नवम्बर 2016 की लोकप्रिय कहानियाँ

(Best Stories Published In November 2016)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

प्रिय अन्तर्वासना पाठको
नवम्बर महीने में प्रकाशित कहानियों में से पाठकों की पसंद की पांच कहानियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत हैं…

तीन सहेलियाँ नंगी डिल्डो से खेली

मैं मल्लिका राय… वही कैनेडा में मस्ती वाली…

बात तब की है जब मैं और मेरी एक घनिष्ठ सहेली उर्वशी (बदला नाम) के साथ लेस्बियन सेक्स का दिल से मजे ले रहे थे, तब हमें ये सब करते हुए हमें 4-5 माह ही हुए थे।

हम दोनों सहेलियाँ एक दिन बाजार गई हुई थी, अचानक उर्वशी की नजर हमारी एक और सहेली कविता (बदला नाम) जिसके साथ कहानी
सहेली संग मेरी लेस्बियन रासलीला
अन्तर्वासना पर आ चुकी है,
पर पढ़ी!

वह अपने बच्चे और पति के साथ कुछ सामान खरीद रही थी, उसने मुझे कविता के पास चलने की लिये कहा और हम दोनों उसके पास चल दी।

वह हमें देखकर बहुत खुश हुई।
मैंने कविता के बच्चे को गोद में ले लिया और उसके पति की नमस्कार करके बातें करने लगी।

थोड़ी देर बात करने के बाद उर्वशी ने मेरी तरफ एक कामुक नजर देखकर मुझे आँख मारी पर मैं उसका मतलब समझ नहीं पाई, पर 2-3 इशारों के बाद मैं उसका इरादा समझ गई, और मेरे मन में भी हवस जाग उठी थी, मैंने भी उसे आँख मार दी, पर कविता ये सब नहीं समझ पाई।

बात करने के बाद उर्वशी ने कुछ दिन बाद उसके घर पर हम दोनों को बुलाया, वो अकेली ही थी, उसके घर पर आज कोई नहीं था।
मैं पतिदेव से अनुमति लेकर सुबह जल्दी उर्वशी के घर पर पहुंच गई।

जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो देखा कि वो पूरी नंगी ही थी।

पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…

राजगढ़ में फ़ुफ़ेरे भाई ने मुझे सड़क पर चोदा

जुलाई का महीना था… उस दिन बारिश हो रही थी।

बहुत इच्छा हो रही थी कि अपनी चूत को थोड़ी राहत दूँ.. पर ना जाने कहाँ छुप कर बैठा था मेरी चूत का राजा।

मैं अन्दर कमरे में सारे कपड़े उतार कर बिस्तर पर ब्रा और पैन्टी में लेटी हुई थी और धीरे-धीरे खुद ही अपने बोबे दबा रही थी।
मैं अपने दोनों पैरों को फैला कर पड़ी हुई थी, मेरा दूसरा हाथ मेरी चड्डी के ऊपर से ही मेरी भीगी हुई चूत के छेद को सहला रहा था

कि तभी किसी ने मेरा दरवाज़ा ठोका।

मैं अपनी वासना भरी कल्पनाओं से बाहर आकर बिस्तर पर उठ कर बैठ गई।

मैं आवाज़ देकर पूछने ही वाली थी कि कौन है?
इतने में वो अन्दर आ गया।
ये मेरी बुआ के बड़े बेटे निशांत भैया थे।

मैंने झट से चुन्नी लेकर अपने नंगे बदन को ढक लिया..
पर ना जाने कैसे चुन्नी मेरे 36 इंच के एक रसीले बोबे से गिरकर नीचे आ गई।

भैया मेरे उस बोबे को ही घूरे जा रहे थे। उनकी आँखों में मेरी चूचियों को चूसने की एक तड़प साफ दिख रही थी।

मैंने चुन्नी ठीक की और जैसे-तैसे अपनी नजरें हटाईं.. जो कि उनके खड़े लंड को अपने बड़े बोबे के बीच घिसना चाहती थी।

मैंने चौंकते हुए कहा- भैया आप..? दरवाज़ा ठीक से नहीं लगा होगा शायद। आप बताइए.. आपका कैसे आना हुआ?

भैया मेरे बोबों को ही घूरते हुए बोले- लवली, मेरे दोस्त रमेश ने नया फ्लैट लिया है.. उसका गृहप्रवेश है.. तुम मेरे साथ राजगढ़ चलना

चाहोगी? मैंने तुम्हारी मम्मी से पूछ लिया है।

मैंने भी उनकी नज़रों को थोड़ा सुकून देने के लिए मेरी चुन्नी बूबस पर से पूरी तरह से सरका दी और कहा- हाँ भैया मैं चलूंगी।

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