आ लंड मुझे चोद! भाभी की चूत की चुदाई

(Aa Lund Mujhe Chod! Bhabhi ki Chut Ki Chudai)

मैं शानू उर्फ सत्या उम्र 20 साल, आपके सामने अपनी पहली कहानी लिखने जा रहा हूँ जो बिल्कुल सत्य घटना पर आधारित है।
मैंने लोगों से सुना था कि किसी लड़की या औरत की खूबसूरती उसके उरोजों और नितम्बों से जानी जा सकती है।
पहली बार चुदवाने में हर लड़की या औरत जरूर नखरा करती है लेकिन एक बार चुदने के बाद तो कहती है आ लंड मुझे चोद!

प्रिय पाठको, आप सभी को इस चूत रसिया का प्रणाम!
दोस्तो, मैं आप लोगों को फालतू की बकवास नही सुनाऊँगा।

बात आज से 5 महीने पुरानी है। मैं अपने लंड की पहले से ही बहुत देखभाल किया करता था, क्योंकि मेरे मुहल्ले में मेरे एक मुँह बोले भाई हैं जो मुझे अपनी और भाभी के बीच की सभी घटनाओं का बड़े प्यार से मुझे सुनाया करते हैं। मैं भी उनकी हर बात को बड़े चाव से सुनता था लेकिन एक दिन मेरे लंड में थोड़ी फुंसी हो गई जो बहुत ही दर्द कर रही थी, जिससे मैं काफ़ी बैचेन था।

मैंने यह बात भाई को बताई तो बो बोले- तुम अपने लंड की सही से साफ-सफाई नहीं करते होगे इसलिए तुम्हें यह फुंसी हुई है।
लेकिन मैंने उन्हें बताया कि मैं अपने लंड सही से साफ-सफाई और मालिश भी करता हूँ।
तो भाई बोले- तब तो यह कोई नई बीमारी तो नहीं हो रही है?
भाई बोले- चलो दिखाओ!

तो मैं उनको घर लाया और बड़ी शर्म के साथ मैंने अंडरवियर उतारी तो भाई की मेरा लंड देखते ही आँखें फटी की फटी रह गई, और वो बोले- तुम्हारा लंड तो वाकयी में मालिश लायक है।
और उन्होंने देख कर कहा- यह तो कोई बड़ी बात नहीं है, यह फुंसी 3-4 दिन में खुद ब खुद सही हो जाएगी।

और हुआ भी ऐसा कि मेरे लंड की फुंसी बिल्कुल सही हो गई।

अब तो मैं अपने लंड की और अधिक देखभाल करने लगा, फिर मैं भाई साब से पूछ कर एक तेल लाया जो लंड को मालिश के वक्त और अधिक सख़्त बना देता था।
कुछ दिन बीतने के बाद मैं अपने पुराने तरीके की तरह भाई के साथ वक्त बिताने लगा लेकिन एक दिन भाई अपनी ससुराल भाभी को लेकर गये तो रास्ते में उनकी बाइक पंक्चर हो गई और उन्होने मुझे फोन लगाया कि मैं उनके पापा की बाइक ले कर बताई हुई जगह पर आ जाऊँ।

मैंने तुरंत उनके घर जा कर चाभी ली और भाई भाभी के पास पहुँच गया।
तो भाई बोले- आगे देख कर आओ कि कोई पन्चर ठीक करने की कोई दुकान है क्या?

मैंने तुरंत गाड़ी बढ़ाई और लगभग 1.5 किमी के आगे एक दुकान मिल ही गई, मैं तुरंत आया और भाई को बताया।
तो वो बोले- तुम भाभी को ले जाकर वहीं पर रुकना, मैं अभी पैदल गाड़ी लेकर पहुँचता हूँ।
मैंने भाभी को गाड़ी पर बिठाया और चल दिया लेकिन रास्ता खराब होने के कारण भाभी के बूब्स मुझसे बार-बार टकराने लगे। मुझे पता नहीं क्यों शरीर मैं गुदगुदी से होने लगी और मैं और ज़्यादा झटके लगाने लगा।

तब भाभी बोली- तुम्हारी फुंसी अब सही है?
तो मैं एकदम दंग रह गया और मैंने हड़बड़ाहट में सिर हिलाया।

तब भाभी बोली- तुम तो कभी घर आते ही नहीं हो?
मैंने कहा- भाई ने कभी न्योता ही नहीं दिया!
तो भाभी बोली- चलो तुम अपना नंबर दे दो तो मैं ही तुम्हारा न्योता कर लिया करूँगी।

मैंने भाभी को अपना नंबर दिया और भाई आ गये।
तब मैं गाड़ी लेकर वापिस आ गया, अब मेरे दिल में भाभी के लिए पता नहीं क्यों अजीब सी हलचल होने लगी और मेरी रात करवट बदलते निकल गई।

अगले दिन दोपहर के करीब एक बजे दरवाजे की घंटी बजी और मैं बाहर निकला तो लाइट हरे रंग की साड़ी में भाभी दरवाजे पर खड़ी थी, मैंने बड़े हड़बड़ाहट में भाभी को अंदर आने के लिए बोला।

भाभी उस दिन कयामत लग रही थी, देखने में तो 34-28-36 के भरे-भरे से आम के जैसे चूचे थे। भाभी का नाम अर्पणा है, भाभी अंदर आई तो बोली- माँ कहाँ है?
मैंने उन्हें बताया- नानी की तबीयत खराब है इसलिए नानी को देखने माँ-पापा आज सुबह ही गये हैं।

तब भाभी बोली- मैं फिर कभी आऊँगी।
लेकिन मैंने कहा- आप हमारे घर आई हैं तो कुछ नाश्ता करके ज़रूर जाइए।
तो भाभी बोली- ठीक तुम कहते हो तो नाश्ता करके ही सही!

वो बोली- नाश्ते में क्या मिलेगा?
मैंने कहा- जो आपको अच्छा लगे!
तो भाभी बोली- तुम पहले वादा करो कि जो मुझे अच्छा लगेगा वही नाश्ता तुम मुझे दोगे?

मैंने वादा किया और भाभी मुझसे लिपट गई।
और मैं भी बगैर देर किए भाभी के होंठों का रसपान करने लगा, मैं भाभी के बूब्स कस कर मरोड़ने लगा और भाभी का ब्लाऊज मैंने एक झटके में उतार दिया, उनके मम्मे एकदम गोरे और कसे हुए थे जिनके बिल्कुल लाल निप्पल थे। मैं एकदम से पागल हुआ जा रहा था और उनके मम्मों का रसपान किए जा रहा था।

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