विजय पण्डित

rss feed

यह कैसा मोड़-2

On 2010-10-03 Category: चुदाई की कहानी Tags:

प्रेषक : विजय पण्डित “यह तो गार्डन है… किसी ने देख लिया तो बड़ी बदनामी होगी…” “तो फिर…?” “मौका तलाशते हैं… किसी होटल में चलें…?” “अरे हाँ… मेरी सहेली का एक होटल है वहाँ वो लंच के बाद आ जाती है… उसके पति फिर लंच पर चले जाते हैं… वहाँ देखती हूँ…” रोहित और शिखा […]

यह कैसा मोड़-1

On 2010-10-02 Category: चुदाई की कहानी Tags:

प्रेषक : विजय पण्डित सिनेमा हॉल में महक का हाथ मेरे हाथ के ऊपर आ गया। मुझे एक झटका सा लगा। मैंने धीरे से महक की तरफ़ देखा। उसकी बड़ी बड़ी आँखें मेरी तरफ़ ही घूर रही थी। फिर उसने बलपूर्वक मेरा हाथ मेरी सीट पर ही गिरा लिया ताकि एकदम कोई देख ना सके। […]

प्यार से तृप्त कर दो

On 2010-08-18 Category: पड़ोसी Tags:

प्रेषक : विजय पण्डित विजय शर्मा, अपना पहली चुदाई का सच्चा अनुभव बता रहे हैं। उन्हीं की जुबानी और मेरी लेखनी, कुछ इस तरह से है … मेरे कार्यालय के तीन अफ़सरों ने मिलकर एक बड़ा मकान ले लिया था। यह मकान दो मंजिला था। नीचे के भाग में हमने एक हमारे ही कार्यालय के […]

मैं चुप रहूँगा

कॉलेज में हड़ताल होने की वजह से मैं बोर हो कर ही अपने घर को कानपुर चल पड़ा. हड़ताल के कारण कई दिनो से मेरा मन होस्टल में नहीं लग रहा था. मुझे माँ की बहुत याद आने लगी थी. वो कानपुर में अकेली ही रहती थी और एक बैंक में काम करती थी. मैं […]

सावन में चुदाई-2

On 2009-01-06 Category: पड़ोसी Tags:

प्रेषक : विजय पण्डित “आह रे, मर जावां रे… विजय, तुझे तो मुझ पर रहम भी नहीं आता?” उसकी सेक्स में बेचैनी उभर रही थी। “रहम तो आपको नहीं आता है … कभी मौका तो दो…” मेरी सांसे तेज होने लगी थी। “किस बात का मौका … बोलो ना?” वो तड़प कर बोली। “आपको चोदने […]

सावन में चुदाई-1

On 2009-01-05 Category: पड़ोसी Tags:

प्रेषक : विजय पण्डित मेरी उम्र 24 वर्ष की हो चली थी। मैंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी। अब तक की जिन्दगी में मैंने बस एक बार गाण्ड मरवाई थी और हाँ, उसी लड़के की मारी भी थी। पर लड़कियाँ मुझसे कभी नहीं पटी थी। यूँ तो मैं देखने में गोरा चिट्टा था, चिकना […]

बेदर्द चाची की अधूरी चुदाई

मेरी चाची मेरे साथ खूब खुल गई थी, मुझे बहुत प्यार करती थी. लेकिन चाची चोदने नहीं देती थी. एक बार मैंने चाची की चुदाई कर ही दी पर वो चुदाई अधूरी ही रही.

भाभी ने मेरी मार दी-2

विजय पण्डित उसकी बड़ी बड़ी आँखें धीरे से खुली और सिसकते हुये बोली- मत देखो मुझे, आह्ह्ह्ह … मैं चुद रही हूँ … आ जाओ, हम एक हो जायें ! हां जानू, देखो तो तुम कितनी हसीन लग रही हो…! राजा, तुम भी कितने मोहक लग रहे हो… मैं मर जाऊँ तुम पर … हाय […]

भाभी ने मेरी मार दी-1

प्रेषक : विजय पण्डित हम दोनों पड़ोसी थे, एक ही कॉलेज में और एक ही क्लास में पढ़ते थे। नोटस की अदला-बदली पढ़ाई में मदद, सभी कुछ साथ ही साथ चलता था। जाने कब धीरे धीरे यही सब कुछ प्रेम-पत्र की अदला-बदली और प्यार में बदल गया। नई और चढ़ती जवानी का प्यार था। इस […]

फ़ार्म हाउस में मम्मी

On 2007-10-13 Category: चुदाई की कहानी Tags:

प्रेषक : विजय पण्डित मेरे पुरखे काफ़ी सम्पत्ति छोड़ गये थे। मेरे पिता की मृत्यु छः-सात साल पहले हो चुकी थी। मेरी मम्मी और उनके मैनेजर ही सारा व्यापार सम्भालते थे। मेरा फ़ार्म-हाऊस घर से बीस बाईस किलोमीटर की दूरी पर था। उसे मैं ही सम्भालता था। फ़ार्म-हाऊस क्या था मेरी ऐशगाह था। मैं दोस्तों […]

