फरवरी 2016 की लोकप्रिय कहानियाँ

(Best Stories Published In February 2016)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

प्रिय अन्तर्वासना पाठको
फरवरी महीने में प्रकाशित कहानियों में से पाठकों की पसंद की पांच कहानियां आपके समक्ष प्रस्तुत हैं…

मेरी कलाइंट ने अपने पति से मुझे चुदवा दिया

 

मैं संजय.. दिल्ली का रहने वाला हूँ, मैंने हमेशा ही अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ी हैं और पढ़ता रहता हूँ। मैंने सोचा कि मैं भी अपनी आपबीती सुनाऊँ और आपसे शेयर करूँ।
मैं एक प्राइवेट जॉब करता हूँ, मेरी वाइफ दीपिका एक ब्यूटीशियन है, वो डोर टू डोर जाकर काम करती है, इस काम से उसका मिलना बहुत ही लड़कियों और औरतों से होता है।

उसकी ये ग्राहक उससे अलग-अलग तरह के काम करवाती हैं.. जैसे बॉडी मसाज.. फेशियल.. वैक्सिंग.. इसके इलावा कई तो अपनी चूत तक के बाल भी साफ़ करवाती हैं।
इस काम में कुछ देर के लिए तो सभी इसके सामने कुछ देर के लिए नंगी तक हो जाती हैं। ये घर आकर मुझे बताती है कि किसने किस तरह करवाया और क्या-क्या करवाया.. जिसे सुन कर मेरा लंड पैंट में खड़ा हो जाता है। मैं उससे पूछता हूँ कि क्या कोई औरत किसी मर्द से भी मसाज करवाने को कहती है?

तो दीपिका बोलती है- तुम तो हमेशा अपना जुगाड़ बनाने को लगे रहते हो।

हम दोनों भी खूब चुदाई करते हैं और कपल स्वैपिंग के बारे में भी सोचते हैं परन्तु कभी कर नहीं पाए। इसी लिए मैं अपनी वाइफ से कहता हूँ कि तुम्हारी कोई दोस्त ऐसी है.. जो पति के सामने हमारे साथ चुदाई करना चाहे और हम अपने साथी अदल-बदल कर चुदाई करें और मज़ा आ जाए।

तो वो बोलती है- कोई हमारे जैसा सोचने वाला भी तो हो।

मेरी वाइफ की एक सहेली है.. जिसका नाम दीप्ति है और उसके पति का नाम सुनील है। उनकी एक बेटी है और हमारा एक बेटा भी है.. दोनों बहुत अच्छे दोस्त भी हैं। वो दीपिका की कस्टमर भी है और वो दीपिका से अपनी बॉडी मसाज, फेशियल और चूत के बाल तक साफ़ करवा लेती है।

पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…
 

अपने ही पति का बलात्कार

 

यह बात मेरी शादी के कुछ समय बाद की है। जब मैंने अपनी अन्तर्वासना कामेच्छा पूरी करने के लिए अपने ही पति का बलात्कार किया।
कैसे किया, यह भी सुनिए।

मेरी शादी को करीब 4 महीने हुये थे, हम दोनों मियां बीवी अलग अलग प्राइवेट कम्पनीज़ में जॉब करते थे। शादी के बाद भी मैंने जॉब नहीं छोड़ी। इसका फायदा यह हुआ कि घर में हम दोनों के पास इतने पैसे हो जाते थे कि खुल कर खर्च करते थे, मगर दिक्कत यह थी कि दोनों के काम में बिज़ी होने के कारण दोनों एक दूसरे को कम ही टाइम दे पाते थे।

ऐसे में जहाँ एक आम शादीशुदा जोड़ा शादी के बाद 4 महीने में 400 बार सेक्स लेता है, हम तो बस 20-25 बार ही कर पाये थे। अब उम्र चढ़ती जवानी, ऊपर से मुंबई में अपने फ्लैट में रहना, किसी की भी कोई दखलअंदाजी नहीं, तो हमारे पास तो एंजॉय करने का वक़्त ही वक़्त होना चाहिए था!
मगर असल में था बिल्कुल इसके उल्टा।

सुबह 9 बजे घर से निकलते, शाम को 7-8 बजे घर में आते और प्राइवेट कंपनी में तो काम की इतनी टेंशन होती है कि बस इतना ज़्यादा थके होते कि बाहर से ही खाना मँगवाते और सो जाते।
बहुत बार तो ऐसा भी होता कि दोनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे की बाहों में लेटे लेटे एक दूसरे को देखते सहलाते सो जाते, दोनों में से किसी में भी इतनी ताकत न बचती के सेक्स कर ले।
सिर्फ छुट्टी वाले दिन ही दिन में 3-4 बार कर लेते।

ऐसे ही चलता रहा मगर न जाने क्यों इस बार मेरे पति ने छुट्टी वाला दिन भी ऐसे ही बहाने से बना कर निकाल दिया।
मैं शनिवार को ही दफ्तर से मूड बना के आई थी कि पति से कहूँगी के खाना बाद में खाएँगे, पहले एक ट्रिप लगाते हैं, उसके बाद खाना खाएँगे, फिर सोने से पहले एक बार और करेंगे और सो जाएंगे।

मगर पतिदेव दफ्तर का काम घर पे उठा लाये, बहुत ज़रूरी काम है, कह कर देर रात तक लगे रहे, मैं बिस्तर में उनके इंतज़ार में नंगी लेटी लेटी सो गई।
सुबह फिर किसी दोस्त के पास चले गए, दोपहर को आए, तो फिर काम।
मुझे बड़ा गुस्सा आया कि इतना काम!

पूरी कहानी यहाँ पढ़िए…
 

एयर पोर्ट पर आलिया की चूत गान्ड चुदाई

 

बॉलीवुड: कल्पना की उड़ान

‘माफ कीजिए, क्या आप मेरे साथ आएँगी?’ एयरपोर्ट पर अपनी माँ के साथ लाइन में खड़ी हुई आलिया से सुरक्षाकर्मी ने पूछा।
औसत कदकाठी वाला सुरक्षाकर्मी बहुत ज्यादा आकर्षक नहीं था, उसने सुरक्षाकर्मियों वाली एक विशेष वर्दी पहनी हुई थी लेकिन उसके साथ उसकी बंदूक, हथकड़ी, यहाँ तक कि नाइट स्टिक भी नहीं थी।

पर आलिया के पास उसे दिखाने के लिए बहुत कुछ था। उसने कैजुअल ड्रैस में नीची कमर वाली नीली जींस और कसी हुई गुलाबी रंग की टीशर्ट पहनी हुई थी जिसमें से उसका चिकना पेट और आकर्षक मांसल बूब्स साफ दिख रहे थे।
उसके बाल छोटे कटे हुए एवं बेहतरीन तरीके से उसकी नई रॉक स्टाइल के अनुसार बने हुए थे। वह अपना पूरा वजन अपने बायें नितम्ब पर डाले हुए मुड़ कर खड़ी हुई थी।

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