देवर भाभी की चुदाई-7

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प्रेषक : नामालूम
सम्पादक : जूजा जी
थोड़ी देर में भाभी बाहर आईं तो उनके हाथ में वही सफेद कच्छी थी जो उन्होंने अभी-अभी पहनी हुई थी।
भाभी फिर से वैसे ही बैठ कर अपनी कच्छी धोने लगी। लेकिन बैठते समय उन्होंने पेटीकोट ठीक से टांगों के बीच दबा लिया। यह सोच कर कि पेटीकोट के नीचे अब भाभी की चूत बिल्कुल नंगी होगी, मेरा मन डोलने लगा।

मैं मन ही मन दुआ करने लगा कि भाभी का पेटीकोट फिर से नीचे गिर जाए।
शायद ऊपर वाले ने मेरी दुआ जल्दी ही सुन ली।

भाभी का पेटीकोट का पिछला हिस्सा फिर से नीचे गिर गया। अब तो मेरे होश ही उड़ गए। उनकी गोरी-गोरी मांसल टाँगें साफ नजर आने लगीं।
तभी भाभी ने अपनी टांगों को फैला दिया और अब तो मेरा कलेजा ही मुँह में आ गया।

भाभी की चूत बिल्कुल नंगी थी।
गोरी-गोरी सुडौल जाँघों के बीच में उनकी चूत साफ नजर आ रही थी। पूरी चूत घने काले बालों से ढकी हुई थी, लेकिन चूत की दोनों फांकों और बीच का कटाव घनी झांटों के पीछे से नजर आ रहा था।

चूत इतनी फूली हुई थी और उसका मुँह इस प्रकार से खुला हुआ था, मानो अभी-अभी किसी मोटे लंड से चुदी हो।

भाभी कपड़े धोने में ऐसे लगी हुई थीं मानो उन्हें कुछ पता ही ना हो।

मेरे चेहरे की ओर देख कर बोलीं- क्या बात है रामू, तेरा चेहरा तो ऐसे लग रहा है जैसे तूने साँप देख लिया हो?

मैं बोला- भाभी साँप तो नहीं… लेकिन साँप जिस बिल में रहता है उसे जरूर देख लिया।

‘क्या मतलब? कौन से बिल की बात कर रहा है?’

मेरी आँखें भाभी की चूत पर ही जमी हुई थीं।

‘भाभी आपकी टांगों के बीच में जो साँप का बिल है ना.. मैं उसी की बात कर रहा हूँ।’

‘हाय..उई दैया.. बदमाश.. इतनी देर से तू ये देख रहा था? तुझे शर्म नहीं आई अपनी भाभी की टांगों के बीच में झाँकते हुए?’
यह कह कर भाभी ने झट से टाँगें नीचे कर लीं।

‘आपकी कसम भाभी इतनी लाजवाब चूत तो मैंने किसी फिल्म में भी नहीं देखी। भैया कितनी किस्मत वाले हैं। लेकिन भाभी इस बिल को तो एक लम्बे मोटे साँप की जरूरत है।’

भाभी मुस्कुराते हुए बोलीं- कहाँ से लाऊँ उस लम्बे मोटे साँप को
‘मेरे पास है ना एक लम्बा मोटा साँप। एक इशारा करो, सदा ही आपके बिल में रहेगा।’

‘हट नालायक…’ ये कह कर भाभी कपड़े सुखाने छत पर चली गईं।

ज़ाहिर था कि ये करने का विचार भाभी के मन में उपन्यास पढ़ने के बाद ही आया था।
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अब तो मुझे पूरा विश्वास हो गया कि भाभी मुझसे चुदवाना चाहती हैं।
मैं मौके की तलाश में था जो जल्दी ही हाथ आ गया।

तीन दिन बाद कॉलेज में बॉडी-बिल्डिंग की प्रतियोगिता थी। मैंने खूब कसरत और मालिश करनी शुरू कर दी थी।
भाभी भी मुझे अच्छी खुराक खिला रही थीं।

एक दिन भाभी नहा रही थीं और मैं अपने कमरे में मालिश कर रहा था। मैंने सिर्फ़ अंडरवियर पहन रखा था, इतने में भाभी नहा कर कमरे में आ गईं।
वो पेटीकोट और ब्लाउज में थीं।

मैंने भाभी से कहा- भाभी ज़रा पीठ की मालिश कर दोगी?

