लीलाधर

rss feed

योनि का दीपक- भाग 4

"किक मी हार्ड बास्टर्ड...!" मैं कलाकार पर चिल्लाई। उसकी इतनी शराफत असह्य थी, मैं कठोर व्यवहार चाहती थी, मैं अपने प्रति गुस्से से भरी थी। कलाकार ने जोर से धक्का दिया और मेरे कौमार्य पटल को फाड़ता जड़ तक घुस गया।

योनि का दीपक- भाग 3

कहाँ तो एकदम परम्परागत लड़की थी - शादी से पहले नो किसिंग, न हगिंग, फकिंग तो बहुत दूर की ही बात थी। लेकिन आज एकबारगी न सिर्फ टैटू वाले के सामने टांगें खोलकर चूत पर चित्र बनावाया बल्कि...

योनि का दीपक- भाग 2

मैं बिस्तर पर पीठ के बल गिर गई, घाघरा सरककर मेरे पेट पर आ गया। यह सब एक क्षण में हो गया। मेरे दोनों टखने उसकी हथेलियों में थे और वह उन्हें फैलाए कमरे की जगमगाती रोशनी में उनके बीच में देख रहा था।

योनि का दीपक- भाग 1

बड़ा प्यारा है वो! जब वह 'मांगता' है तो खुद को रोकना सचमुच मुश्किल हो जाता है। ऐसे प्यार से, ऐसा मासूम बनकर मांगता है कि दिल उमड़ आता है उस पर। लालची या फरेबी तो बिल्कुल नहीं लगता। मन करता है लुटा दूँ खुद को उस पर।

खेत खलिहान-4

कहानी का पहला भाग: खेत खलिहान-1 कहानी की तीसरा भाग: खेत खलिहान-3 रेणु ने रोका,”ऐ, क्या करते हो।” सुरेश उसके स्तनों पर झुक गया। उनकी दोनों कलियों को चूमने और चूसने लगा। एक को चूसता तो दूसरे को हाथ से सहलाता। फूलकर वे कड़ी हो गईं। रेणु सीत्कार भर रही थी, उसका सिर सहला रही […]

खेत खलिहान-3

संजना एकदम से संकुचित हो गई; देख कर सुरेश का दिल और रीझ गया। यह सही समझदार और शीलवान लड़की है। 'शील' शब्द से उसका ध्यान कुँआरेपन की सील की ओर चला गया। लगता नहीं कि अभी इसकी 'सील' टूटी है। 'सील तोड़ने' के खयाल से वह रोमांचित हो उठा।

खेत खलिहान-2

गुदगुदी तो संजना के दिल की गहराई में भी हो रही थी, वो भी इस सारे क्रिया कलाप से रोमांचित थी लेकिन नारी सुलभा लज्जा और पहली बार का डर... उसके इस रोमांच को दबा दे रहे थे. वो सोच रही थी कि 'क्या करेगा यह?' संजाना को पता सब कुछ था लेकिन फिर भी खुद के मन को समझाने के लिए खुद से अनजान बन रही थी.

खेत खलिहान-1

वो अब गाँव के स्कूल से निकल कर शहर कॉलेज में जाने से प्रफुल्लित थी. वो अपनी एक सहेली के साथ शहर से गाँव लौट रही थी साइकिल पर... रास्ते में गरमी के कारण एक खेत में बनी फूंस की एक झोंपड़ी पर सुस्ताने के लिए रूक गयी. देसी जवानी की कहानी का मजा लें!

सुरीली साली-2

जिस तरह से वह रोक रही थी उससे लग रहा था वह मौखिक रति के सुख से अपरिचित थी। शायद कुणाल उसे उसे यह मजा नहीं देते थे। मैं जल्दी जल्दी चाटने लगा। वह उछलने लगी और हाथों से मेरा सिर ठेलने लगी, "छी छी जीजा जी, ये क्या कर रहे हैं... ओफ... ओफ... ये क्या कर रहे हैं जीजाजी... ओफ जीजाजी..."

