आशीष ‘युग’

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अच्छे दिन आ गए

मैं कच्छ में जॉब करता हूँ, जिम जाता था, जिम के संडे पार्क है, वहाँ बैठकर लाईन मारता! एक सन्डे एक लड़की से कुछ रिस्पोंस मिलता देख मैं उसके करीब जाकर खड़ा हो गया।

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