सितम्बर 2015 की लोकप्रिय कहानियाँ

(Best Stories Published In September 2015)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

प्रिय अन्तर्वासना पाठको
सितम्बर महीने में प्रकाशित कहानियों में से पाठकों की पसंद की पांच कहानियां आपके समक्ष प्रस्तुत हैं…

गैर मर्दों के लण्ड से चूत चुदाई

मुझे एक फ्रेंड की बर्थडे पार्टी में आगरा जाना था। पार्टी शाम की थी.. तो मैं सुबह ही कार लेकर निकल गई।
वहाँ पहुँच कर हमने खूब गप्पें लड़ाईं.. फिर पार्टी में मैंने एक गाउन पहना हुआ था.. जो कि डार्क नेवी ब्लू कलर का बहुत ही सेक्सी था। उसका गला बहुत गहरा था जिसमे मेरे मम्मों की दूधिया घाटी लोगों के लौड़े खड़ा कर देती थी।

मैंने अपने बाल भी खुले ही रखे थे.. मैं पार्टी में बहुत मस्त माल जैसी लग रही थी। बहुत लोगों ने मुझ पर लाइन मारी लेकिन मैंने सभी को नजरंदाज किया।
पार्टी 5 बजे शुरू हुई थी.. और 9 बजे ख़तम हो गई थी।

मैं वहाँ से रात को ही निकली.. क्योंकि मुझे वहाँ रुकना ठीक नहीं लगा था। फ्रेंड्स के भी परिवार के लोग थे.. सो मैं 8:30 पर उधर से वापस चल दी।
मैंने पार्टी में ड्रिंक तो बहुत कम ही की थी.. बस दो पैग ही पिए थे।
खैर.. रात में सुनसान सा था.. थोड़ा डर लग रहा था.. लेकिन मैं आराम से कार चलाती गई।

रास्ते में मुझे बहुत तेज़ पेशाब लगी.. तो मैंने कार एक ढाबे पर रोकी और पूछा टॉयलेट कहाँ है?
ढाबे पर एक ही काला मोटा सा आदमी था.. ढाबा पूरा खाली था.. क्योंकि रात हो गई थी।
उसने मेरे मम्मों को देखते हुए कहा- अन्दर है।

मैं अन्दर गई.. वहाँ मैं टॉयलेट ढूँढ रही थी.. पीछे काफ़ी खुला एरिया था.. कमरे भी बने हुए थे।
खैर.. मुझे टॉयलेट मिल गया.. मैं अन्दर जा कर सूसू करने लगी।

जब मैं टॉयलेट से बाहर आई.. हाथ धोने के लिए वाशबेसिन की तरफ मुड़ी.. तो अचानक कमरों की तरफ से कुछ आवाज़ आई। मैं वहाँ देखने के लिए इधर-उधर देखने लगी।

फिर आवाज़ तेज हो गई.. मैं समझ गई कि अन्दर क्या चल रहा है।
मेरा मन देखने का हुआ.. तो मैं गेट के ठीक ऊपर की जाली से झाँकने लगी।
अन्दर कुछ नहीं दिख रहा था.. घुप्प अंधेरा छाया था और जाली पर कुछ कपड़े भी लटक रहे थे।

मैं वहीं खड़ी होकर देखने की कोशिश करने लगी.. थोड़ी देर बाद मुझे अँधेरे में हल्का-हल्का दिखना शुरू हो गया।
मैंने देखा अन्दर दो लड़के एक लड़की को चोद रहे हैं और लड़की मजे से चुदवा रही है।

अन्दर का गरम सीन देख कर मैं मचल गई.. और कब मेरा हाथ मेरी चूत की तरफ चला गया.. पता ही नहीं चला।
मैं मस्ती में आ गई और हल्का सा गाउन उठा कर अपनी चूत में उंगली करने लगी।

मेरा अब चुदने का मन हो रहा था। कुछ देर बाद मैं झड़ने ही वाली थी कि अन्दर से वो दोनों लड़के बाहर आने लगे।
मैं जल्दी से टॉयलेट की तरफ भागी और टॉयलेट में घुस कर हल्के से गेट खोलकर देखने लगी।

