चचेरे भाई की पत्नी को चोदा

(Chachere Bhai Ki Patni Ko Choda )

मेरा नाम रोहन है, मैं गोंडा का रहने वाला हूँ. यह कहानी मेरी और मेरी मंजरी भाभी की है जिनको मैंने चोदा है. मंजरी भाभी मेरे एक चचेरे भाई की पत्नी हैं, वो मुझसे सैट हो चुकी थीं लेकिन चुदाई का सही मौक़ा नहीं मिल रहा था और मैं उनको चोदने की फिराक में था.
उस दिन सोमवार था, उस दिन का मौसम कुछ सुहावना था. मैंने करीब 10 बजे भाभी को फ़ोन किया तो पता चला कि वो घर पर अकेली हैं. उस दिन मेरा फुल चुदाई का मूड था. मैं तुरंत अपनी बाइक से भाभी के घर पहुंच गया. वो खाना बना रही थीं, खाना बना कर वो मेरे लिए शरबत बना लाईं. फिर वो मेरे पास बैठ कर बात करने लगीं.

आज भाभी बहुत हॉट लग रही थीं. उनसे कुछ इधर उधर की बात करने के बाद मैंने भाभी से पूछा- अब आप बताओ आपके उधर का क्या हाल चाल है?
वो बोलीं- मेरा हाल तो आप समझ ही सकते हो?

यह कह कर वो मेरे पास सरक आईं, मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर अपनी जांघों को मेरी जांघों से सटा दिया. जब मैंने उनकी ओर देखा तो भाभी ने मेरी और देख कर शर्मा कर अपनी आंखें झुका लीं.
मैंने भाभी को अपनी तरफ खींच कर बारी बारी से उनकी दोनों आंखों को चूम लिया. उनके पूरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई और वो मुझसे लिपट गईं.

मैंने अपने होंठ भाभी के होंठ से लगा दिए. भाभी ने भी मेरे अधरों को पूरे जोर से चूसना शुरू कर दिया. अब मैं उनकी चुचियों को सहलाने और दबाने लगा. कुछ ही देर में उसकी कामवासना से भरी सिसकारियां निकलनी शुरू हो गईं.

मैंने दूसरे हाथ से उन पर पीछे लेटने के लिए दबाव बनाया तो उन्होंने कहा- रूको!
मैंने उनकी तरफ प्रश्नवाचक नज़रों से देखा तो वो बोली- यहाँ नहीं, बेड रूम में चलते हैं.
हम दोनों उठ कर खड़े हो गए और बेडरूम में चले गए.

बेडरूम में मैंने उनके कपड़े उतारने शुरू कर दिए, पहले भाभी की साड़ी उतारी, फिर ब्लाऊज़ खोला और पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया. पेटीकोट उनके पैरों में गिर कर रोने लगा. भाभी का ब्लाउज़ भी उनकी बांहों में अधमरा सा झूल रहा था, मैंने उसे भी उतार दिया.

अब भाभी आसमानी रंग की पेंटी और उसी रंग की ब्रा में बहुत सेक्सी लग रही थीं. उनके 36 साइज़ के स्तनों के नीचे उनका गदराया हुआ पर सपाट पेट, जिस पर नाभि भी ऊपर को उभरी हुई दिख रही थी.. और नीचे करीब 40 साइज़ के कूल्हे भाभी को बहुत सेक्सी बना रहे थे.

वो इस समय टू पीस में बिल्कुल ऐसे ही दिख रही थीं जैसे खजुराहो को कोई मूरत हों.

अब फिर से मैंने भाभी के होंठ चूसने शुरू कर दिए. कभी मैं ऊपर वाला चूसता, कभी नीचे वाला.. और कभी मैं अपनी जीभ भाभी के मुँह में डाल देता था. कभी वो अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल कर अच्छे से घुमाते हुए मजा ले रही थीं.
मैं भाभी की जीभ की नर्मी और गर्मी दोनों को ही महसूस कर रहा था. उनके मुँह का स्वाद मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था.. मीठा या नमकीन था, मैं नहीं कह सकता, पर इतना ज़रूर है कि वो स्वाद मुझे बहुत अधिक मस्त कर रहा था. मेरे जोश को दोगुना चौगुना बढ़ा रहा था. मुझे लग रहा था जैसे मेरी जीभ और लंबी होती तो मैं उनके गालों को भी अन्दर की तरफ से चाटता.

