय पीते-पीते बातें करने लगे।

फिर भाभी ने मुझसे कहा- दीप सच में तुम बहुत क्यूट हो.. मेरी और तुम्हारी पहचान हुए अभी सिर्फ 4 घंटे हुए हैं.. पर ऐसा लगा कि हम पुराने दोस्त हों।
तो मैंने कहा- हाँ भाभी मेरी आदत ही है.. मैं जल्दी मिक्स-अप हो जाता हूँ।

अब उन्होंने मुझे मेरी उम्र पूछी, मैंने कहा- अभी 27 का हूँ.. क्यों?
तो उन्होंने कहा- अरे तुम तो मेरे से बड़े हो.. तो प्लीज़ मुझे सिर्फ सुनयना कहो ना.. मुझे अच्छा लगेगा।
तो मैंने उनसे पूछा- आपकी कितनी उम्र है?
तो उन्होंने कहा- बस 24 की हुई हूँ।
मैंने कहा- हाँ ये तो बात बराबर है।

फिर और हम दोनों हँसने लगे।

अब मैंने भाभी से आप से तुम पर आते हुए पूछा- तुम मुझे दोस्त मानती हो तो मुझे एक सच बात बताओ.. तुम अपने पति से सच में खुश हो?
तो भाभी ने थोड़ा दुखी होके कहा- मैं अपने पति को बहुत पसंद करती हूँ। वो भी मुझे बहुत लाइक करते हैं.. पर उनके जॉब की वजह से हम दोनों मजबूर हैं।
इतना कहकर भाभी चुप हो गईं।

मुझे लगा कि वो आगे भी बहुत कुछ कहना चाहती थीं।
मैंने भी उनसे कहा- तुम मुझे अपना दोस्त मानती हो तो प्लीज़ खुल के बोल सकती हो।

कहानी अगले भाग में आप पढ़ेंगे कि कैसे मैंने सुनयना भाभी को चोदा… भाभी की चुदाई की कहानी रसीली होने वाली है, आप अपने मेल कीजिएगा।
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