मेरे दोस्त की पत्नी और हम तीन-2

(Mere Dost ki Patni Aur Hum tean- Part 2)

This story is part of a series:

दोस्तो, कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि अब तक मैं और नीलम काफ़ी हद तक एक दूसरे करीब आ चुके थे और समझने लगे थे कि हम दोनों कहाँ तक जा सकते हैं।
अब आगे…

गाड़ी मोहित के घर के दरवाजे के सामने रुक चुकी थी लेकिन मैं और नीलम आज रात के अजीब से आनन्द की कल्पना में किसी अलग दुनिया में खोए हुए थे।
तभी मोहित की आवाज ने हम दोनों को कल्पना की दुनिया से बाहर निकाला और कहा कि पार्टी गाड़ी में नहीं, घर में है मेहमान लोगो … घर आ गया उतर जाओ।
मैं थोड़ा झेंप गया और कहने लगा- यार मोहित, भाभी ने आज थका दिया तो झपकी सी आ गई। वैसे लेडीज लोगो की शॉपिंग हम मर्दों के बस की बात नहीं है।
यह सुनकर भाभी थोड़ा मुस्कुराई और बोली- लेडीज लोगों की बहुत सी ख्वाहिशें पूरा करना हर किसी के बस की बात नहीं है सरस बाबू!

और यह कहते हुए नीलम घर के अंदर दाखिल हो गई। शायद ये एक ताना था पता नहीं किसके लिए मेरे लिए या मोहित के लिए। हम दोनों ही नीलम की इस बात पर बिना प्रतिक्रिया देने अंदर चले आए।

मैं अभी तक यही सब सोच रहा था कि मोहित और नीलम के बीच सब कुछ ठीक है तो नीलम ये सब क्यों कर रही है, वो क्यों मेरे करीब आने की कोशिश कर रही है। मोहित और नीलम दोनों ही बहुत खूबसूरत थे। मेरे मन में ढेर सारे सवाल थे लेकिन जवाब एक भी नहीं बस मैं कल्पना कर सकता था कि कहीं ऐसा तो नहीं, कहीं वैसा तो नहीं!
मैं ये सोचकर मोहित के लिए थोड़ा दुखी था।

हम दोनों दोस्त बैठकर बातें करते रहे और नीलम खाना बनाने लगी। वक़्त निकलता जा रहा था, रात के 10 बज चुके थे। खाना भी तैयार हो चुका था। नीलम मोहित को खाना टेबल पर लगाने की कहकर खुद तैयार होने चली गई। मैंने और मोहित ने मिलकर खाना लगाया और नीलम का इंतजार करने लगे।

नीलम नहाकर, खुद को बेहतरीन तरीके से सजाकर हम दोनों के सामने खड़ी थी। लाल रंग की सिल्क साड़ी, गहराई तक कटे हुए गले और स्ट्रिप ब्लाउज़ जिस नीलम के 32 के बूब्स बाहर आकर कहर ढा रहे थे।
हम दोनों ही उसे बस देखते ही रह गए।
तभी मोहित मुझे बोला- सरस … भाभी है तुम्हारी … शर्म करो।
“मोहित तुम चाहे बुरा मानो या भला … लेकिन भाभी है बहुत खूबसूरत … मैं भाभी की खूबसूरती को आज ही समझ पाया हूं और मेरी पत्नी के लिए मैं भाभी जैसी ही लड़की पसंद करूंगा.” मैंने मोहित को कहा।

इस बात पर मोहित और नीलम दोनों हंस दिए और नीलम बोली- तुम्हारे लिए बीवी खोजने की जिम्मदारी मेरी।
मैंने मुस्कुराकर नीलम को समर्थन दिया- हाँ, मुझे बिल्कुल तुम्हारी ही कॉपी ही चाहिए!

