कामिनी सक्सेना

महकती कविता-2

वो स्नान करके बाहर आई, पूरी भीगी हुई थी। उसने तौलिये के लिये नजर दौड़ाई। अभी वो मात्र पेंटी में ही थी और गीली पेंटी उसके कोमल चूतड़ों से चिपकी हुई थी।

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महकती कविता-1

रोहण के बन्द कमरे की पीछे वाली खिड़की से एक बार कविता ने रोहण को ब्ल्यू फ़िल्म देखते फिर मुठ्ठ मारते देख लिया था। वो भी जवान थी, उसके दिल के अरमान भी जाग उठे थे।

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दो नौकरानियों की मस्त चुदाई -2

‘अंकल जी, हाय चूत मार दी रे, मेरी फ़ुद्दी चुद गई, आह्ह मेरा माल निकला रे , हरामजादी… मेरी चूत फ़ोड़ डाली रे…’ और उसने अपनी चूत सिकोड़ ली। राधा झड़ने लगी, उसका पानी निकलने लग गया था।

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दो नौकरानियों की मस्त चुदाई-1

मैंने धीरे से उसकी छोटी छोटी चूंचियों को सहलाना चालू कर दिया। कभी कभी उसके निपल भी उमेठ देता था। वो सिसकारी भरने लगी- अंकल, हाय और करो, हाय अंकल!!!

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कॉल गर्ल का पहला कॉल

मेरी टांगें चौड़ी करके उसका चेहरा मेरी चूत पर झुक गया और वहाँ अपना मुँह लगा दिया। ‘अरे ये क्या कर रहे हो… ये तो पेशाब की जगह है छी: हटो, जाने क्या कर रहे हो?’

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घर की बात घर में

भाभी की सहेली कुछ दिनों के लिए घर पर आई हुई थी. भाभी और मेरे सम्बन्ध मधुर थे. जब भी भाभी की इच्छा होती थी वो, भैया के जाने के बाद मुझसे चुदवा लेती थी.

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मजा या सजा

लेखिका : कामिनी सक्सेना सहयोगी : जो हन्टर मैं उस समय कॉलेज में पढ़ती थी। मेरा एक बॉय-फ़्रेंड था सुधीर, जो मेरा क्लासमेट था। मेरे

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