घर की लाड़ली-17

(Ghar Ki Ladli- Part 17)

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मां और उसके दोनों बेटे आपस में चुदाई करने के बाद बाथरूम में गए और नहाने के बहाने फिर से कई बार अलग-अलग मुद्रा में चुदाई की. फिर सब कपड़े पहनकर सामान्य माँ-बेटों की तरह तैयार हो गए क्योंकि मयूरी के घर आने का वक्त हो चला था. थोड़ी देर में मयूरी घर आई और अपने कमरे में चली गयी. कमरे में वो और उसके दोनों भाई अकेले थे. और थकान के कारन शीतल अपने कमरे में आराम कर रही होती है. मयूरी अकेले में अपने भाइयों से पूछती है:

मयूरी- फिर… आज हुआ कुछ?
रजत- हाँ दीदी.. आज तो हम बहनचोद से मादरचोद भी बन गए.
मयूरी- अच्छा? चलो… फिर इधर आओ और मेरी गांड चाटो… मुझे तुमसे अपनी गांड चटवाने में बड़ा आनद आता है.
विक्रम- हाँ… और अब तो घर में हमारे अलावा सिर्फ माँ है… और उनसे डरने की कोई जरूरत नहीं है.
मयूरी- फिर भी… जब तक उनको अपने आप पता नहीं चलता… हम लोग नहीं बताएँगे.
रजत- पर क्यूँ दीदी… बड़ा मजा आएगा अगर हम चारों आपस में एक साथ चुदाई करेंगे.
मयूरी- करेंगे मेरे भाई… पर तू थोड़ा सब्र रख… मेरा जन्मदिन आ रहा है… तुझे ये तोहफा मैं उसी दिन दूंगी.
विक्रम- अरे हाँ… कल तो तुम्हारा जन्मदिन भी है न… वाओ!

फिर तीनों भाई-बहन ने आपस में खूब चुदाई की.

शाम को शीतल के जागने के बाद मयूरी उससे मिली और शीतल ने पूरे विस्तार से उसे अपने दोनों बेटों से चुदने की गाथा बताई और दोनों माँ बेटी बहुत खुश हुई क्योंकि दोनों ने अपनी जंग जीत ली थी. शीतल को अब डर नहीं था कि अगर उसके पति उसको अपने बेटों से चुदवाती हुई अवस्था में देख भी लेता है तो वो उसको अपनी बेटी से चुदाई की दुहाई देकर चुप करा सकती है.

पर मयूरी के दिमाग में तो अलग ही खेल चल रहा था. वो चाहती थी कि पूरा परिवार एक साथ चुदाई करे, कोई किसी को भी चोदे वो भी बिना रोक-टोक के. ये सब उसने अकेली प्लान किया था और उसने सारी बात अपने परिवार में किसी को भी बताई नहीं थी. वो सब को सरप्राइज कर देना चाहती थी और इसीलिए उसने सबको एक दूसरों से चुदवा भी दिया था पर फिर भी किसी को अपने सिवा किसी और की चुदाई के बारे में कुछ जानकारी नहीं थी, जैसे कि विक्रम और रजत को मयूरी और शीतल की बीच हुई चुदाई और मयूरी और अशोक के बीच हुई चुदाई के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. वैसे ही शीतल को मयूरी और विक्रम-रजत के साथ हुए चुदाई की कोई जानकारी नहीं थी.

पर ये सारे राज़ वो जल्दी ही सबके सामने खोलने वाली थी. खैर जैसे-तैसे शाम हुई, अशोक घर आया और अपने कमरे में आराम करने चला गया. तब तक शीतल ने खाना बनाने का काम लगभग ख़त्म कर लिया था.
तभी मयूरी रसोई में पहुँची और पीछे से शीतल की दोनों चूचियों को जोर से दबाते हुए पूछने लगी- और मेरी चुड़क्कड़ माँ… खाना बन गया?
शीतल- हाँ मेरी चुड़क्कड़ बेटी… खाना बन गया.

मयूरी- फिर जाओ और आराम से अपने बेटों से चुदवाओ.
शीतल- अरे पर तुम्हारे पापा तो अभी घर में हैं… कैसे जाऊँ?
मयूरी छेड़ते हुए- क्यूँ? अपने पति की लंड की याद आ रही है?
शीतल- अरे नहीं… नहीं… पर उन्होंने देख लिया तो?
मयूरी- देख लिया तो क्या? तुम डरती क्यूँ हो? वो भी तो बेटीचोद बन चुके हैं.
शीतल- हाँ… पर मुझे अच्छा नहीं लगता.
मयूरी- ओह… मेरी सती-सावित्री माँ… अपने दो-दो जवान बेटों का लंड अपने चूत और गांड में एक साथ ले रही हो और कहती हो कि अच्छा नहीं लगता?
शीतल- अरे वो बात नहीं है पर मैं… तुम समझो ना?
मयूरी- अच्छा ठीक है… मैं समझ गयी… एक तुम एक अच्छे घर की औरत हो, रंडी नहीं हो… इसलिए तुम्हें अपने पति के सामने अपने बेटों से चुदवाने में अच्छा नहीं लगता.
शीतल- हाँ… बिल्कुल!
मयूरी- कोई बात नहीं… तुम घबराओं नहीं… तुम्हें जल्दी ही रंडी बना देंगे और ये सारी शर्म-हया चली जाएगी तुम्हारी… पर अभी के लिए तुम जाओ और निश्चिन्त होकर अपने बेटों के लंड और उनकी जवानी का मजा लो… तुम्हारे पति को मैं देखती हूँ.
शीतल- हाय मेरी प्यारी बेटी…