सुरीली साली-1

मेरी बीवी की बहन... मेरी साली... वह मुझे अपना सबसे प्रिय व्यक्ति कहती है। 'मेरे सबसे प्यारे जीजाजी' आप बहो.ऽ.त बहो.ऽ.त अच्छे हैं, ('हो' को खींचकर बोलती है) 'ये मेरा लक है कि आप जैसे जीजा मिले'। मैं पूछता हूँ आपका लक या दीदी का? ''दीदी का''... और मंद छलकती हँसी।

याराना-2

मेरे दोस्त की बीवी की ब्रा में ढकी छातियों और अंडरवियर पहनी चिकनी गोरी टाँगों का दृश्य दिमाग़ से हट नहीं पा रहा था। दोनों स्त्रियों की आज जोरदार कुटाई होने वाली थी।

याराना-1

जर, जोरू और जमीन- झगड़े की यही सबसे बड़ी वजहें होते हैं लेकिन हमारे मामले में कुछ उल्टा ही हुआ था। ‘जोरुओं’ की वजह से हम दो दोस्तों की टूट चुकी दोस्ती फिर से जुड़ गई।

जेम्स की कल्पना -6

कल्पना के जबड़े दुख रहे थे, योनि दुख रही थी, अंग-अंग टूट रहा था। उसने मन में झाँककर देखा, कोई अपराध-बोध तो नहीं? नहीं, ऐसा कुछ नहीं। उसने जो किया है सोच-समझकर किया है।

जेम्स की कल्पना -5

मोटे होठों की खड़ी फाँक, बीच में गहरा भूरापन लिये- जैसे किसी ने पाव रोटी को बीच से काटकर अंदर चॉकलेट दबा दी हो। जेम्स होठों पर जीभ फेरने लगा। कल्पना आधी आँखें मूँदे पलकों की झिरी से देख रही थी।

जेम्स की कल्पना -4

कल्पना ने जेम्स के बार-बार इसरार पर एक बार ठहरकर अच्छे से लिंग को अंदर-बाहर होते देखा, फिर आँखें बंद कर लीं। उसने योनि को मथते लिंग को कमर उचकाकर और नजदीकी दी!

जेम्स की कल्पना -3

लड़की ही लगती है, उम्र में बड़ी होने के बावजूद… कसे बदन की… ताजगी और सुंदरता से भरी! उसके अपने शब्दों में एकदम 'हॉट' 'सेक्स' और 'फकिंग' के लिए ही बनी हुई।

जेम्स की कल्पना -2

कल्पना बुरी तरह ठगी गई थी बेचारी… दूसरा पुरुष उसे भोगकर चला गया था और जाकर अंगूठा दिखा दिया था। भला कौन सा ऐसा मर्द होगा जो अपनी बीवी को चुदवाकर यूँ अपना-सा मुँह लिए लौट जाए?

जेम्स की कल्पना -1

दो दम्पति अपने साथियों की अदला-बदली के लिए मिलते हैं। जेम्स दूसरे दंपति की बीवी कल्पना के साथ सेक्स संबंध स्थापित करता है मगर एक दुखद घटनावश उसकी अपनी पत्नी डायना का दूसरे के पुरुष के साथ संभोग नहीं हो पाता और विनिमय कार्य अधूरा रह जाता है। यह उसी अधूरे विनिमय के अंतर्गत जेम्स और कल्पना के संयोग के बेहद उत्तेजक कामुक अनुभवों की कहानी है।

अगर खुदा न करे… -6

हमारे कमर के नीचे कपड़े क्रमशः ही खुले, साए की डोर और पैंट की चेन एक साथ खुले, पैंटी और चड्डी की साथ-साथ विदाई हुई, जैसे दूल्हा और दुल्हन साथ विदा होकर जा रहे हों।

अगर खुदा न करे… -5

असल काम की घड़ी, वर्षों प्रतीक्षा की घड़ी, मेरी पतिव्रता बीवी के व्यभिचार की घड़ी, उसकी योनि में परपुरूष के प्रवेश की घड़ी… मैं - उसका पति - उत्साह से उसकी योनि के होंठों को फैलाकर उसके शीलभंग में मदद कर रहा था।

Scroll To Top