बॉय से कॉलबॉय का सफर-6

देसी भाभी बोली- एक औरत पर क्या बीतती है.. जब उसका पति उसे बिस्तर में शान्त नहीं कर पाता। तुम अपने विश्वास के दोस्तों का ग्रुप बना लो। हमारी जैसी प्यासी औरत की कमी नहीं है। मैंने सोचा ‘यार, ये काम भी ठीक है.’ और मैंने अपने चार दोस्तों को अपने साथ मिला लिया और प्यासी जवानी की सेवा शुरु कर दी।

बॉय से कॉलबॉय का सफर-5

मैं मधु के घर उसका मामा का लड़का बन कर पहुँचा, मधु मेरे साथ मेरे कमरे में थी और मैं उसकी चूत में उंगली कर रहा था। मेरे लिए बर्दाश्त करना कठिन हो गया, मैं कपड़े उतारने लगा. आगे क्या हुआ, खुद पढ़ कर मजा लें!

बॉय से कॉलबॉय का सफर-4

मैं मधु के घर उसका मामा का लड़का बन कर पहुँचा मौक़ा पाते ही उसे बांहों में जकड़ लिया, उसकी ठोड़ी पकड़कर ऊपर किया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और मधु के नरम और रसीले होंठों को चूसने लगा।

बॉय से कॉलबॉय का सफर-3

मेरी सेक्स कहानी पढ़ कर एक भाभी मधु ने मुझे मेल की, मधु ने अपनी नीरस सेक्स लाइफ और बेबसी की कहानी सुना कर मुझसे अपनी जिस्म की भूख को शांत करने के लिए कहा तो मैंने उसका ममेरा भाई बन कर उसके घर जाकर रहने की योजना बनाई.

बॉय से कॉलबॉय का सफर-2

अन्तर्वासना पर मेरी सेक्स कहानी पढ़ कर एक भाभी मधु ने मुझे मेल की, वो अपनी मजबूरी से भरी कहानी को मुझे सुना रही थी। वो अपने पति के छोटे से लिंग के बारे में बता रही थी। भाभी ने बताया कि कैसे सुहागरात पर उनके पति उनकी चूत चुदाई करने में नाकामयाब रहे!

बॉय से कॉलबॉय का सफर-1

मेरी इस सेक्सी कहानी में पढ़ें कि मैं कैसे अन्तर्वासना पर मेरी कहानियों के माध्यम से एक जिगोलो बना। मुझे एक लड़की का मेल आया, उसने मुझसे दोस्ती की और सेक्स की इच्छा जाहिर की.

मेरी जवान चूत की धार

मैं बहुत सुन्दर हूँ, घर से निकलती तो मेरी चूचियों और मटकती गाण्ड को देखकर सब का लण्ड खड़े हुए बिन नहीं रह पाता. मैं निकल जाती और वो लण्ड दबाते रह जाते. लेकिन मेरी जवान चूत की धार मेरी फुफेरे भाई ने लगाई अपने फौलादी लंड से!

दोपहर में पूजा का मजा-4

“क्या चूत के बाल साफ कर रही थी जो कट गई?” “ह हाँ भाभी।” “तो इसमें शर्माने की क्या बात है? मैंने भी आज सुबह ही बनाये हैं, दिखाओ, मैं… [Continue Reading]

दोपहर में पूजा का मजा-3

प्रेषक : राज कौशिक मैं बोला- पूजा, दर्द होगा। “पता है पर तुम बस डालो अब।” “ठीक है !” और मैंने एक झटका मारा पर लण्ड फिसल कर गाण्ड के… [Continue Reading]

दोपहर में पूजा का मजा-2

फिर हम रोज बात करने लगे और कई बार फोन सेक्स भी किया। बस अब मैं उसे चोदने का मौका देख रहा था। क्यूँकि पूजा की चूत भी चुदने को… [Continue Reading]

दोपहर में पूजा का मजा-1

दोस्तो, नमस्कार! मैं राज कौशिक एक बार फिर अपनी कहानी आपके सामने पेश कर रहा हूँ। इससे पहले आप मेरी कई कहानियाँ अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ चुके हैं। सभी… [Continue Reading]

सुहागरात का असली मजा-2

सुहागरात का असली मजा-1 तभी भाई आ गये और बोले- क्या बात चल रही है भाभी-देवर में? मैं बोला- तुम्हारे बारे में ही चल रही है। ‘क्या?’ भाभी बता रही… [Continue Reading]

सुहागरात का असली मजा-1

राज कौशिक की तरफ से सभी लड़के-लड़कियों और भाभियों को नमस्कार। आपने मेरी कहानियाँ सुहागरात भी तुम्हारे साथ मनाऊँगा, कुँवारी चूत मिली तोहफ़े में, लक्ष्मी की ससुराल पढ़ी होंगी। यह… [Continue Reading]

लक्ष्मी की ससुराल-2

क्यों नहीं? तो मारो ! मेरा भी मन कर रहा है ! प्रेम तो गाँड को हाथ भी नहीं लगाता। चिन्ता मत करो जानू ! इतने ही पीछे से आवाज… [Continue Reading]

लक्ष्मी की ससुराल-1

हाय दोस्तो, मैं राज एक बार सभी चूत वालियों को लण्ड हिलाकर प्रणाम और सभी लण्डधारियों को नमस्कार। आपने मेरी कहानियाँ “सुहागरात भी तुम्हारे साथ मनाऊँगी और “कुवाँरी चूत मिली… [Continue Reading]

कुँवारी चूत मिली तोहफ़े में

हाय दोस्तो, मैं राज कौशिक अपनी कहानी सुहागरात भी तुम्हारे साथ मनाऊँगी जो चार भागों में प्रकाशित हुई थी, के आगे का भाग भेज रहा हूँ। लक्ष्मी की सगाई हो… [Continue Reading]

सुहागरात भी तुम्हारे साथ मनाऊँगी-4

वो बोली- तुम भी तो अपने कपड़े उतारो ! मैं बोला- मैंने तुम्हारे उतारे हैं, तुम भी मेरे उतार दो। उसने मेरी जैकेट उतारी और मुझे पीछे को धक्का दे… [Continue Reading]

सुहागरात भी तुम्हारे साथ मनाऊँगी-3

जानू जाओ न प्लीज ! अलग सा चेहरा बनाकर बोली। मुझे उसका चेहरा देखकर हँसी आ गई, मैं बोला- रोओ मत ! जा रहा हूँ ! मैं कहाँ रो रही… [Continue Reading]

सुहागरात भी तुम्हारे साथ मनाऊँगी-2

कहानी का पहला भाग : सुहागरात भी तुम्हारे साथ मनाऊँगी-1 मैं बैचेन था। शाम को मैं खेतों पर चला गया। मेरे खेतों पर एक पेड़ था, मैं वहाँ जाकर बैठ… [Continue Reading]

सुहागरात भी तुम्हारे साथ मनाऊँगी-1

मेरा नाम राज कौशिक है। मैं अन्तर्वासना की कहानियाँ लगभग एक साल से पढ़ रहा हूँ। इनमें कुछ सच्ची लगती है तो कुछ झूठी। खैर, जैसी भी हो, मजेदार होती… [Continue Reading]