और ऐसा कहकर शीतल के होंठों पर एक प्यारा सा चुम्बन देकर अपने बेटों के कमरे में चली गयी और मयूरी ने अशोक के कमरे का रुख किया.

शाम के करीब साढ़े-सात या आठ बज रहे होंगे. मयूरी अशोक के कमरे में घुसते ही दरवाजा अंदर से बंद करके अपने कपड़े उतारकर फेंकने लगी. उसको देखकर अशोक ने भी बिना वक्त गंवाए अपने कपड़े उतार कर फेंक दिए.

मयूरी ने बड़े जोश में आकर अपने एकदम आदमजात नंगे बाप को जाकर एक जोरदार चुम्बन दिया. दोनों के बीच कोई वार्तालाप नहीं हुआ पर जैसे दोनों को पता था कि आगे क्या करना है. चुम्बन के साथ-साथ मयूरी अपने पापा का लंड अपने हाथ में लेकर उसको मसलने और आगे पीछे करने लगी. अशोक भी कहाँ पीछे रहने वाला था, वो भी उसकी चूचियों और दूसरे हाथ से कभी उसकी कोमल गांड तो कभी माखन जैसी जांघें तो कभी मलाई जैसी चूत को मसलता रहा.

दोनों एक-दूसरे को उत्तेजित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे. करीब दस मिनट तक एक दूसरे पर इसी तरह प्रहार करने के बाद दोनों ने 69 की पोजीशन ली और अब मयूरी अपने पापा का लंड चूस रही थी और अशोक अपनी जवान बेटी की चूत को जोर-जोर से चाट रहा था. इसी तरह लगभग बीस मिनट तक एक-दूसरे को जोर जोर से चूसने और चाटने के बाद अशोक ने अपना लोहे जैसा खड़ा लंड अपने जवान बिनब्याही बेटी की चूत में डाला और जोर-जोर से पेलने लगा.

काफी देर तक दोनों बाप बेटी के बीच बहुत जोर को चुदाई चली. दोनों के मुँह से आवाज़ें निकल रही थी और दोनों बेपरवाह होकर एक दूसरे को चोदने में व्यस्त थे. फिर अंत में अशोक ने अपने लंड से निकले वीर्य को अपने बेटी की चूत में ही गिरा दिया और उसी वक्त मयूरी के चूत ने भी पानी छोड़ दिया.

दोनों बिस्तर पर तेज़-तेज़ हाँफते हुए गिर पड़े. फिर मयूरी ने बातचीत शुरू की- पापा…
अशोक- हाँ बेटा?
मयूरी- आपको अफ़सोस है ना कि मैं आपको मेरी कुंवारी चूत के साथ नहीं मिली… और आप मेरी चूत का सील नहीं तोड़ पाए?
अशोक- ऐसी बात नहीं है… पर हाँ, अगर ऐसा होता तो मुझे और मजा आता.

मयूरी- फिर आपके लिए एक खुशखबरी है पापा.
अशोक- और वो क्या है?
मयूरी- मेरी चूत तो आपको सील तोड़ने को नहीं मिली पर आप मेरी गांड का सील तोड़ सकते हैं… उसमें आज तक किसी का लंड नहीं गया.
अशोक ख़ुशी से- क्या सच में?
मयूरी- हाँ मेरे चोदू पापा… सच में!
अशोक- क्या बात है!

मयूरी- फिर कब तोड़ेंगे आप अपनी बेटी की गांड की सील पापा?
अशोक- बेटा नेकी और पूछ-पूछ? अभी तोडूंगा… पर तुम्हें थोड़ा दर्द होगा… लेकिन बाद में बहुत मजा आएगा… ये मैं वादा करता हूँ.
मयूरी- पापा… आपकी ख़ुशी के लिए आपकी ये बेटी कुछ भी कर सकती है.
अशोक- फिर ठीक है… जा और जाकर तेल ले आ!
मयूरी- ओके पापा!

और मयूरी वहीं टेबल पर पड़े कटोरी में रखा तेल ले आई. वापिस आकर उसने अपने बाप का लंड देखा तो वो फिर से खड़ा हो चुका था. अशोक ने अपने बेटी को बिस्तर पर झुकाया और उसकी गांड को अपने जीभ से खूब चाटा. मयूरी को अपने गांड चटवाने में बड़ा मजा आया.

