जनवरी 2016 की लोकप्रिय कहानियाँ

(Best Stories Published In January 2016)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

प्रिय अन्तर्वासना पाठको
जनवरी महीने में प्रकाशित कहानियों में से पाठकों की पसंद की पांच कहानियां आपके समक्ष प्रस्तुत हैं…

चूत जवां जब होती है

 
‘जब चूत जवां होती है’ जैसा कि कहानी के शीर्षक से ही स्पष्ट है, यह कथा किसी भी नई नई ताजा जवान होती हुई, खिलती हुई कली की चूत में उठने वाली कसक, उमंगों तरंगों और उसकी लण्ड लील जाने की लालसा और उत्कंठा को लेकर है।

यूं तो प्रकृति के हिसाब से लड़की के पीरियड्स या मासिकधर्म ग्यारह-बारह साल की उमर में ही शुरू हो जाते हैं और पीरियड्स शुरू होने का अर्थ है कि वो सम्भोग हेतु, गर्भ धारण हेतु तैयार हो गई है। प्रकृति ने उसकी चूत को कैसा भी मोटा लम्बा लण्ड लील जाने, आत्मसात कर लेने की और चुदाई का भरपूर आनन्द ले लेने के लायक बना दिया है, अधिकृत और स्वतंत्र कर दिया है। परन्तु सामाजिक मान्यताएं और क़ानून ऐसी कच्ची कली को चोदने की इजाज़त नहीं देता हालांकि प्रकृति ने तो उसे तैयार कर ही दिया है इस काम के लिए!

इन मानव रचित रीति रिवाजों की बेड़ियों में जकड़ी यह जवां चूत या तो विवाह हो जाने तक सालों साल इंतजार करती है और जैसे तैसे, अपने तरीके से अपनी चूत को समझाती बहलाती रहती है, या किन्ही विषम परिस्थितियों में हम अंकल टाइप के लोगों से चुद ही जाती है जैसे ट्यूशन में, पड़ोस के अंकल जी से, पापा के घनिष्ठ मित्र से, शादी ब्याह में अचानक बिना किसी प्लानिंग के या कभी कभी किसी सगे सम्बन्धी के लण्ड से!

ज्यादातर मैंने देखा है कि लड़की जब अपने शहर से बाहर होती है जैसे किसी शादी में या छुट्टियों में मामा के यहाँ तो वहाँ पर वह खुल के खेल जाती है और चुदाई का पहला मौका मिलते ही बिछ जाती है चुदने के लिए!

बहरहाल हर चूत की अपनी अपनी नियति होती है।

अभी कुछ ही दिन पहले की सत्य घटना है जो कि टीवी समाचारों में दो तीन दिन तक छाई रही, आप लोगों ने भी देखा सुना होगा, कि हैदराबाद की एक अल्प-वयस्क लड़की ने स्कूल में एक बच्चे को जन्म दिया यह लड़की वहाँ कक्षा नौ की छात्रा थी. सोचिये यह लड़की उससे कम से कम एक साल पहले से सम्भोग रत रही होगी, उसने कभी किसी से शिकायत भी नहीं की, मतलब वो खुद अपनी मर्जी से यौन रत रही थी। ऐसे किस्से रोज ही होते हैं सैकड़ों की संख्या में लेकिन सामने नहीं आ पाते!

पहले बाल विवाह हो जाया करते थे और जब लड़की रजस्वला हो जाती थी, रजस्वला होते ही उसका गौना हो जाता था और वो ससुराल चली जाती थी और चुदाई का आनन्द लेती थी, कई कई बच्चे पैदा करने के बाद भी जीवन भर स्वस्थ रहती थी बीमार भी शायद ही कभी होती थी। परन्तु समाज की अपनी मान्यताएँ, विवशताएँ भी हैं।

कानून किसी को भी यूं खुला खेल फर्रुखाबादी खेलने की इजाजत नहीं दे सकता।

हाँ, हमारे कानून ने वयस्क युवक युवतियों को एक साथ रहने की, live-in-relationship की अनुमति तो दे ही दी है।