मैंने देखा कि वे दोनों लड़के जा रहे थे.. पर लड़की अन्दर ही थी और फिर दो लड़के और घुस गए। मेरी तो मानो हालत खराब होने लगी.. मेरा मन कर रहा था.. मैं भी अन्दर जाकर चुदवा लूँ।

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शादी के बीस दिन बाद

बात तब की है, जब मेरी शादी हुई थी, शादी को अभी मुश्किल से 10-12 दिन ही हुये थे। हमारा तो अपना घर था मगर साथ वाले घर में कोई नए पड़ोसी आए थे, वो भी बस मियां बीवी थे।
मैं अपने घर में ऊपर वाले कमरे में रहता था, ऊपर वाले कमरे का फायदा यह था कि घर का कोई ऊपर आता नहीं था और हम मियां बीवी की प्रेम लीला खूब खुल के चलती थी, जब भी मौका मिलता, हम दोनों मियां बीवी आपस में भिड़ जाते।
मैंने अपनी बीवी को मना कर रखा था कि वो साड़ी के नीचे पेंटी नहीं पहनेगी ताकि जब भी मौका मिले, मैं उसकी साड़ी ऊपर उठाऊँ और ठोक दूँ।

अब जवानी के दिन, नई नई शादी, तो बीवी भी चुदाई के खूब मज़े ले रही थी, बड़े मज़े की लाइफ कट रही थी।

एक दिन सुबह सुबह करीब 5 बजे मेरी आँख खुल गई। मैं उठा, उठ कर बाथरूम गया, पेशाब किया। रात ढाई बजे एक शिफ्ट लगाई थी सो मैं तो बिल्कुल नंगा ही सो गया था।
वापिस आकर देखा, बिस्तर पे बीवी बिल्कुल नंग धड़ंग, दुनिया से बेखबर सो रही थी।
मैं उसके पास गया, खिड़की से आ रही रोशनी में उसके गोरे चिकने बदन को निहार रहा था, छोटे छोटे दो गोल गोल बूब्स, उसके नीचे सपाट पेट, और पेट के नीचे अभी रात को ही शेव की हुई, गुलाबी चूत।

मैं नीचे झुका और अपनी जीभ से मैंने अपनी बीवी की चूत चाट ली।
वो कसमसा कर हिली और अपनी टाँगें आपस में जोड़ कर चादर लेकर सो गई।
मतलब उसकी तो मैं अब ले नहीं सकता था, उसे तो सोना था और सोते हुये किसी को क्यों डिस्टर्ब करना… मैंने अपने लंड को एक झटका दिया, अपनी लंबी वाली निकर पहनी और कमरे से बाहर निकल आया।

बाहर आया तो देखा, जो हमारे नए पड़ोसी आए थे, उनकी बीवी एक पतली सी नाइटी पहने हुये छत घूम रही थी, शायद सुबह की सैर कर रही थी।
मैंने उसे देखा, अब निकर के ऊपर तो मैं नंगा ही था, उसने मुझे देखा, बड़े घूर कर, मेरे बालों से भरे सीने को बड़े ध्यान से देखा। उसके देखने में एक बात थी, मुझे लगा जैसे आँखों आँखों में उसने मुझे कुछ कहा हो, क्या कहा, यह तो पता नहीं, मगर कोई इशारा ज़रूर था।

मैंने भी उसे देखा और जब वो दूसरा चक्कर लगा कर आई, तो मैंने सर झुका कर उसका अभिवादन किया।
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भतीजी की कुंवारी चूत का रस

यह 2005 की घटना है। मेरे यहाँ मेरे बड़े भाई की लड़की अनीता जैन आई हुई थी.. वो मेरे भाई की बड़ी लड़की थी.. अनीता की उम्र 18 साल रही होगी। वो स्कूल में पढ़ती थी.. उसका रंग थोड़ा सांवला जरूर है.. लेकिन वो बहुत ही सुंदर है।
उसके सीने पर बड़े-बड़े स्तन उभर चुके थे, पीछे बड़े-बड़े गोल कूल्हे बहुत ही सुंदर थे। उसे देखकर मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था.. क्या करूँ कुछ भी नहीं सूझ रहा था। मैं उससे बातों-बातों में ही उसके स्तन तथा कूल्हों को स्पर्श कर देता था.. वो हर दिन मुझे बेकाबू कर रही थी।

