होली पर देसी भाभी की रंगीन चुदाई-2

(Holi Per Desi Bhabhi Ki Rangin chudai- Part 2)

मेरी भाभी के साथ सेक्स की कहानी के पहले भाग
होली पर देसी भाभी की रंगीन चुदाई-1
अब तक आपने पढ़ा था धर्मेन्द्र भैया की पत्नी भावना भाभी ने कल रात मेरे लंड को चूसा था, जिससे मुझे आज भाभी की पूरी चुदाई की सम्भावना दिखने लगी थी. आज होली के अवसर पर भाभी मेरे साथ थीं. मैंने देखा कि भाभी के पूरे शरीर पर भैया ने खूब रंग लगाया. जिसे देख मैंने भाभी से पूछा कि अब मैं किधर रंग लगाऊं.. तो भाभी हंसने लगीं.

मैंने कहा- भाभी अब मैं अपने लंड पर रंग लगा कर आपकी चूत में अन्दर रंग लगाऊंगा.
यह बोल कर मैं उनकी चुत को अपनी उंगली से मसलने लगा और मैंने अपना लंड उनके हाथ में दे दिया. वो भी कैपरी के ऊपर से ही लंड मसलने लगीं.
अब आगे:

मैं चुत चूसने का बहुत ही शौकीन हूँ, तो मैं अब उनकी चुत चूसने लगा. चूत चुसाई हुई तो अब भाभी भी जोरदार अंगड़ाई लेने लगीं. मैं सुपुड़ सुपुड़ करके भाभी की चुत चूसने लगा. मैंने अपनी जुबान से उनकी चुत का दाना भी खींचते हुए चूस दिया, इससे वो बिलबिला उठीं.

फिर मैंने अपनी कैपरी उतारी और भाभी के ऊपर चढ़ गया. अपना लंड भाभी की चुत पर सैट किया. मैं लंड अन्दर करने ही वाला था कि भाभी बोलीं- नहीं अमित अभी मत चोदो, तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ. तुम्हारे भैया उठ जाएंगे तो गड़बड़ी हो जाएगी. आज रात को जो मन हो, मेरे साथ वो कर लेना. चाहो तो मुझे पूरी रात चोद लेना.

मैं उनके बोबे मसलता हुआ बोला- पर रात में तो भैया ही आपको नहीं छोड़ते. मेरा नम्बर कहां लगेगा?
भाभी बोलीं- रात को तुम उन्हें ज्यादा दारू पिला देना और मैं तुम्हें नींद की गोली दूंगी, तो वो तुम उनकी दारू में मिला कर उन्हें पिला देना. फिर मुझ पर तुम्हारा ही राज होगा.
मैं बोला- पर मैं अभी नहीं रुक सकता एक बार तो अन्दर आ ही जाने दो.
ये बोल कर मैंने लंड का सुपारा अन्दर कर दिया.

फच से लंड चूत में घुस गया.
“आआईई ईई … अमित …” करके भाभी ने मुझे झटके से अपने से अलग किया और खड़ी हो गईं.
ये तो मेरे साथ खड़े लंड पर धोखा था, तो मैंने उन्हें फिर से दबोच लिया और उनके मम्मों को मसलने लगा.
मैं बोला- एक काम कर दो भाभी, तुम अभी मेरा लंड चूस कर शांत कर दो, चुत रात में चोद लूँगा.
वो बोलीं- नहीं.. मुझे लंड चूसना पसंद नहीं है.
मैं बोला- नाटक मत करो यार, कल रात को तो तुमने मेरा लंड आगे आकर चूसा था.

वो कुछ नहीं बोलीं, तो मैंने उन्हें अपने लौड़े के नीचे बिठा कर अपना लंड उनके मुँह में दे दिया. भाभी भी चुपचाप लंड चूसने लगीं, वो लंड चूसने में बहुत ही एक्सपर्ट थीं, तो कुछ ही टाइम में उन्होंने मेरी आहें निकाल दीं.
वो मूऊऊ.. आआह.. ऊऊऊमूऊउ.. मूऊ..’ करके पूरा लंड अन्दर बाहर कर रही थीं.

अब मैं भी जोश में आ गया था, तो मैंने भी उनके बाल पकड़ कर जोर जोर से लंड को भाभी के मुँह में अन्दर बाहर करना चालू कर दिया. मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं भाभी के मुँह को ही उनकी चुत समझ कर धक्के देने लगा.

बस कुछ ही धक्कों में ‘आआह ऊऊह.. आअह..’ करके मैंने सारा पानी उनके मुँह में भर दिया. उन्होंने लंड बाहर निकालने की कोशिश की, पर मैं भी बहुत बड़ा चोदू हूँ, तो मैंने भी भाभी की मुंडी कसके पकड़ ली और उनको सर हटाने ही नहीं दिया. मजबूरन भाभी को मेरे लंड के रस की आखिरी बूंद तक पीनी पड़ी.