बहरहाल जो भी हो, प्रकृति के अपने नियम सिद्धान्त हैं जो मनुष्य के कल्याण के लिए ही बने हैं क्योंकि यह शरीर प्रकृति की ही देन है और उसी के नियमों पर चलना हितकारी होता है।

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इस कहानी के विषय में:

यह कहानी मेरी पूर्व में प्रकाशित कहानी ‘लण्ड न माने रीत‘ की अगली कड़ी है. पहले की कहानी में आप पढ़ चुके हैं कि कैसे परिस्थितियों से विवश होकर मुझे अपने मित्र की लाडली कमसिन बिटिया आरती की चूत मारनी पड़ी और वो किस प्रकार अपने प्रथम सम्भोग में मुझे अपना कौमार्य समर्पित कर, मेरे लण्ड से अपनी चूत की सील तुड़वा कर रक्त रंजित होकर चरम आनन्द को प्राप्त हुई थी।

फिर आरती ने अपने विवाहोपरांत कामासक्त होकर मुझे बुला भेजा क्योंकि वो मेरी चुदाई को कभी भूल ही नही पाई थी और मुझसे पुनः चुदना चाहती थी।

मैं भी आरती से मिलने को व्याकुल था और उसके बुलावे पर नौकरी से छुट्टी लेकर गाँव आकर, उसके घर जाकर उससे होली के त्यौहार पर मिला। सौभाग्य से आरती के माता पिता को बाहर जाना पड़ा और वे मुझे आरती का ख्याल रखने और उसी के साथ रात दिन रहने का निवेदन कर दो तीन दिन के लिए बाहर चले गए।

फिर हमने रात में जी भर के चुदाई का आनन्द लिया और सुबह सुबह सूर्योदय के साथ ही मैंने उसे पुनः चोदा।

तभी आरती मुझे स्मरण कराती है कि उसकी मुंह बोली साउथ इंडियन ननद जो कि उसके ससुराल में उसकी किरायेदार भी है वो ट्रेन से आने वाली है, जिसका नाम वत्सला है और उसे लेने मुझे शहर जाना है।

आरती मुझे वत्सला के कामुक स्वभाव के बारे में भी बताती है कि कैसे वो आरती और उसके पति को छुप छुप कर चुदाई करते देखती थी फिर वो दोनों लेस्बियन फ्रेंड्स बनी और एक दूसरे की चूत की खुजली को मिटाने लगी, एक दूसरी की चूत को तृप्त करने लगी। पिछली कहानी यहीं तक थी।

और अब मुझे वत्सला को रिसीव करने शहर के रेलवे स्टेशन जाना है, उसे अपने साथ बस में लेकर गाँव आना है।

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मैं अपने जेठ की पत्नी बन कर चुदी

 
अन्तर्वासना के पाठकों को आपकी प्यारी नेहारानी का प्यार और नमस्कार।
कहानी पढ़ने से पहले मेरी पिछली कहानियाँ जरूर पढ़ें।
मैं हाजिर हूँ एक नई कहानी लेकर..
यह कहानी अक्टूबर 2010 की है.. मैं जब आगरा से वापिस वाराणसी आई तब की है। यह कहानी मेरे पति की फैमिली से है, मेरे पति के बड़े पिता जी के लड़के की है.. जो लखनऊ में बीडीओ के पद पर थे.. पर जब उनकी बीवी का देहान्त हो गया था.. तो उन्होंने अपनी पोस्टिंग बनारस करा ली थी, वे हमारे ही घर पर रह कर काम कर रहे थे।

बीवी के न रहने से उनकी सेक्स की भूख बढ़ गई थी। वह हमेशा मुझे घूरते रहते और वह अपने कमरे में मुठ्ठ मार कर वीर्य अपने अंडरवियर गिरा कर छोड़ देते थे।
यह उनका हमेशा का काम हो गया था। जब भी मैं उनके कमरे की साफ सफाई करती.. तो अक्सर उनकी गीली चड्डी मिलती और मैं भी उसे सूँघकर देखती.. पर मेरे दिल में जेठ जी के प्रति कभी गलत भावना या उनसे चुदने का ख्याल नहीं रखती.. मैं यह सोचकर रह जाती कि बेचारे को हाथ से करने के सिवा और क्या कर सकते हैं।
मेरी उनके प्रति सहानभूति थी।