मैं रात को उठकर उसकी चड्डी निकाल कर उसको सहलाता था तथा उसके ऊपर मेरा लण्ड रख के हिलाता था। दो टाँगों के बीच जिस जगह पर उसकी चूत होती.. उसी जगह पर लण्ड रख देता और मेरा वीर्य गिरा देता था।

फिर मैं उसकी चूत की भीनी-भीनी खुश्बू को मजे से सूँघता था।

उसकी कमसिन अदा मुझे बहुत गरम कर चुकी थी.. वो एक बहुत ही नाज़ुक माल था। उसे चोदना जैसे मेरे लिए बहुत ज़रूरी हो गया था.. लेकिन वो मेरी सग़ी भतीजी थी।
मैं उसे चोदने के लिए बहुत बेकरार हो चुका था।

एक रात बहुत ज़ोर से बारिश आई और मेरा घर छोटा है.. इसीलिए मेरी इच्छा कुदरत ने पूरी कर दी।
बारिश की वजह से मेरी माँ ने कहा- अनीता, आज की रात तू अपने चाचा के साथ में सो जा..

अनीता धीरे से मेरे पलंग पर आकर एक बाजू में सो गई। वो मेरी तरफ पीठ करके सोई.. उस दिन उसने लहंगा और कुर्ती जैसी शर्ट पहना हुआ था। वो पीछे से बहुत सुंदर लग रही थी। उसके बड़े-बड़े कूल्हे और कूल्हों की गहरी दरार मुझे उत्तेजित कर रही थी। मेरी आज इच्छा पूरी होने वाली थी। घर का एकदम कोरा माल मेरे पास था.. इसलिए मेरी आँखों से नींद गायब थी।
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पापा मम्मी की दूसरी सुहागरात

जब से मैंने पापा मम्मी को चुदाई करते देखा, तब से मुझे जैसे उनकी चुदाई देखने का चस्का लग गया।
मैं अब रोज रात में जल्दी सो जाने का नाटक करता, इस उम्मीद से कि पापा मम्मी पता नहीं कब अपनी चुदाई का कार्यक्रम शुरू कर दे। इसी इंतज़ार में मेरी पूरी दो रात काली हो गई, मैं रात में 3:00 बजे सोया लेकिन सब बेकार, पिछली रात तो बात बनते बनते रह गई।
उस समय रात के लगभग 2:00 बजे होंगे, मैं भी बस सोने ही जा रहा था, तभी पापा रोज़ रात के तरह एक नींद मार कर उठे और मुझे मम्मी के बगल से उठाकर अलग लिटाया और खुद उनके बगल आ लेट गए।

मैं समझ गया कि अब कुछ होने वाला है। पापा, मम्मी के ब्लाउज के ऊपर अपने हाथ धीरे धीरे चलाने लगे।
मम्मी जो कि मज़े से सो रही थी, पापा की इस हरकत से उनकी नींद हल्की टूट गई।
मम्मी हल्की नींद में थी, उन्होंने पापा का हाथ अपने ब्लाउज से हटाया।
मम्मी थोड़ा गुस्से से बोली- अरे जाओ अंकित के पापा ! तुम तो कुछ समझते ही नहीं, बस जब तुम्हारी आँख खुल जाये तब तुम्हारी बन्दूक खड़ी हो जाती है फायर करने के लिए ! जैसे जैसे तुम्हारी उम्र बढ़ रही है तुम्हारी भूख और बढ़ती जा रही है। अभी परसों ही तुमने मुझे 3:30 बजे तक सोने नहीं दिया। पूरे दिन सारा बदन दर्द हुआ मेरा और दिन में नींद की झपकियाँ आती रही वो अलग!
बच्चा जवान हो रहा है, और तुम बस जब भी उठ जाओ तुम्हे अपना शिकार करना है। अब मुझे ये सब करने बहुत शर्म आती है अगर तुम्हे इतना ही शौक है तो अलग चल कर करो न ! मैं अब इतने बड़े लड़के के बगल में लेटकर नहीं करूंगी।

पापा बोले- ए जी, तुम इतनी खूबसूरत हो कि जब भी तुम्हारे शरीर का कोई भी अंग खुला दिख जाता है तब बस मेरी नियत ख़राब हो जाती है।
पापा बोले- आज यहीं कर लेते हैं, सुहागरात तो अकेले ही मनायेंगे कल !
मम्मी बोली- कंडोम लाये हो?
पापा बोले- नहीं!
मम्मी बोली- तो आज कुछ भी नहीं।
पापा बोले- करने दो न!
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बहन की चूत चोद कर बना बहनचोद