अब भाभी बोलीं- अमित, तू तो बहुत बड़ा हरामी है. तूने मुझे इतनी सी देर में ही मुझे थका दिया. रात में तो तू पता नहीं क्या करेगा.
मैं बोला- रात में तो तुम्हारे सारे टाँके तोड़ दूंगा.
वो भी मस्तानी आवाज में बोलीं- सच में बहुत दिन बाद कोई इतना बड़ा चोदू मिला है. वो तो तेरी दिन भर की छेड़ छाड़ से ही मैं समझ गई थी कि तू कच्चा खिलाड़ी नहीं है. चल रात में देखते हैं, कौन किस पर भारी पड़ता है.

भाभी ने अपने कपड़े ठीक किए और नीचे चली गईं. मैं वहीं बाथरूम में बैठ कर सोचने लगा कि अब रात कैसी होगी. फिर मैं अपनी थकान दूर करने के लिए नहाने लगा.

जब मैं नीचे गया, तो मैंने देखा भैया तो घोड़े बेच कर सो रहे थे. भाभी भी सोफे पर लेट कर भैया की फुल चुदाई और मेरी हाफ चुदाई की थकान उतार रही थीं. मैं भी अन्दर रूम में जा कर लेट गया और थकान के कारण सो गया.

दोस्तो, ये था होली का दिन और आज की रात तो और भी मस्त होने वाली थी.. क्योंकि यहां दो चुदक्कड़ मिल चुके थे. भैया भी बहुत बड़े चुदक्कड़ थे, पर फिर भी भाभी बहुत ही चंचल और कुछ नया करने की शौकीन थीं.

होली पर दिन में भाभी के साथ लंड चुसाई की मस्ती के बाद मुझे बस अब रात का इंतजार था. जब दिन इतना उत्तेजक था, तो रात कितनी कामुक होगी … यही सोच कर मेरा लंड उफान मार रहा था.

शाम को भैया बोले- अमित चल रात के लिए दारू ला कर रख लेते हैं.
मुझे भाभी के साथ रात का प्रोग्राम फिक्स करना था, तो मैंने उन्हें कह दिया- आप ही ले आओ भैया, मैं जरा थकान सी महसूस कर रहा हूँ, तो आराम कर लेता हूँ.

भैया मार्किट के लिए निकल गए, तो मैं जल्दी से भाभी के रूम में आ गया, जहां भाभी उल्टी लेटी हुई थीं और मस्त लग रही थीं. मैं सीधा उन के ऊपर जा कर लेट गया. मैं उनके कान की लौ को चूमते हुए पूछने लगा- भाभी रात का क्या प्रोग्राम है? भैया भी रहेंगे तो मैं आपकी चूत कैसे मारूँगा?

भाभी बोलीं- देवर जी, आपके भैया को थोड़ी जम कर पिला देना, तो वो रात भर नहीं उठने वाले और कोई रिस्क ना हो इसके लिए में आपको नींद की गोलियां भी दे दूंगी, आप वो भी उनके दारू के गिलास में मिला कर पिला देना.

मुझे याद आ गया कि सुबह भी भाभी ने यही कहा था. मुझे उनकी बात से अपनी चुदाई की कहानी जमती हुई महसूस होने लगी. मैंने भाभी के कान की लौ और मस्त तरीके से चूसने लगा. इससे भाभी कान की चुसाई से उत्तेजित हो गईं. वे भी पलट कर मेरे होंठ चूसने लगीं.
मेरा मन तो कर रहा था कि अभी भाभी की चुत में गोते लगा लूँ, पर भैया कभी भी आ सकते थे, तो मैंने मन मार कर भाभी को छोड़ दिया.

रात में तय प्रोग्राम अनुसार धर्मेंद्र भैया को मैंने जम कर दारू पिला दी और उनके गिलास में चुपके से नींद की गोली भी डाल दी थी. वो 11.30 बजे ही लुढ़क गए. मैंने तसल्ली के लिए भैया को हिलाया और कहा- भैया उठो न अभी तो और पीना है.
लेकिन उनका कोई उत्तर नहीं मिला तो मैंने भाभी को आवाज लगाई- भाभी जान, अपने रूम से बाहर आ जाओ, भैया सो गए हैं.

भाभी अपने नाईट गाउन में आईं. उनके चूचे वैसे ही 32 साइज़ के हैं और उन्होंने अन्दर ब्रा भी नहीं पहन रखी थी.. जिससे उनके तने हुए मम्मे उछले जा रहे थे.

भाभी मेरे पास आ कर बैठ गईं और बोलीं- देवर जी पहले मेरे लिए भी एक पैग बनाओ. मुझे नहीं लगता आज रात तुम मुझे सोने दोगे, तो आज मैं भी थोड़ी पी लेती हूँ.
मैंने उन्हें एक पैग बना कर पिलाया और उन्हें अपनी बांहों में खींचने लगा.
वो बोलीं- अरे देवर जी, इतनी जल्दी क्या है, मैं आपको बताती हूँ कि क्या करना है और कैसे करना है.