वे कभी मुझसे बोलते नहीं थे, मैं चाय नाश्ता उनके रूम में ही पहुँचा देती और खाना भी वो कमरे में ही खाते थे.. पर जब भी मैं किसी काम से जाती.. तो वह मुझे चोर निगाहों से देखते रहते थे।

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चाची की सर्दी भतीजे ने दूर की

 
मेरा नाम रोमा गुप्ता है और मैं 28 साल की एक बेहद स्मार्ट औरत हूँ, एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर हूँ, पति भी एक मल्टी नेशनल कंपनी में बड़ी पोस्ट पर है, पर उनकी टूरिंग जॉब है इसलिए अक्सर घर से बाहर ही रहते हैं।

अब प्राइवेट कंपनियों में काम का बोझ तो बहुत होता है इसलिए हम दोनों को हर वक़्त अपने काम की चिंता रहती है, इसी वजह से इस छोटी सी उम्र में ही हमारी सेक्स लाइफ जो है उसमें काफी ठहराव सा आ गया है, इसी वजह से हम दूसरे बेबी की प्लानिंग नहीं कर पाये।
एक बेटी है छोटी सी, अभी स्कूल में एल के जी में है।

अब जब पति घर से अक्सर बाहर रहते हैं, तो जब कभी रात को या दिन में मेरा सेक्स को दिल कर भी जाता तो मेरे पास अपनी आग को बुझाने का कोई दूसरा चारा नहीं था। न ही मेरी ऐसी कोई इच्छा थी कि बाहर किसी से कोई अपना ऐसा संबंध बनाऊँ, तो मेरे पास सिर्फ एक ही ऑप्शन बचती थी, हस्तमैथुन।
पहले तो कभी कभी करती थी, मगर पति पर काम का बोझ इतना था कि वो तो महीने में 15 बाहर और बाकी के 15 दिन में भी बस एक दो बार ही कर पाते थे।

मैंने यह भी देखा कि अब उनमें वो पहले जैसा जोश या ताकत भी नहीं रही थी। कई बार तो मैं कितनी कितनी देर उनके लंड (माफ करना मैं वो शब्द इस्तेमाल नहीं कर सकती इसलिए वरिंदर जी से अनुरोध है कि प्लीज़ जहाँ पप्पू लिखूँ तो मर्दों का ‘वो’ लिख देना और जहाँ मुनिया लिखूँ तो वहाँ लेडीज़ की ‘वो’ लिख देना, और अपने हिसाब से बाकी भी एडजस्ट कर लेना) को अपने मुँह में लेकर चूसती रहती मगर उनमें जोश ही नहीं आता।

उनका लंड थोड़ा बहुत सर उठाता मगर कड़क नहीं होता और वैसे ही ढीला का ढीला रहता, हाँ मेरे चूसने से ढीला ही स्खलित हो जाता और मैं मन ही मन में रोकर रह जाती।
पति भी मेरी चूत को चाट कर या उंगली डाल कर मुझे स्खलित कर देते, मगर लंड से चुद कर स्खलित होने वाला स्वाद नहीं आता, या यूं समझो के लंड से स्खलित हुये तो मुझे अरसा बीत गया, मगर इसके बावजूद भी मैंने कभी बाहर मुँह नहीं मारा, चाहे मेरे ऑफिस के भी बहुत से मर्द मुझ पर लाइन मारते थे।