एक बात यहां पर कहानी से थोड़ा अलग हटकर में आप लोगों से कहना चाहूंगा दोस्तो कि मेरी पिछली कहानी ‘मेरे सामने वाली खिड़की में’ को पढ़कर पुणे से मेरे पास एक पाठिका का मेल आया बाद में उन्होंने मुझे अपनी फोटो भेजी। काश वो अविवाहित होती तो मैं उनसे शादी कर लेता। जैसा मैंने अपने सपनों में कल्पना की वैसी ही एकदम वो थी। शायद मेरी ये कहानी भी वो पढ़ेंगी और अबकी बार भी मुझे उनके प्यार का इंतजार रहेगा।
हम दोनों के लिए दुआ कीजिएगा दोस्तो … कि शादी ना सही लेकिन हम एक बार मिल सकें।

चलिए वापस कहानी पर चलते हैं …

महफल जम चुकी थी, मेज पर शराब और खाने का पूरा इंतजाम था। मैं एकदम शाकाहारी हूं, यह बात नीलम और मोहित अच्छी तरह जानते थे और नीलम ने इस बात का पूरा ध्यान रखा था।
मोहित और नीलम एक साथ बैठे हुए थे और मैं मेज के दूसरी तरफ नीलम के ठीक सामने बैठा हुआ था।
खाना शुरू हुआ। अचानक नीलम ने अपने पैर से मेरे पैर को छुआ और बोली- खाना अच्छा नहीं लगा क्या सरस? चुपचाप खाए जा रहे हो, कुछ बोले नहीं?
“नहीं भाभी, खाना बहुत अच्छा है बिल्कुल आपकी तरह नशा करने वाला!” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।
“भई वाह … क्या तारीफ की है खाने की!” मोहित बोला और हम सब हंसने लगे।

बातें तो अच्छी बनाते हो सरस बाबू… इन बातों से किसी लड़की को अपना बना क्यों नहीं लेते। आपका अकेलापन भी खत्म हो जाएगा.” नीलम बोली।
“मैं बातें बनाता नहीं भाभी, बस खूबसूरती देखकर खुद ही मेरी जबान से निकाल जाती हैं. और रही बात लड़कियों की तो मुझे उनसे बातें करना ही नहीं आता. क्या करूँ?” मैंने नीलम की आंखों में गहराई तक देखते हुए कहा।

मोहित अब तक ज्यादा ही पी चुका था और उस पर नींद अपना हक जताने लगी थी। मैंने मोहित को सहारा देकर उसके बिस्तर तक पहुंचाया और सुला दिया और वापस खाने की मेज पर आ गया। तब तक नीलम भी अपना खाना खत्म कर चुकी थी और मुझसे कहने लगी- सरस तुम खाओ, मैं अभी आती हूं।
“नहीं भाभी, मेरा हो गया बस!” मैंने कहा।
“इतनी जल्दी हो जाएगा तो कैसे रात निकलेगी बाबू? जो भी खाने को मिले पेट भर कर खाओ!” नीलम बोली।

अबकी बार नीलम की कही बात में से सरस नाम गायब था और उसकी इस दो अर्थ वाली बात का मतलब मैं समझ गया था। मैं मुस्कुरा दिया और नीलम की बात के जवाब में कहा- अच्छे से पेट भरकर खाने के लिए कभी कभी उपवास जरूरी होता है भाभी जी!
और मैं उनके करीब चला गया। मैंने नीलम को उसकी कमर से पकड़ लिया और अपने पास खींच लिया। अब हम दोनों ही एक दूसरे के दिल में उठते हुए जज्बातों के साथ गर्म साँसों को महसूस कर सकते थे।

नीलम की साँसों के साथ उठते और गिरते 32″ के उभार मुझे और भी मदहोश करते जा रहे थे। धीरे धीरे हम दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठों से जा मिले और हमारे रिश्ते को स्वीकृति मिल गई। मैं और नीलम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे जो धीरे धीरे बेतहाशा चुम्मन और प्यास में बदल गया। नीलम के होंठों और जीभ को चूमते चूमते मेरे हाथ भी अब नीलम की 32″ के कूल्हों का नाप लेने में लगे थे और उनकी कठोरता को परख रहे थे।

मैंने नीलम को पास ही के सोफे पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके सुर्ख होंठों को चूमता जा रहा था, उसकी जीभ का रसपान किए जा रहा था। मेरे हाथ उसकी जांघों पर और उसके बूब्स पर थे। मैं उसकी जांघों को सहलाए जा रहा था और उसके बूब्स को दबाए जा रहा था। उसकी सिल्क की साड़ी अब अस्त-व्यस्त हो चुकी थी और लगभग हर जगह से खुल चुकी थी। मैं लगातार नीलम का मर्दन किए जा रहा था।

