यशोदा पाठक

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शादी का लड्डू-2

On 2010-09-08 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

शादी का लड्डू-1 उसने बैठ कर मेरी टांगें ऊँची करके मेरा ढीला ढाला सा पायजामा उतार दिया। मेरा मन खिल उठा… सच में अब तो चुदाई का आनन्द आ ही जायेगा। मुझे उसने अब पूरी नंगी कर दिया था। उसने भी जल्दी से अपनी पैंट उतार दी और मेरे ऊपर नंगा लेट गया। हाय रे… […]

शादी का लड्डू-1

On 2010-09-07 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

मैंने बी एस सी पास कर ली थी, एक दिन मम्मी पापा की बात सुन ली। “यशू तो अब ग्रेजुएट हो गई है, अब उसका ब्याह कर देना चाहिये।” पापा ने मम्मी से कहा। “हाँ, ठीक है, बी एड तो बाद में भी कर लेगी। आप संजीव की बात कर रहे हैं ना?” “हाँ वही […]

चाची चार सौ बीस-3

जवान चूत जितना पिटती थी उतनी ही और जोर से लण्ड खाना चाह रही थी। मेरे चुदने की तमन्ना चाची ने पूरी करवा दी थी। फिर तो जी भर कर मैंने अंकल का लण्ड खाया और फिर अपने आप को रोक नहीं पाई...

चाची चार सौ बीस-2

‘यशोदा … सो गई क्या?’ ‘उंह्ह … चाची, क्या है? ओह, खाना लग गया क्या?’ ‘देख अंकल तुझे कुछ कहना चाह रहे हैं।’ फिर चाची पीछे मुड़ी और जाने लगी। अंकल ने तुरन्त चाची का हाथ पकड़ लिया, चाची रुक गई। ‘अंकल आप तो नंगे हैं !’ मैं जान करके हंस पड़ी। उनका लण्ड सख्त […]

चाची चार सौ बीस-1

चाची ने मेरे दोनों हाथ ऊपर खींच कर दबा दिये। अंकल मेरी टांगों की तरफ़ आ गये और उन्हें पकड़ कर दोनों और चौड़ा दिये। मेरी चूत खुल गई। अंकल का लण्ड हाय राम ...

यहाँ भी चुदी और वहाँ भी-2

On 2008-07-08 Category: गुरु घण्टाल Tags:

यशोदा पाठक जिंदगी में पहली बार रात भर इतना मजा किया। सवेरे मैंने अपना बदन खुला-खुला सा महसूस किया। चूत में एक शान्ति सी महसूस हुई। सवेरे उठते ही मैं नहा धोकर ट्यूशन के लिये राजीव के घर आ गई। रास्ते भर यही सोचती रही कि राजीव को मैं क्या जवाब दूंगी। जाने अब मेरे […]

यहाँ भी चुदी और वहाँ भी-1

On 2008-07-07 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

मेरे भैया के एक मित्र राजीव मुझे कम्प्यूटर पढ़ाया करते थे। रोज सवेरे स्कूल जाने से पहले मैं एक घण्टे के लिये वहाँ जाती थी। मैं बाहरवीं कक्षा की छात्रा हूँ। ऐसा नहीं है कि कभी मैं चुदी ही नहीं ! मैं कुछ दिन पहले भावना में बह कर अपने चाचा के लड़के से चुदा […]

सत्य वचन

On 2008-02-18 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

मैं छत पर बैठी हुई अपने ख्यालों में डूबी हुई थी। मुझे अपनी कक्षा में कोई भी लड़का अच्छा नहीं लगता था और ना ही कोई लड़का मेरी ओर देखता ही था। अन्तर्वासना की कहानियाँ भी मुझे वास्तविक नहीं लगती थी। कभी देवर अपनी भाभी को चोद रहा है तो कभी चाची की चुदाई हो […]

अकेली मत रहियो

भरी वर्षा में उसकी चुदाई मुझे आज तक याद आती है। काश आज पचास की उमर में भी ऐसा ही कोई हरा भरा जवान आ कर मुझे मस्त चोद डाले... मेरे मन की आग बुझा दे...

जीजू

On 2007-11-30 Category: जीजा साली की चुदाई Tags:

कम उमर से ही मेरी सहेली ने मुझे यौन शिक्षा में प्रवीण कर दिया था। मैं चूत, लण्ड, चूचियों के बारे में सब जानने लग गई थी। उसके कम्प्यूटर पर अकसर चुदाई के सीन भी देखती रहती थी। मोमबत्ती से मजा लेना मेरी सहेली ने मुझे सिखा दिया था। उन्हीं दिनों दीदी को देखने एक […]

कुड़ी पतंग हो गई

जीजू का लण्ड फिर से खड़ा हो गया और उन्होंने मुझे पलटी मार कर उल्टा कर दिया. मेरे छोटे-छोटे कसे हुए चूतड़ों के बीच उन्होंने अपना लण्ड फ़ंसा दिया.

बात बनती चली गई-2

विजय पण्डित भैया दोपहर का भोजन करके एक बजे ड्यूटी पर चले गये। भाभी को आज मैंने दूसरी सीडी ला कर दी। हमें सीडी देखने की बहुत बेचैनी थी… शायद सीडी नहीं बल्कि आपस में कुछ करने की बेचैनी थी। आज भी ब्ल्यू फ़िल्म देखते देखते हमने फिर से एक दूसरे को रगड़ा। खूब तबियत […]

एक पति, एक प्रियतम

On 2006-10-17 Category: चुदाई की कहानी Tags:

लेखिका : यशोदा पाठक भरी जवानी में मैं अपनी क्लास के एक सुन्दर से लड़के से प्यार कर बैठी। झिझक तो खुलते खुलते ही खुलती है। पहले तो हम क्लास में ही चुपके से प्रेम-पत्र का आदान प्रदान करते रहे। एक दिन प्रतीक ने मुझे वहाँ के एक गार्डन में शाम को बुलाया। मैं असमंजस […]

बेईमान दिल

On 2006-08-25 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

प्रेषिका : यशोदा पाठक मैं अब बड़ी हो गई हूँ। मेरी माहवारी चालू हुए भी चार साल हो चुके हैं। मेरी चूंचियाँ भी उभर कर काफ़ी बड़ी बड़ी हो गई हैं। मेरी चूत में अब पहले से अधिक खुजली हुआ करती है। उसकी गहराई अधिक हो गई है। मेरे चूतड़ अब और सुडौल हो गये […]

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