कई बार सोचा भी कि ‘चलो ये वाला अच्छा है,सुंदर है, जवान है, ये मेरे तन की आग बुझा सकता है!’ मगर नहीं, फिर सोचा अगर कल को बाहर पता चल गया तो ऑफिस में भी बदनामी होगी, और मेरा घर भी टूट सकता है।
इसी वजह से मैं अपने मन को रोक लेती और शाम को घर जाकर उसके नाम से हस्तमैथुन करके अपनी इच्छा और ज़रूरत दोनों को पूरा कर लेती।

वक़्त बीतता गया, एक दिन हमारा एक भतीजा, इनकी बहन का लड़का वीरेन, जो 22 साल का था और गाँव में रहता था, काम ढूंढने मुंबई आया और हमारे ही घर में रुका।
देखने में वो ठीक ठाक था, गंवारपन उसके चेहरे से ही झलकता था, तो मेरे जैसी मॉडर्न औरत के लिए उसकी कोई वैल्यू नहीं थी।
मैंने उसे कभी भाव नहीं दिया।

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सहेली से पति की अदला बदली

 
बाजार में अचानक मेरी निगाह तृप्ति पर पड़ी.. उसे देखते ही मैं जोर से चिल्लाई…
मेरे पति रवि भी मेरे साथ थे… कहने लगे- यह क्या बेबकूफी है? इतनी जोर से कोई चिल्लाता है?
मैंने कहा- मेरी कॉलेज की दोस्त है पूरे पांच साल बाद मिली है।
हम दोनों बाजार में ही एक दूसरे के गले मिली।
तृप्ति भी अपने पति राहुल के साथ थी।

मेरा घर बाजार के पास में ही था, हम चारों घर लौट आये।
हम दोनों सहेलियाँ एक दूसरी से बातों में चिपक गई।
पिछले पांच साल का एक एक हिसाब लेना था।

कॉलेज में तृप्ति मुझसे एक साल सीनियर थी, उसने मेरी रैगिंग ली थी और पहली बार चूत का स्वाद भी चखाया था।
तीन साल की पढ़ाई में हमने सेक्स का हर पाठ पढ़ लिया था।
शादी के बाद तृप्ति मुंबई चली गई थी।
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तृप्ति कनखियों से रवि को देख रही थी, मुझसे कहने लगी- ..यार रेनू.. शादी के बाद से एक ही लंड का स्वाद लेते लेते थक गई हूँ, थोड़ी हेल्प कर दे?
मुझे भी तृप्ति के पति राहुल में दमखम दिख रहा था।
तृप्ति समझ गई, कहने लगी- …यार इन तिलों में तेल नहीं निकलेगा। कितनी भी कोशिश कर ले, राहुल तेरी तरफ देखेगा भी नहीं।
तृप्ति की बात को मैंने चुनौती के रूप में लिया, मैंने उससे कहा कि जल्दी ही मैं उसे फोन करूंगी।

तृप्ति के जाने के बाद मैंने रवि से बात की और कहा कि मुझे हारना नहीं है।
मेरी बात सुन कर रवि ने तृप्ति और राहुल को चंडीगढ़ बुलाने को कहा।
इसके कुछ दिन बाद ही हम चारों चंडीगढ़ में थे।

हम दिन भर चंडीगढ़ के नजारे लेते रहे, रात को होटल में लौटे तो रवि सीधे बाथरूम में घुस गये, नहा धोकर कर तौलिया लपेट कर बाहर आये।
उसके बाद मैं नहाने चली गई, मैं भी तौलिया लपेट कर ही बाहर निकली।

बाहर आकर देखा तो एक सोफे पर रवि और राहुल बैठे बतिया रहे हैं।
रवि ने तौलिया ही लपेट रखा था, सामने सोफे पर तृप्ति बैठी थी, मैं भी उसके पास बैठ गई।

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अनजान लड़के से मेरी चूत चुद गई

 
मेरा नाम कविता कपूर है, मैं 22 साल की हूँ, लॉ की स्टूडेंट हूँ। पढ़ाई में होशियार हूँ, अच्छे घर की हूँ, बात पिछले महीने की है, मैंने और मेरी रूम मेट जिया दोनों जालंधर में पी जी रहती थी, सुबह से लेकर रात तक हम दोनों साथ रहती, क्योंकि एक ही क्लास में पढ़ती थी, शाम को एक ही रूम में रहती थी, तो दोनों में बहुत ही अच्छी दोस्ती थी, अब भी है।