लगभग 3-4 मिनट तक हमारी यह किस चली और जब मेरा मुँह थक गया और सांस भारी हो गईं तो मैंने एक मिनट के लिए अपना मुँह उनके मुँह से दूर किया.. और एक लम्बा सांस लिया.

फिर मैं अपने हाथ को भाभी की पीठ पर दोबारा से ले गया और फिर से उनके होंठ चूसते हुए पीछे से उनकी ब्रा भी खोल दी, जो ढीली होकर भाभी के बाजुओं में झूल गई.

मैंने धीरे से उनकी ब्रा उतारी और भाभी को पीछे की ओर धकेल कर बेड से लगा दिया. जैसे ही उनकी टाँगें बेड से टकराईं तो मैंने उन्हें आंख से इशारा किया और थोड़ा सा और पीछे को धक्का मार कर बेड पर बैठा दिया. अब फिर से मैंने भाभी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया. पर इस बार 10-15 सेकंड तक चूसने के बाद अपने होंठों को मैं उसके गाल और फिर कान के नीचे ले गया.. और जैसे ही मैंने वहाँ पर अपनी जीभ फेरी, तो मंजरी भाभी के मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकल पड़ी और उन्होंने भी मुझे कस कर भींच लिया.

इसके बाद भाभी ने भी मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए और जैसे ही सारे बटन खुले, मैंने शर्ट उतार कर साइड टेबल पर रख दी. फिर उन्होंने मेरी पेंट की बेल्ट खोल कर हुक भी खोल दिया और ज़िप भी खींच दी, तो मैंने पेंट भी उतार कर वहीं पर रख दी.

बनियान मैंने खुद ही उतार दी. अब मैं अपने अंडरवियर में.. और वो पेंटी में थीं.

करीब 8-10 मिनट तक एक दूसरे को चूमने चाटने के बाद मैंने भाभी को बेड पर सीधा लिटा दिया. मैं उनके पैरों की तरफ आ गया और उनकी पिंडली के बिल्कुल नीचे वाले हिस्से को चूसना शुरू कर दिया. यह बहुत सेंसेटिव जगह होती है, जैसे ही मैंने वहाँ पर जीभ फेरी और चूसना शुरू किया, मंजरी भाभी उत्तेजना के मारे एकदम छटपटा गईं और उनकी टाँगों पर पूरे रोंगटे खड़े हो गए.
वो एक सिसकारी भरते हुए एकदम से मुझे बोलीं- हाय.. ऐसे मत करो ना, मुझे गुदगुदी होती है.

मगर मैंने उन्हें छोड़ा नहीं और धीरे धीरे चूसते हुए ही ऊपर की ओर आने लगा. फिर सीधे हाथ की पहली उंगली भाभी की योनि में डाल दी. उंगली डालते ही पता चला कि उनकी योनि अन्दर से बहुत गर्म थी और गीली भी.

मेरी एक उंगली भाभी की योनि में ऐसे घुसी जैसे मक्खन में गर्म छुरी घुस गई हो. मैं धीरे धीरे चाटते हुए ऊपर की ओर बढ़ रहा था, जैसे ही मैं उनके भरे हुए कूल्हे तक पहुँचा, मैंने उनके कूल्हे के माँस को मुँह में भर लिया और चूसने लगा. उधर मेरी उंगली पहले की तरह ही अपना काम जारी रखे हुए थी, उसे मैं कभी आगे पीछे चलाता और कभी गोल गोल घुमाता जा रहा था.

भाभी के मुँह से निरंतर कामुक सिसकारियां निकल रही थीं. कहीं ना कहीं थोड़ी सी झिझक थी, पर इस बार मैं मानसिक रूप से पूरी तरह से तैयार था.

