प्रेम गुरु

Indian Sex Story at www.antarvasnasexstories.com Read my Indian Sex Stories

तीन पत्ती गुलाब-1

इस कथा की नायिका हमारी घरेलू नौकरानी की तीसरे नंबर की 18 वर्ष की बेटी है। मध्यम कद, घुंघराले बाल, गोरा रंग, मोटी काली आँखें, गोल चेहरा, सख्त कसे हुए दो सिंदूरी आम।

पूरी कहानी पढ़ें »

तीन पत्ती गुलाब

यह धारावाहिक कहानी अन्तर्वासना के मशहूर लेखक प्रेम गुरू की है. यह एक अल्हड़ घरेलू नौकरानी के साथ प्रेम और सम्भोग की कहानी है. देसी लड़की के साथ सेक्स का आनन्द लें.

पूरी कहानी पढ़ें »

तीसरी कसम-8

प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना रेशम की तरह कोमल और मक्खन की तरह चिकना अहसास मेरी अँगुलियों पर महसूस हो रहा था। जैसे ही मेरी

पूरी कहानी पढ़ें »

तीसरी कसम-7

प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना “जिज्जू ! एक बात सच बोलूँ ?” “क्या?” “हूँ तमारी साथै आपना प्रेम नि अलग दुनिया वसावा चाहू छु। ज्या

पूरी कहानी पढ़ें »

तीसरी कसम-4

प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना मैं अभी अपने ख्यालों में खोया ही था कि पलक की आवाज से चौंका। ‘सर एक बात पूछूँ?’ ‘यस… हाँ

पूरी कहानी पढ़ें »

तीसरी कसम-3

प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना ‘पलक…’ ‘हुं…’ ‘पर तुम्हें एक वचन देना होगा !’ ‘ केवू वचन?’ (कैसा वचन?) ‘बस तुम शर्माना छोड़ देना और

पूरी कहानी पढ़ें »

तीसरी कसम-1

प्रेम गुरु की अनन्तिम रचना हज़ारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है बाद मुद्दत के होता है चमन में दीदा-ए-वार पैदा ओह… प्रेम !

पूरी कहानी पढ़ें »

माया मेम साब-5

वह पेट के बल लेट गई और उसने अपने नितम्ब फिर से ऊपर उठा दिए। मैंने स्टूल पर पड़ी पड़ी क्रीम की डब्बी उठाई और ढेर सारी क्रीम उसकी गाण्ड के छेद पर लगा दी।

पूरी कहानी पढ़ें »

माया मेम साब-4

उसने मेरे लण्ड का टोपा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। क्या कमाल का लण्ड चूसती है साली पूरी लण्डखोर लगती है? उसके मुँह की लज्जत तो उसकी चूत से भी ज्यादा मजेदार थी।

पूरी कहानी पढ़ें »

माया मेम साब-3

मैंने उसकी नाइटी को ऊपर करते हुए अपना हाथ उसकी जाँघों के बीच डाल कर उसकी चूत की दरार में अपनी अंगुली फिराई और फिर उसके रस भरे छेद में डाल दी।

पूरी कहानी पढ़ें »

माया मेम साब-2

‘ओह… माया, सच में तुम्हारे होंठ और उरोज बहुत खूबसूरत हैं… पता नहीं किसके नसीब में इनका रस चूसना लिखा है।’ ‘जीजू तुम फिर…? मैं जाती हूँ!’

पूरी कहानी पढ़ें »

माया मेम साब-1

माया ने जीन का निक्कर पहन रखा था जिसमें उसकी गोरी गोरी पुष्ट जांघें तो इतनी चिकनी लग रही थी जैसे संग-ए-मरमर की बनी हों। मेरा अंदाज़ा था कि उसने अन्दर पेंटी नहीं डाली होगी।

पूरी कहानी पढ़ें »

मधुर प्रेम मिलन-5

सच कहूँ तो मैंने कभी किसी का लिंग अपने मुँह में लेना और चूसना तो दूर की बात है कभी ठीक से देखा भी नहीं था। पर सहेलियों से सुना बहुत था कि लिंग ऐसा होता है वैसा होता है।

पूरी कहानी पढ़ें »

मधुर प्रेम मिलन-4

भंवरे ने डंक मार दिया था और शिकारी अपना लक्ष्य भेदन कर चुका था। अब कलि खिल चुकी थी और भंवरे को अपनी पंखुड़ियों में कैद किये अपना यौवन मधु पिलाने को आतुर हो रही थी।

पूरी कहानी पढ़ें »

मधुर प्रेम मिलन-3

उन्होंने अपने मुन्ने को मेरी मुनिया (लाडो) के चीरे पर रख दिया। मैंने अपनी साँसें रोक ली और अपने दांत कस कर भींच लिए। मेरी लाडो तो कब से उनके स्वागत के लिए आतुर होकर प्रेम के आंसू बहाने लगी थी।

पूरी कहानी पढ़ें »

मधुर प्रेम मिलन-2

प्रेषिका : स्लिमसीमा ‘मधुर, क्या मैं एक बार आपके हाथों को चूम सकता हूँ?’ मेरे अधरों पर गर्वीली मुस्कान थिरक उठी। अपने प्रियतम को प्रणय-निवेदन

पूरी कहानी पढ़ें »

अन्तर्वासना इमेल क्लब के सदस्य बनें

हर सप्ताह अपने मेल बॉक्स में मुफ्त में कहानी प्राप्त करें! निम्न बॉक्स में अपना इमेल आईडी लिखें, सहमति बॉक्स को टिक करें, फिर ‘सदस्य बनें’ बटन पर क्लिक करें !

* आपके द्वारा दी गयी जानकारी गोपनीय रहेगी, किसी से कभी साझा नहीं की जायेगी।

Scroll To Top