मैंने उनकी तरफ सवालिया निगाह से देखा.
तो भाभी ड्रामाई अंदाज में कहने लगीं- आप ऐसा मान लो कि हमारी कोई सैटिंग नहीं हुई है और तुमने मुझ पर गलत नजर रख कर अपने भैया को नींद की गोली देकर सुला दिया है. अब तुम्हें मेरे साथ जबरदस्ती सेक्स करना है.
मैं भी लंड सहलाता हुआ बोला- ठीक है मेरी जाने बहार … आपका हुकुम मेरे सर माथे.

भाभी ने एक्टिंग शुरू कर दी- देवर जी, आज इन्होंने ज्यादा पी ली है क्या? चलो, इन्हें अन्दर रूम तक ले जाने में जरा मेरी मदद करो.

अब भैया को हमने दोनों तरफ से पकड़ कर उठाया और चलने लगे. पर मैंने भाभी को थोड़ी दूर जाकर ही पकड़ लिया और भैया को वहीं पड़े दीवान पर लिटा दिया.

भाभी- अमित ये क्या कर रहे हो तुम? छोड़ो मुझे.. वरना मैं चिल्लाऊंगी.. तुम अपने भैया को दारू पिला कर मेरे साथ ये सब करोगे?
अब तक मैं अपना आपा खो चुका था. मुझसे इंतजार नहीं हो रहा था, एक तो दारू का नशा.. ऊपर से भाभी को चोदने का जुनून.
मैंने भाभी के मम्मों को उनकी मैक्सी के ऊपर से ही मसल दिया और उन्हें कसके पकड़ने लगा.

पर वो मुझे धक्का देकर रूम की ओर भागीं. मैं उनके पीछे पीछे … वो आगे आगे … भागते भागते कभी रूम में, कभी हॉल में … फाइनली भाभी अपने रूम का दरवाजा बन्द ही कर रही थीं कि मैंने उन्हें धकेल कर पकड़ लिया.

अब मैं अपनी औकात पर आ गया था. मैंने उनके बाल कस कर पकड़ लिए और उन्हें अपने से सीने चिपका कर दूसरे हाथ से उनकी मैक्सी फाड़ दी. फिर उन्हें नीचे गिरा जोर जोर से उनके मम्मों को चूसने लगा. ऐसा लग रहा था कि सही में मैं उनका बलात्कार कर रहा हूँ.

अब भाभी भी उत्तेजित होकर ‘शीईईईई उईईई.. आह ओऊऊ..’ करने लगीं. मैंने जोश में उसके एक बूब को काट भी लिया.

मुझसे ज्यादा कंट्रोल नहीं हो रहा था, तो आनन फानन में मैंने भाभी की चड्डी भी निकाल दी. बस फिर आव देखा न ताव.. और एक झटके में भाभी की नंगी चूत में लंड पेल दिया. लंड चूत के अन्दर जाते ही भाभी भी नीचे से झटके मारने लगीं और मैं भी तबियत से उन्हें ठोक और मसल रहा था.

चुदाई करवाते करवाते उन्हें भी ना जाने क्या सूझी कि मुझे धक्का देकर फिर से भागने लगीं.

मैंने फिर से उन्हें पकड़ लिया और दुगने जोश से फिर से लंड चुत में पेल दिया. अब मैं जानवरों की तरह उन्हें चोदने लगा. पूरे कमरे में ‘फच फच..’ और ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… उईईई उह आह.. हां देवर जी.. ऐसे ही हां और जोर से..’ की आवाजें गूंजने लगीं.

फिर मेरे लंड के झटकों की रफ्तार बढ़ती गई. उनके नाखून भी मेरी पीठ पर गढ़ गए और हम दोनों का लावा बाहर हो गया.

अब फिर हम बैठ कर बियर पीने लगे. चुदाई का दूसरा दौर चला, तो अबकी से भाभी ने मोर्चा संभाला और मेरे लंड के ऊपर जम कर कूदीं.

इस औरत में इतना सेक्स भरा था कि रात भर में 4 बार चुदने के बाद भी भाभी सुबह सुबह अपने पति का लंड चूसने लगीं. पर जब भैया नहीं उठे तो मेरा लंड चूसने लगीं. मैं भी थक चुका था, तब भी मैंने दारू की बोटल मुँह से लगा कर नीट खींची और भाभी की चूत पर पिल पड़ा.

कुछ ही देर में भाभी भी पस्त हो चुकी थीं. वे मेरे लंड की सर्विस से पूरी तरह से खुश थीं.

उसके बाद तो जब भी भाभी मुझे किसी भी प्रोग्राम, त्यौहार पर मिलीं, हम दोनों में हमेशा चुदाई तो हुई ही.. और लंड चुसाई का मजा भी मिला.

दोस्तो, ये थी मेरी सेक्स कहानी. आप अपने विचार मुझे ईमेल पर दे सकते हैं.
आपका अमित दुबे
[email protected]

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