जैसे ही वो पलटीं, मैंने फिर से दोनों उंगलियां अन्दर डाल दीं और थोड़ा सा ऊपर होकर उनके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया.

भाभी के करीब 36 साइज़ से स्तन.. उन पर ब्रा का निशान अलग से चमक रहा था. गुलाबी रंग के कुंवारी लड़कियों जैसे निप्पल और एक रुपये के सिक्के के साइज़ का हल्के गुलाबी रंग का एरोला, पतली कमर करीब.. लगभग 30 या 31 इंच की.. नीचे चौड़े होते हुए कूल्हे दोनों जाँघों के जोड़ पर स्वर्ग का दरवाज़ा. वो भी कुँवारी लड़कियों की तरह एक चीरा ही दिख रहा था, एकदम फूली हुई कचौरी की तरह से थी. उस पर तुर्रा यह कि भाभी के जंगल की सफाई भी आज ही की हुई लग रही थी. शायद कोई बढ़िया क्रीम इस्तेमाल की थी, क्योंकि स्किन ऐसी लग रही थी, जैसे किसी छोटे बच्चे के गाल हों, मानो बाल कभी उगे ही ना हों.

केले के तने जैसी चिकनी जांघें, वो भी बाल विहीन. मैं फ़ैसला नहीं कर पाया कि भाभी की टाँगों पर बाल हैं ही नहीं या फिर इन्होने वैक्सिंग करवाई है. नीचे की ओर पतली होती हुई पिंडलियां और कमानीदार धावकों जैसे बीच में से घुमावदार पैर.. मस्त इमारत थी.

तभी भाभी ने मेरा बाजू पकड़ कर अपनी ओर खींचा, मैं उनके ऊपर ही गिर पड़ा और फिर से पहले वाले काम में जुट गया. मैंने उनके स्तनों को फिर से बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया.

लगभग दस मिनट मैंने उन्हें और चूसा चाटा और फिर एकदम से मैं नीचे की ओर बढ़ने लगा. पहले पसलियां चाटता रहा, फिर पेट की साइड वाली जगह यानि कमर के पास जीभ फिराई. फिर ऐसे ही चाटते हुए मैं उनकी जांघों के जोड़ तक पहुँच गया. जैसे जैसे मेरी जीभ अपना काम करती, उनके मुँह से सिसकारी निकल जाती और उनके हाथ मेरी पीठ पर बहुत जोर से मुट्ठी भर लेते.

अब जांघों के जोड़ से आगे बढ़ते हुए जैसे ही मेरी जीभ उनके स्वर्ग द्वार पर पहुँची, भाभी के मुँह से एक लंबी आह निकली- आआ आआअहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… उउइईई.. हायए माँआआआ.. मर गई..
मैं भी बड़ी तन्मयता से भाभी की योनि को चाट रहा था, मेरी जीभ उनकी योनि में बड़ी मस्ती से चल रही थी, वो पूरी तरह से मचल रही थीं.

अभी 4-5 मिनट ही मुझे भाभी के शरीर को चाटते हुए हुए थे कि अचानक वो मुझे पीछे को धकेल कर उठ कर बैठ गईं. भाभी ने मुझे पीछे की ओर धकेल कर लिटा दिया और उल्टी होकर मेरे ऊपर आ गई.. यानि 69 की पोज़ीशन में.

अब भाभी ने मेरे अंडरवियर को नीचे खींच कर गप्प से मेरे 7 इंच के लिंग को मुँह में भर लिया और बड़े प्यार से चूसने लगीं.

अब सिहरने की और सिसकारियां भरने की बारी मेरी थी. कुछ देर लंड को भाभी के मुँह से चुसवाया, फिर मैं सीधे होकर उनके ऊपर चढ़ गया. मैंने उनके कूल्हों के नीचे तकिया लगाया और अपना लिंग सही जगह पर टिका कर धीरे से अन्दर की ओर धकेला तो योनि गीली होने के कारण आराम से अन्दर घुसता चला गया. मेरा लिंग भाभी की योनि में एकदम टाइट सा सरकता चला गया, बिल्कुल ऐसे जैसे कि अन्दर कोई तेल या ग्रीस लगा रखी हो.