बात बनती चली गई-1

विजय पण्डित घर में हम तीन लोग ही रहते थे- मैं, मेरी भाभी और भैया। मेरा अधिकतर समय कॉलेज में या खेलने कूदने में ही निकलता था। मेरा एक दोस्त उस समय एक छोटी सी दुकान से अश्लील पुस्तकें लाया करता था। वो किताब उसने मुझे भी पढ़ने दी। धीरे धीरे मुझे सेक्स की उन […]

कलयुग की लैला-3

On 2006-09-13 Category: चुदाई की कहानी Tags:

विजय पण्डित रूपा और कविता दोनों ही एक साथ आशू से कैसे चुदी- यह आप पहले भाग भाग में पढ़ चुके हैं ! राजेश ने रूपा को चोदा- यह आपने इस कहानी के दूसरे भाग में पढ़ा, अब तीसरा और अंतिम भाग : मन ही मन में वो रूपा और राजेश की चुदाई के बारे […]

कलयुग की लैला-2

On 2006-09-12 Category: चुदाई की कहानी Tags:

प्रेषक : विजय पण्डित रूपा और कविता दोनों ही एक साथ आशू से कैसे चुदी- यह आप पहले भाग भाग में पढ़ चुके हैं ! अब आगे : अगले दिन दोपहर को मौसा जी घर आ चुके थे। उनके साथ उसके एक पुराने मित्र राजेश भी थे। उनके आते ही कविता और रूपा में कुछ […]

कलयुग की लैला-1

On 2006-09-10 Category: पड़ोसी Tags:

अंधेरे में एक साया एक घर के पास रुका और सावधानी से उसने यहाँ-वहाँ देखा। सामने के घर की छोटी सी दीवार को एक फ़ुर्तीले और कसरती जवान की तरह उछल कर फ़ांद गया और वहाँ लगी झाड़ियों में दुबक गया। कमरे में कविता बिस्तर पर लेटी हुई कसमसा रही थी, उसे नींद नहीं आ […]

मेरी प्यासी बहन की चूत

शादी के बाद दीदी और सेक्सी लगने लगी थी। उसकी चूचियां भारी हो गई थी, उसके चूतड़ और भर कर मस्त लचीले और गोल गोल से हो गये थे जो कमर के नीचे उसके कूल्हे मटकी से लगते थे।

बहकता हुस्न

विजय पण्डित अहमदाबाद एक बहुत बड़ा शहर है, साबरमती के कारण उसकी सुन्दरता और बढ़ जाती है। मैं बिजनेस के सिलसिले में यहा आया था। मेरे बिजनेस पार्टनर महेश के यहां मैं रुका हुआ था। उनके घर में मियां बीवी के अलावा तीसरा कोई भी नहीं था। शाम को आठ बजे के बाद वह घर […]

प्यारा दोस्त और दीदी

On 2006-03-23 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

लेखक : विजय पन्डित मैं कॉलेज में आ चुका था। मेरे एक पुराना दोस्त मेरे साथ में मेरे घर में रहता था। हम दोनो पक्के दोस्त थे और एक दूसरे को बहुत चाहते थे। सेक्स के मामले में मैं बहुत झिझकता था। इतनी तो मेरी बड़ी दीदी भी नही शर्माती थी। मैं जब सुबह जागता […]

लौड़ी घोड़ी

On 2005-11-23 Category: भाभी की चुदाई Tags:

मेरी भाभी की उम्र 21 साल की थी, और मैं 18 साल का था। भाभी ने बीए फ़ाईनल की परीक्षा दी थी और मुझे रिजल्ट लेने भाभी के साथ उज्जैन जाना था। उज्जैन में ही कुछ ऐसा हुआ कि मैं और भाभी बहुत ही खुल गए। मैं और मेरी भाभी रतलाम से सवेरे रवाना हो […]

मेरी प्यारी भाभी के गोल गोल चूतड़ और गांड

भाभी मुझसे लगभग बारह साल बड़ी थी। मैं उस समय कोई 18-19 साल का था। घर पर सभी मुझे बाबू कह कर बुलाते थे। भाभी की तेज नजरें मुझ पर थी, वो मेरे आगे कुछ ना कुछ ऐसा करती थी कि मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। वो शरीर में भरी पूरी थी और बदन […]

मस्त पिछाड़ी चुद गई

On 2005-09-10 Category: नौकर-नौकरानी Tags:

लेखक : विजय पंडित मेरा नाम जय कुमार, उम्र बीस वर्ष है। मेरे पापा दुबई में एक पांच सितारा होटल में काम करते हैं। पापा की अच्छी आमदनी है, काफ़ी पैसा घर पर भेजते हैं। घर पर मम्मी और मैं ही हैं। मम्मी एक स्कूल में टीचर हैं और मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ। घर […]

Scroll To Top