दशहरा मेले में दमदार देसी लंड के दीदार-2

दशहरा मेला में ढेरों जवान मर्द देख मेरा दिल मचल गया, अपने लिए मैं एक लंड की तलाश करने लगा, मुझे एक लड़का पसंद आया. मेरी गे सेक्स कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने उसे पटा कर उसका लंड चूसा.

दशहरा मेले में दमदार देसी लंड के दीदार-1

दोस्तों के साथ मैं दशहरा मेला देखने गया तो वहां भीड़ में ढेरों जवान मर्द थे, मेरी कामुकता परवान चढ़ने लगी, मैं किसी दमदार लंड को खोजने लगा, दोस्तों से अलग हो गया. मेरी हिंदी सेक्सी स्टोरी पढ़ कर देखें कि मुझे कुछ मिला?

गांडू सेक्स स्टोरी: दूध वाला राजकुमार-1

मैं कुछ दिन के लिए अपने फुफेरे भाई के घर गया. नए शहर में मुझे किसी दमदार लंड की तलाश थी जो मेरे जिस्म की प्यास को बुझा सके. मेरी तलाश सुबह सुबह ही पूरी होती दिखी जब मैंने दूध देने आए लड़के को देखा. मेरी गांडू सेक्स स्टोरी का मजा लें!

अस्पताल में लंड की खोज-3

आपने मेरी इंडियन गे सेक्स स्टोरीज में पढ़ा कि मैं लंड चूसने का शौकीन हूँ लेकिन मुझे जो जवान मिला वो सिर्फ मेरी गांड मारना चाह रहा है. अब आगे:

अस्पताल में लंड की खोज-2

मैं अस्पताल में लंड के लिए काफी कोशिश कर चुका था. अंत में हट्टा कट्टा गांव का लड़का मिला उसके लंड को पाने की मैं जुगाड़ करने लगा. हिंदी गे सेक्स स्टोरीज पढ़ें!

अस्पताल में लंड की खोज-1

जब भी मैं सार्वजनिक स्थानों पर जाता हूँ मेरी लंड की भूख अपने आप ही जाग जाती है, एक रात मुझे अस्पताल में रुकना था तो मैं वहाँ लंड खोजने लगा.

पहला प्यार.. पहला लंड-3

लंड काफी स्वस्थ लग रहा था.. बिल्कुल सीधा और सख्त था.. मैंने फूले हुए सुपाड़े की चमड़ी पीछे की ओर खींचकर उसके मस्त गुलाबी सुपारे के दर्शन किए.. जिसमें से मदमस्त महक आ रही थी।

पहला प्यार.. पहला लण्ड-2

उसने साइड से लगभग मुझे बांहों में ही भर लिया था और उसका मुँह और होंठ भी मेरे मुँह के काफी करीब थे। उसके मुँह की गर्म भाप मेरे होंठों को छू रही थी.. क्योंकि दिसंबर की ठंड थी..

पहला प्यार.. पहला लंड-1

जब मैं पढ़ता था और मुझे सेक्स, प्यार, लंड, चूत और गांड के बारे में कुछ ज्यादा पता नहीं था और ना ही मुझे कुछ समझ आता था।
तब से मुझे मेरी कक्षा का एक लड़का अच्छा लगता था।

महाकुम्भ में महालंड-3

हम लोग गाड़ी मैं ही बैठे हुए सोच रहे थे कि अब जगह का जुगाड़ कैसे किया जाये.. हम लोग पेड़ों के झुरमुट में गए। वहां पर क्या हुआ, इस हिंदी सेक्स कहानी में पढ़िए।

महाकुम्भ में महालंड-2

मर्द बिना कपड़ों के, वो भी हज़ारों और एक से बढ़कर एक, वो भी चड्डी में नहाते हुए, हज़ारो लंड और मैं फिर भी प्यासा! लंड को मैं अपने होंटों से भी छू चुका था लेकिन अभी तक मुझे लंड मिला नहीं था।

महाकुम्भ में महालंड-1

पानी में काफी भीड़ होती थी और किसी को ज्यादा ध्यान नहीं होता था, सब लोग चड्डी में ही होते थे, मैं उनके लंड के उभार को देखता जिसमें गीली हो चुकी चड्डी में लंड का शेप साफ दिखाई देता था।