धीरे धीरे मेरा पूरा लिंग अन्दर चला गया और मेरे पेड़ू के नीचे वाली हड्डी उनकी क्लिट से टच होने लगी. तो मैं बिना लिंग को बाहर निकाले आराम आराम से हिलने लगा और बारी बारी से भाभी के दोनों स्तन चूसने लगा.

मेरा एक हाथ उनके कूल्हे के नीचे पहुँच गया और दूसरा हाथ उनकी गर्दन के नीचे था.

कुछ सेंकड तक ऐसे ही हल्का हल्का हिलने के बाद मैंने धीरे से लिंग को थोड़ा सा बाहर खींचा और फिर एक पल से भी कम समय में वापिस पूरा अन्दर धकेल दिया.

जैसे ही मैंने धक्का मारा, तो भाभी ने भी नीचे से उसी समय अपने कूल्हे उचका कर मेरा साथ दिया. मैंने दूसरा धक्का मारा, उन्होंने फिर से सहयोग किया. धीरे धीरे गति बढ़ने लगी और मैंने अपना हाथ भाभी की गर्दन के नीचे से निकाल लिया. अब मैंने भाभी के स्तनों को बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया, उनके मुख से कामुक सिसकारी निकलने लगी.

फिर 3-4 मिनट तक ऐसे ही संभोग करने के बाद मैंने लिंग बाहर निकल लिया और बेड की बैक से टेक लगा कर बैठ गया. मैंने भाभी को अपनी गोद में बैठा लिया यानि अपने दोनों हाथ उनकी जांघों के नीचे से निकाल कर उनके कूल्हे पकड़ लिए और अपने हाथों के बल पर भाभी को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया. ऊपर मैं बारी बारी से उनके स्तनों को चूस ही रहा था. बस 4-5 मिनट तक ऐसे ही सेक्स करने के बाद हमने फिर से आसन बदल दिया. अब भाभी को अपने ऊपर से हटा कर बेड पर करवट से लेटा दिया और मैं उनकी जांघों के बीच आ गया. मैं भाभी के साथ इस क्रॉस की सी अवस्था में आ गया, इससे भी लिंग योनि के भीतर उन स्थानों पर चोट मारता है, जहाँ कि साधारण अवस्था में नहीं पहुँच पाता.

अब 2-3 मिनट ही इस तरह से सेक्स किया ही था कि अचानक उनके मुँह से बहुत ज़ोर की चीख निकली ‘आआआ आआ आआआहह हह.’ और उन्होंने मेरे शरीर को इतने ज़ोर से जकड़ लिया कि मुझे लगा जैसे मेरी साँस ही रुक जाएगी.

पता नहीं कहाँ से इतना ज़ोर भाभी में आ गया था. काम मेरा भी होने ही वाला था तो मैंने पुनः उनके मम्मों को चूसना शुरू कर दिया. इससे औरत की संवेदनशीलता बढ़ जाती है. जैसे मैंने ये किया, उन्होंने मुझ फिर से कस लिया.

बस 8-10 धक्के मैंने और लगाए कि मेरा शरीर भी पिघल कर उनके शरीर में समाने लगा. इसके साथ मैं भी निढाल सा भाभी के ऊपर ही लेट गया.

सम्भोग के बाद 35-40 मिनट तक बातें करने के बाद हमें फिर से जोश आ गया तो एक बार और संभोग किया. दूसरी बार जब संभोग से निबटे तो घड़ी 2:30 बजा रही थी. मंजरी भाभी ने जल्दी से वही गाउन पहना, रसोई में चली गई और मेरे लिए टीवी पर फिल्म लगा गईं.

कुछ 15 मिनट में वो खाना ले आईं तो मैंने कहा- खाना बहुत जल्दी तैयार कर लिया?
उन्होंने कहा- तैयार तो पहले ही कर लिया था, अभी तो जरा गर्म किया है.

हम दोनों ने खाना खाया, फिर मैं अपने घर आ गया.

पाठकों की अमूल्य राय का इंतज़ार रहेगा.
आपका अपना रोहन
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