जितेन्द्र कुमार

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एत बात औल…पुंचु?-2

प्रेषक : जितेन्द्र कुमार मैंने उनसे स्पष्ट कह दिया- भाभी, मेरी कोई गर्लफ़्रेन्ड नहीं है, सच में ! भाभी सम्भल कर बोली- सच में ! “हाँ भाभी, मैंने आपकी कसम खाई है। झूठ नहीं बोलूंगा ! वे अपने होंठों को जरा सा गोल करके बच्चो से बात करते हैं, वैसा बनाते हुये बोली- एत बात […]

एत बात औल…पुंचु?-1

आपने मेरी कहानी मैं भ्रम में रह गया तीन भागों में पढ़ी होगी। आज जो बात मैं आपको बताने जा रहा हूँ वो उससे पहले की बात है। मेरी ब्रोकिंग एजेन्सी स्टॉक एक्सचेंज़ का काम करती है, शनिवार और रविवार को छुट्टी होती है और मुझे ये दो दिन काटना भारी होता है। बात उन […]

मैं भ्रम में रह गया-3

On 2011-04-09 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

प्रेषक : जितेन्द्र कुमार आख़िर जब वो पूरा घुस गया तब मैंने दीदी के पाँव अपने कंधों पर लिए और तल्लीनता से उसे चोदने लगा। दीदी संकोचन करके लण्ड को दबाने की कला अच्छी तरह जानती थी। बीस मिनट की चुदाई में वो दो बार झड़ी। मैंने भी पिचकारी छोड़ दी और कुछ देर बाद […]

मैं भ्रम में रह गया-2

On 2011-04-08 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

प्रेषक : जितेन्द्र कुमार हाय, मैं जितेन्द्र एक बार फिर एक नई कहानी के साथ आया हूँ। तो कहानी पर आता हूँ ! आपको तो पता है कि मैं एक शेयर ब्रोकिंग कम्पनी का बिजनस करता हूँ, मेरा अपना दफ़्तर है। इस बार शनिवार का रक्षाबन्धन था और मेरे दफ़्तर की छुट्टी भी थी, और […]

मैं भ्रम में रह गया

हम दोनों पागलॉ की तरह लिपट गये और एक दूसरे के शरीर को टटोल कर आनंद लेने लग गये। अब मैंने उसकी चोली खोल दी और पैंटी भी उतार दी, उसके तन व मेरे बीच में कोई नहीं था।

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