“सरस आराम से प्लीज!” लगभग दस मिनट के घमासान के बाद नीलम बोली और मेरी आंखों में देखने लग गई।

मैंने उसे गले से लगा लिया और उसके ब्लाउज की स्ट्रिप को खोल दिया। नीलम अब और भी ज्यादा मुझसे चिपक गई थी। मैंने हम दोनों के बीच से ब्लाउज को हल्के से अलग किया और अब मैं नीलम के दूधिया सफेद कबूतरों को अपने सीने में गड़ते हुए महसूस कर रहा था।
यह एक सुखद एहसास था। आप भी इस सुख का अनुभव कर सकते हैं दोस्तो ये सोचकर!

हम दोनों आपस में गुंथे पड़े थे और एक दूसरे को चूमते जा रहे थे। हमारी भावनायें उछल कर बाहर आ गई थी। अब तक मैंने नीलम के शरीर से उसकी ब्रा को अलग कर दिया था, उसके सफेद कबूतर पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में आ चुके थे। मेरा दूसरा हाथ नीलम के पेटीकोट के अन्दर उसकी जांघों की चिकनाई और चूत की गहराई नापने का काम बखूबी निभा रहा था।
मैं नीलम के बूब्स को जोर से दबा रहा था और उसके निप्पलों को अपने होंठों से चूस रहा था। कभी कभी नीलम के निप्पल मेरे होंठों की गिरफ्त में इतने मजबूर हो जाते कि मेरे होंठों के दबाव को सहन नहीं कर पाते और नीलम के मुंह से एक आनन्द की सिसकारी निकल जाती जो मुझे मुझे कहती कि ‘हाँ सरस … जोर से चूसो, बहुत आनंद है तुम्हारे होंठों के इस स्पर्श में!’

नीलम के गुलाबी होंठों का रसपान करते करते मैंने अपनी दो उंगली नीलम की चूत में ठेल दी और मैंने देखा कि उसकी चूत तो आनंद रस में इतनी मस्त हो गई थी कि उसने मेरे पूरे हाथ को भिगो दिया था।
उंगली अंदर जाते ही नीलम चिहुंक उठी और अपके कूल्हे उचकाकर मेरा स्वागत किया। नीलम के मुंह से मादक सिसारियां निकाल रही थी। पूरा कमरा उसके मुंह से निकालने वाली ‘अहहम एम एम आह्ह ओहम म्महह आह्हआह …’ की वासनायुक्त सिसकारियों से गर्म हो रहा था और मेरी गर्दन और सीने पर उसकी गर्म सांसें मुझे जलाने के लिए तत्पर थी।

मैंने अपनी जीभ को नीलम के मुंह में अन्दर घुसा दिया और वो मेरी जीभ को चूसने लगी। कभी वो मेरी जीभ चूसती कभी मैं उसकी। मेरी उंगलियां उसकी चूत की गहराई नापने में व्यस्त थी और चूत की चुदाई कर रही थी।
नीलम कुछ बोल नहीं रही थी लेकिन मुझे अपने बाहुपाश से निकालने का कोई अवसर भी नहीं दे रही थी। अचानक वो कसमसाई और मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। उसकी चूत से लावा बह निकला। वो झड़ गई थी।

मैंने अपना हाथ उसके पेटीकोट से निकाला और सारा रस उसके पेट और बूब्स पर लगा दिया। वो अपनी सांसों को समेटने में लगी थी और मैं उसे।
उस वक़्त नीलम के चेहरे को देखकर मैंने महसूस किया कि जब एक औरत को संतुष्टि की प्राप्ति होती है तो कैसे उसके चेहरे के भाव बदलते हैं।

कहानी जारी रहेगी दोस्तो! आप मुझे अपने बेशकीमती सुझाव भेजना मत भूलिए. और एक निवेदन मैं अपनी पाठिकाओं से करना चाहता हूं कि बहुत सी मेरी पाठिकायें कहानी पढ़कर अपने सुझाव नहीं देती हैं इसलिए प्लीज आप भी अपने सुझाव दिया करिए ताकि आपकी चूत की सेवा में मेरा लन्ड बेहतर कहानियां लिख सके।

मेरा ई मेल आई डी है [email protected]

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