प्रेम गुरु

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तीन पत्ती गुलाब-41

उसने अपने नितम्बों का संकोचन शुरू कर दिया। सच कहता हूँ उसकी गांड अन्दर से इतनी कसी हुई थी कि लग रहा था जैसे किसी ने मेरे पप्पू की गर्दन दबोच रखी है।

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तीन पत्ती गुलाब-40

नितम्बों पर थप्पड़ लगाना उरोजों की घुन्डियाँ मसलना, गालों को दांतों से काटना। इससे स्त्री का उन्माद बहुत जल्दी अपने चरम पर पहुँच जाता है और स्त्री कामातुर हो जाती है।

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तीन पत्ती गुलाब-39

मैं सीधा खड़ा था और गौरी के पैर मेरे सीने से होते हुए मेरे कन्धों पर आ गए। मैंने थोड़ा सा झुककर एक धक्का लगाया तो मेरा लंड पूरा गौरी के गर्भाशय तक चला गया।

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तीन पत्ती गुलाब-35

भैया ने भाभी का पेटीकोट उतार दिया और दोनों नितम्बों के बीच अपना हाथ फिराते हुए भाभी की गांड के छेद में अपनी अंगुली घुसा दी। भाभी आह … ऊंह करती रही।

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तीन पत्ती गुलाब-34

मैं सोच रही थी समाज में पुरुष और स्त्री के लिए अलग-अलग मानदंड क्यों हैं? पुरुष अपनी मर्जी से किसी से सेक्स कर सकता है पर स्त्री अगर करे तो सारा दोष स्त्री पर?

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तीन पत्ती गुलाब-32

दीदी ने भाभी को समझा दिया था कि हमारे भैया को ज्यादा तरसाना मत, जल्दी से अपना खजाना उन्हें सौम्प देना. वरना वो फिर सारी रात तुम्हारी हालत बिगाड़ देंगे।

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तीन पत्ती गुलाब-30

गौरी की कसी खूबसूरत गुलाबी गांड मारने के लिए मैं मरा जा रहा हूँ। चूत का उदघाटन तो आराम से हो गया था पर उसे गांड के लिए तैयार करना जरा मुश्किल लग रहा है।

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तीन पत्ती गुलाब-29

मैं मधुर के गालों को चूमते हुए और उसके नितम्बों पर हाथ फिराते हुए यही सोच रहा था पता नहीं गौरी के नितम्बों को चूमने और मसलने का मौक़ा कब मिलेगा।

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तीन पत्ती गुलाब-28

मुझे गौरी का वह पहला चुम्बन याद आ गया। अगर इस समय गौरी मेरे सामने होती तो मैं उसके होंठों को जबरदस्ती चूम लेता पर सानिया के साथ अभी यह सब कहाँ संभव था।

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तीन पत्ती गुलाब-26

मैंने अपना लंड उसकी सु-सु की फांकों के बीच लगा दिया। अब वो इस संगम के लिए तैयार थी। उसने अपनी जांघें थोड़ी सी और खोल दी और मेरे पप्पू का काम आसान कर दिया।

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तीन पत्ती गुलाब-24

उसने नाइटी और हमारे प्रेमरस में भीगा तौलिया अपने हाथों में पकड़ रखा था। जिस अंदाज़ में वह टांगें चौड़ी करके चल रही थी, मुझे लगता है उसे अब भी थोड़ा दर्द महसूस हो रहा होगा।

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