आज मैं अपने बारे में कुछ और भी बता रहा हूँ, मैं अब 22 साल का हो गया हूँ.. पहले से थोड़ा और हैण्डसम भी हो गया हूँ और क्या बताऊँ.. बाकी तो आप सब जानते ही हैं। मेरे घर में माँ-पापा के अलावा मैं और मेरी दो बहनें हैं.. सुरभि और सोनाली। सुरभि मुझ से 2 साल बड़ी है.. दिखने में तेलगू की हीरोइन अनुष्का जैसी दिखती है।

वो बीटेक पूरी करके एक सॉफ़्टवेयर कंपनी में जॉब कर रही है। दूसरी है सोनाली.. जो 19 साल की है.. अब तो वो सानिया मिर्ज़ा जैसी हो गई है। लेकिन पहले सिर्फ़ चेहरे से ही सानिया जैसी लगती थी.. पर जिस्म से भी वैसी ही हो गई है।
सोनाली बीटेक के पहले साल में है।

मैं कहानी पर आता हूँ।
मैंने आज तक इतनी लड़कियों के साथ सेक्स किया है.. लेकिन कभी ऐसा नहीं सोचा था कि ऐसा भी करना पड़ेगा… लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

तो बात शुरू यहाँ से हुई कि एक दिन मेरे निम्बज आईडी (एक चैट पोर्टल) में एक रिक्वेस्ट ‘हॉट & सेक्सी गर्ल’ के नाम से आई.. तो मैंने उसको अपनी फ्रेंड लिस्ट में ज़ोड़ लिया और उसको ‘हाई’ लिख कर भेजा.. तो उधर से भी ‘हाई’ लिख कर आया।

मैंने उसका नाम पूछा.. तो वो बोली- नाम में क्या रखा है?
तो मैं बोला- तो मैं आपको किस नाम से बुलाऊँ?
‘सेक्सी गर्ल बोल सकते हो..’

मैंने उससे कुछ देर तक यूँ ही फॉर्मल बात की.. फिर मैंने उससे सेक्स चैट करना चाहा.. और पूछा।
मैं- आपकी उम्र?
सेक्सी गर्ल- 24 और तुम्हारी?
मैं- सेक्सी एज.. 22..
सेक्सी गर्ल- थैंक यू.. तुम तो मुझसे छोटे हो..
मैं- छोटा हूँ तो क्या हुआ.. मेरा दिल बड़ा है।
सेक्सी गर्ल- ऊऊऊऊऊओह..

मैं- आपका ब्वॉयफ्रेण्ड है?
सेक्सी गर्ल- नहीं..
मैं- क्यों?
सेक्सी गर्ल- कोई अच्छा लड़का मिला नहीं.. तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?
मैं- नहीं..
सेक्सी गर्ल- क्यों?
मैं- कोई हॉट & सेक्सी गर्ल मिली नहीं या ये बोलूँ कि बस आप से जो मिलना था इसलिए कोई मिली ही नहीं..।

सेक्सी गर्ल- हा हा हा हा..
वो हँसने लगी।

मैं- आप रियली हॉट & सेक्सी हो..
सेक्सी गर्ल- हाँ वो तो मैं हूँ..
मैं- पर तुम कितनी सेक्सी हो.. ज़रा हमें भी बताओ अपना फिगर..
सेक्सी गर्ल- 36बी-28-32..
मैं- वाउ.. मस्त है.. मम्मे इतने बड़े कैसे हुए.. और पतली कमर?

सेक्सी गर्ल- जब चैट करती हूँ.. तो मैं खुद अपने दबाती रहती हूँ।
मैं- खुद से.. कभी किसी लड़के ने नहीं दबाए?
सेक्सी गर्ल- हाँ..
मैं- किसने?
सेक्सी गर्ल- एक ब्वॉयफ्रेण्ड था.. उसने दबाए थे..
मैं- था.. मतलब अब नहीं है.. चलो मेरी लाइन तो क्लियर है..
सेक्सी गर्ल- हा हा अह आहा हाहा.. नो.. मैंने खुद ही उसे छोड़ दिया..
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