वृंदा

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आकर्षण- 7

बीच बीच में वो मुझे प्रेम भरे चुम्बन देता… धीरे धीरे उसके धक्के तेज़ होने लगे … चूत में मुझे खिंचाव महसूस होने लगा… खुद ब खुद मैं उसके धक्कों से ताल से ताल मिला कर… उसका ज्यादा से ज्यादा लण्ड अपने भीतर लेने की कोशिश करने लगी… मेरी कोमल काया, उसके पसीने से भरे […]

आकर्षण- 6

लेखिका : वृंदा मुझे अपने टांगों के बीच कुछ रिसता हुआ सा महसूस हो रहा था… मेरी अन्तर्वासना मुझे सारी हदें भूल जाने को कह रही थी.. मैं इसी उधेड़बुन में थी कि तभी वो आगे बढ़ा, उसने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़कर.. मुझे ज़ोरदार चुम्बन करने लगा.. मैं उसके होंठों […]

आकर्षण-5

लेखिका : वृंदा वेदांत मेरे पास आया.. उसने मुझे गले लगा लिया.. उसकी तरफ देख कर बोला… : दोस्त है यह मेरी, प्यार करता हूँ इससे.. हाथ तो क्या आँख भी उठाई ना.. तो उस दिन के बाद किसी और को नहीं देख पायेगा तू…!!! मेरी आँखें भर आई थी… पर साथ साथ होंठों पर […]

आकर्षण-4

लेखिका : वृन्दा अब धीरे धीरे मेरे शरीर में भी बदलाव होने लगे.. झांघें जो पहले तिलियों सी पतली थी अब थोड़ी भर गई.. ऊपरी हिस्से में भी काफी बदलाव हुए… छाती.. स्तनों के रूप में उभरने लगी.. एक गोल्फ बाल जितना आकार लेने लगी… और मैं खुद को अच्छी लगने लगी.. घर में ज्यादातर […]

आकर्षण-3

लेखिका : वृन्दा बस इसी तरह समय बीतता रहा.. हम समय के साथ बड़े हो रहे थे.. हम दोनों ही यौवन द्वार पर खड़े थे… वो दिन मेरे लिए बेहद कठिन था.. मेरे जीवन की पहली माहवारी.. सुबह से ही टांगों और पेट में दर्द हो रहा था.. जैसे कोई आरी से काट रहा हो… […]

आकर्षण-2

वेदांत : अब दर्द कैसा है .. खाना खा लिया..?? मैंने ना में सर हिला दिया.. वेदांत : आ जा ! मैं भी अकेला हूँ ! साथ में खाते हैं… मैंने लंच उठाया और उसकी क्लास में चली गई.. हमने पहली बार साथ लंच किया… वो बड़ा ही मासूम लग रहा था.. जाने वो क्या […]

आकर्षण-1

मैं वृंदा, एक बार फिर से हाज़िर हूँ आपके सामने एक नई कथा लेकर ! आपने मेरी पिछली कहानी राजा का फ़रमान-1 पढ़ी होगी, काफी अच्छा लगा यह जानकार कि आप सबको वो कहानी बेहद पसंद आई ! “राजा का फरमान” मेरी पहली कहानी थी, ऐसे में हिंदी लेखन त्रुटियों के लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ […]

राजा का फ़रमान-5

On 2009-05-10 Category: चुदाई की कहानी Tags:

मैं मदमस्त हुई अपनी जवानी का रस लुटा रही थी.. अब मैं भी मज़े लेने लगी थी.. मेरे अंदर की छिपी राण्ड अब बाहर आकर अंगड़ाइयाँ लेने लगी थी… मेरी आहें दरबार में गूँज रही थी.. कि तभी अचानक राजा ने लण्ड निकाल कर मेरी गाण्ड में पेल दिया… राजा अब झड़ने वाला था… राजा […]

राजा का फ़रमान-4

On 2009-05-09 Category: चुदाई की कहानी Tags:

राजा ने फरमान सुनाया- इस लड़की ने मुझसे चुदने से इनकार किया है, इसलिए इसकी इसी दरबार में बोली लगेगी, ऐसी बोली जैसी आज तक किसी की नहीं हुई होगी। इस बोली के बाद इसका इसी सभा में चीरहरण होगा, उसके बाद यह रखैल तो क्या किसी की दासी बनने के लायक भी नहीं रह […]

राजा का फ़रमान-3

On 2009-05-08 Category: चुदाई की कहानी Tags:

राजा : मैं बेगैरत..? मैं बुज़दिल..? तो तू क्या है? रण्डियो की रानी? जब सिपाही तुझे मसल कुचल रहे थे, तब कहाँ था तेरा सतीत्व..!!! मैं : वो तेरे आदेश का पालन कर रहे थे और अगर मैं साथ न देती तो तू उनका क़त्ल करवा देता ! मेरी वजह से किसी बेक़सूर की जान […]

राजा का फ़रमान-2

यह कहते ही राजा ने मेरी चूचियों पर से कपड़ा नीचे सरका दिया। मैंने बिन कंधे का टॉप पहना था और ब्रा तो रास्ते में ही खुल चुकी थी, सो चूचियाँ उसके सामने झूलने लगी और राजा की आँखों में लालच आने लगा...

राजा का फ़रमान-1

वृन्दा नमस्कार ! मैं वृंदा पहली बार अन्तर्वासना पर अपना एक स्वप्न प्रस्तुत कर रही हूँ, मुझे अक्सर इस तरह के स्वप्न आते हैं ! और मैंने आज तक किसी को इनके बारे में नहीं बताया है, आज पहली बार बहुत हिम्मत करके लिखने का प्रयास कर रही हूँ ! इस स्वप्न में मैं एक […]

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