नन्दिनी

rss feed

सोनू से ननदोई तक-6

जैसे मैंने अन्तर्वासना पर पिछले भाग में बताया : रात को मेरी खाट पर मेरी रजाई में मैंने किसी को पाया। उसने दबी आवाज़ से कहा- मैं हूँ काला ! चुप रह ! यहाँ क्यूँ आये हो? मैं धीरे से बोली। रात के दो बज रहे हैं, घोड़े बेच सो रहे हैं सभी ! उसने […]

सोनू से ननदोई तक-5

दूसरे वाले ने भी लौड़ा निकाल लिया कभी एक मुँह में देता, कभी दूसरा देता। दोनों के बड़े-बड़े लौड़े थे, मैं जल्दी-जल्दी चूसने लगी। वो मेरे चुचूकों को चुटकी से मसल रहे थे, दोनों ने मुझ से खूब लौड़े चुसवाये और मुझे दबाया-मसला।

सोनू से ननदोई तक-4

उसने जल्दी से मेरी सलवार का नाड़ा खोल लिया और वहाँ पड़ी एक पुरानी दरी बिछा मुझे लिटा कर मेरी टाँगें ऊपर उठवा ली और मेरी गीली चूत में अपना लौड़ा घुसा दिया।

सोनू से ननदोई तक-3

उसने मेरी सलवार खोल दी, नीचे कुछ नहीं था, वो अपना हाथ मेरी पहले से ही गीली फुद्दी पर फेरने लगा, मैं और गर्म हो गई। वो मेरी ब्रा उतार पागलों जैसे मेरे मम्मे दबाने लगा, मेरे चुचूक अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था।

सोनू से ननदोई तक-2

लौड़े का स्वाद मेरी फुद्दी के कोरे-कोरे गुलाबी होंठों को लग चुका था, उधर शेर के मुँह को मेरी जवानी का खून लग चुका था, आग दोनों तरफ पूरी-पूरी लग चुकी थी।

सोनू से ननदोई तक-1

वो मुझे खेतों के बीच में ले गया। वहाँ पहले किसी ने चुदाई के लिए जगह बना रखी थी, सोनू ने मुझे बाँहों में ले लिया और चूमने लगा खुलकर। उसने मेरी कुर्ती में हाथ घुसा दिया, चुटकी से मेरे मनके मसलने लगा।

Scroll To Top