करीब दो साल पहले मेरा एक बॉय फ्रेंड था, जिसके साथ मैंने 4-5 बार सेक्स भी किया था, मगर जब मैं डिग्री करने जालंधर आ गई, तो उससे दूर होने के वजह से सिर्फ फोन पे ही दोस्ती रह गई।
मगर जिया का हमारी ही यूनिवर्सिटी के एक लड़के से चक्कर चल पड़ा और दोनों अपनी लव लाईफ एंजॉय कर रहे थे।

जिया अपने यार के साथ जाकर 5-6 बार सेक्स भी कर चुकी थी, जब भी करके आती आकर मुझे बताती कि क्या क्या किया और कैसे कैसे किया, मेरा भी बड़ा मन करता, मगर मेरा तो कोई बॉय फ्रेंड ही नहीं था, और एक के होते दूसरे किसी से यारी लगाने का दिल सा नहीं किया।

खैर ऐसे ही वक़्त निकलता गया।
एक दिन यूनिवर्सिटी से वापिस आई तो शाम का खाना खाकर हम वैसे ही अपने अपने बेड पे लेटी हुई थी, जिया अपने बॉय फ्रेंड से बात कर रही थी, मैं अपने से।
करीब साढ़े नौ बजे तक हम अपने अपने फोन पे बिज़ी रही।

जब फोन पे बात खत्म हुई तो जिया मेरे पास आई और बैठ कर हम दोनों अपने अपने यारों की बात करने लगी। मेरे बॉय फ्रेंड ने भी मुझसे बहुत से सेक्सी सेक्सी बातें की थी, जिस वजह से मेरा मन भी बहुत मचल रहा था।

ऐसे ही बात करते करते जिया ने पूछा- सुन कव, सेक्स करेगी।
मैंने थोड़ा हैरान होते हुये पूछा- सेक्स, और अब?
‘हाँ, अब मेरा बॉय फ्रेंड आ रहा है, चुपके से दीवार फांद कर अंदर आएगा।’ जिया बोली।
‘मगर वो तो तेरा यार है, मैं उससे क्यों करूँ?’ मैंने कहा।
‘तो तेरे लिए अलग से यार मंगा लूँ, बोल, जस से कह दूँगी, अपने किसी दोस्त को ले आएगा!’ जिया ने कहा।

मैंने कहा- अरे तू पागल हो गई है क्या, ऐसे कैसे किसी से भी सेक्स कर लूँगी मैं?
‘देख यार जस यहाँ आएगा, मुझसे तेरे सामने मेरे ही बेड पे सेक्स करेगा, देख कर तेरा भी मन मचलेगा, तो क्यों न दोनों सहेलियाँ, एक साथ एंजॉय करें, मैं उधर तू इधर!’ जिया ने प्रोपोज़ल रखी।

मैं कुछ सोचने लगी तो जिया फिर बोली- देख दिल तो तेरा भी कर रहा है, अगर लड़का पसंद न आया, तो मत करना अगर पसंद आ गया तो कर लेना, किसको पता चलने वाला है और हमारे सिवा और कौन देख रहा है, क्यों क्या बोलती है?’
जिया ने कहा तो मैंने भी अनमने से हा कर दी- ठीक है, अगर लड़का ठीक ठाक हुआ तो देख लेंगे।

जिया ने अपने बॉय फ्रेंड को फोन पे सब बता दिया।
करीब आधे घंटे बाद, दरवाजे पे दस्तक हुई, जिया ने उठ कर दरवाजा खोला, मैं अपने ही बिस्तर पे बैठी रही, दो लड़के अंदर आए, एक जिया का बॉयफ्रेंड था, जिसे अंदर आते ही जिया ने गले लगा लिया और उस लड़के ने भी जिया के होंठों पे ज़ोर से किस किया।

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