भाभी बोलीं- हाँ… हाँ.. क्यों नहीं, चल लेट जा।

मैं चटाई पर पेट के बल लेट गया। भाभी ने हाथ में तेल ले कर मेरी पीठ पर लगाना शुरू कर दिया।

भाभी के मुलायम हाथों का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था।
पीठ पर मालिश करने के बाद चलने को हुई तो मैं बोला- कर ही रही हो तो पूरे बदन की मालिश कर दो ना… आपके हाथ की मालिश होने पर मैं ज़रूर बॉडी-बिल्डिंग प्रतियोगिता में जीत जाऊँगा।

‘ठीक है कर देती हूँ, चल उल्टा हो कर लेट जा।’

मैं पीठ के बल लेट गया। भाभी ने पहले मेरे हाथों की मालिश की और फिर टाँगों की शुरू कर दी।
जैसे-जैसे मेरी जांघों के पास पहुँची, मेरी दिल की धड़कन तेज़ होने लगी।
मेरा लंड धीरे-धीरे हरकत करने लगा।

अब भाभी पीठ पर और लंड के चारों तरफ जांघों पर मालिश करने लगीं।
मेरा लंड बुरी तरह से फनफनाने लगा। ढीले लंड से भी अंडरवियर का ख़ासा उभार होता था। अब तो यह उभार फूल कर दुगना हो गया।
भाभी से यह छुपा नहीं था और उनका चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया था।
कनखियों से उभार को देखते हुए बोलीं- राजू, लगता है तेरा अंडरवियर फट जाएगा.. क्यों क़ैद कर रखा है बेचारे पंछी को.. आज़ाद कर दे…! और यह कह कर खिलखिला कर हँस पड़ीं।

‘आप ही आज़ाद कर दो ना भाभी इस पंछी को… आपको दुआएँ देगा।’

‘ठीक है मैं इसे आज़ादी देती हूँ।’ ये कहते हुए भाभी ने मेरा अंडरवियर नीचे खींच दिया।
अंडरवियर से आज़ाद होते ही मेरा 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा लंड किसी काले कोबरा की तरह फनफना कर खड़ा हो गया।

भाभी के तो होश ही उड़ गए। चेहरे की हँसी एकदम गायब हो गई, उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। मैंने पूछा- क्या हुआ भाभी? घबराई हुई सी लगती हो।’

‘बाप रे… ये लंड है या मूसल..! किसी घोड़े का लंड तो नहीं लगा लिया..? और ये अमरूद..! उस साण्ड के भी इतने बड़े नहीं थे।’

‘भाभी इसकी भी मालिश कर दो ना।’ भाभी ने ढेर सा तेल हाथ में लेकर खड़े हुए लंड पर लगाना शुरू कर दिया, बड़े ही प्यार से लंड की मालिश करने लगीं।

‘राजू तेरा लंड तो तेरे भैया से कहीं ज़्यादा बड़ा है… सच तेरी बीवी बहुत ही किस्मत वाली होगी… एक लम्बा-मोटा लंड औरत को तृप्त कर देता है। तेरा तो…!’

‘भाभी आप किस बीवी की बात कर रही हैं? इस लंड पर सबसे पहला अधिकार आपका है।’

‘सच.. देख राजू, मोटे-तगड़े लंड की कीमत एक औरत ही जानती है। इसको मोटा-तगड़ा बनाए रखना। जब तक तेरी शादी नहीं होती मैं इसकी रोज़ मालिश कर दूँगी।’

‘आप कितनी अच्छी हैं भाभी, वैसे भाभी इतने बड़े लंड को लवड़ा कहते हैं।’

‘अच्छा बाबा, लवड़ा.. सुहागरात को बहुत ध्यान रखना। तेरी बीवी की कुँवारी चूत का पता नहीं क्या हाल हो जाएगा। इतना मोटा और लम्बा लौड़ा तो मेरे जैसों की चूत भी फाड़ देगा।’

‘यह आप कैसे कह सकती हैं? एक बार इसे अपनी चूत में डलवा के तो देखिए।’
कहानी जारी रहेगी।
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