फिर अशोक ने उसकी गांड के छेद पर बहुत सारा तेल लगाकर अपनी उंगली से उसकी गांड की छेद को थोड़ा चौड़ा किया. थोड़ी देर तक उसने अपनी उंगली से मयूरी की गांड को चोदा जिससे उसकी गांड का छेद थोड़ा खुल गया. मयूरी को अभी तक ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था.
फिर अशोक ने फिर से उसकी गांड और अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगाया और अपना लंड अपने बेटी की मखमल जैसी गांड पर रखकर सेट करके पूछा- बेटी, तुम तैयार हो?
मयूरी- कब से पापा… मैं तो हमेशा से चाहती थी कि आप मेरी गांड उसी तरह मारें जैसे आप मम्मी की मारते हो.
अशोक- ठीक है फिर… थोड़ा दर्द होगा…
मयूरी- आप डाल दो पापा… मैं सारे दर्द बर्दाश्त कर लूंगी… अगर मैं रोऊँ भी तो आप रुकना मत… आज मेरी गांड को अपने लंड से चोद दो पापा.

अशोक ने अपने दोनों हाथों से मयूरी की कमर पीछे से पकड़ कर एक जोरदार झटका उसकी गांड पर मारा. उसका लंड चिकनाई की वजह से झट से लगभग आधा मयूरी की गांड में चला गया. मयूरी दर्द के मारे बिलबिला उठी, उसकी आंखों से आंसुओं की धारा निकल पड़ी.
पर अशोक अभी रुकने के मूड में नहीं था, उसने एक और झटका मारा और बाप का लंड जड़ तक बेटी की गांड के अंदर चला गया. मयूरी को और दर्द हुआ और वो रो पड़ी.

पर अशोक तो जैसे निर्दयी हो चुका था, उसने अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला और फिर से एक जोरदार झटका दिया. मयूरी दर्द कर मारे कराहती रही और अशोक झटके पर झटका देता रहा.
करीब पांच मिनट के बाद मयूरी की गांड अब चौड़ी हो चुकी थी और उसका दर्द कम चुका था. अब मयूरी को अपनी गांड मरवाने में मजा आने लगा और उसका दर्द आनन्द की आहों में परिवर्तित हो गया- आ… ह… आह… पापा…
अशोक झटके मारते हुए- हुम्म्म… हुम्म्म… हुम्म्म…
मयूरी- मजा आ रहा है पापा… आह… मुझे पता नहीं था कि गांड मरवाने में इतना मजा आता है… आह.

पर अशोक तो जैसे कोई बात सुनने ही नहीं वाला था, वो जोरदार झटके पर झटके मयूरी की गांड पर तब तक मारता रहा जब तक उसके लंड से वीर्य नहीं निकलने की स्थिति में आ गया. लगभग 15 मिनट तक अपने बेटी की कुंवारी मखमल जैसी कोमल गांड को बड़ी ही निर्दयता के साथ चोदा. चोद कर थकने के बाद जब उसका लंड पानी छोड़ने वाला था तो उसने अपना लंड उसकी गांड से निकाला और मयूरी को पलट कर सीधा किया और अपना लंड सीधा अपने बेटी के मुँह में जबरदस्ती डाल दिया.

मयूरी को अब अपनी गांड की महक और स्वाद के साथ अपने बाप का लंड का स्वाद आने लगा. थोड़ी ही देर में अशोक के लंड से वीर्य की बाढ़ निकली और मयूरी का मुँह उससे भर गया.
फिर दोनों बाप बेटी बिस्तर पर फिर से हांफते हुए गिर गए.

इस बार अशोक ने बातचीत शुरू की- बेटी मजा आया… अपनी गांड मरवाकर?
मयूरी- हाँ पापा… बहुत मजा आया… पर दर्द भी बहुत हुआ.
अशोक- वो तो मैंने पहले ही कहा था… कि दर्द होगा.
मयूरी- पर पापा… आप पर तो जैसे भूत सवार हो गया था… आपको मेरा दर्द दिखाई ही नहीं दे रहा था.
अशोक- बेटा… पहले बार गांड की चुदाई की वक्त थोड़ा बेरहम होना पड़ता है नहीं तो काम को अंजाम नहीं मिल पाता.
मयूरी- अच्छा… तो आपको मजा आया पापा… अपनी बेटी की गांड मारकर?
अशोक- हाँ बेटा… बहुत ज्यादा मजा आया… इतना मजा तो तुम्हारी माँ की गांड मारकर भी कभी नहीं आया.
मयूरी- थैंक यू पापा… आई लव यू.

और मयूरी अपने नंगे बाप से लिपट गयी.

कहानी जारी रहेगी.
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