अर्पित सिंह

कल्पना-शक्ति ही सब कुछ है। यह जीवन में आने वाले आकर्षण का पूर्वावलोकन है। कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है। मुझे बकवास पसंद है, यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को जगाता है। कल्पना जीवन में एक आवश्यक घटक है, यह दूरबीन के गलत अंत के माध्यम से जीवन को देखने का एक तरीका है। जो कि मैं करता हू और ये मुझे जीवन की वास्तविकताओं पर हँसने के लिए सक्षम बनाता है। जब आपकी कल्पना फ़ोकस केंद्र से बाहर हो तब आप अपनी आंखों पर निर्भर नहीं रह सकते। वह व्यक्ति जो कल्पना नहीं कर सकता उसे बिना पंखों वाले पक्षी जैसा माना जाता है। कल्पना हमे ऐसी दुनिया में ले जाती है जहा हम कभी न गए हो या शायद ऐसी कोई दुनिया वास्तविकता में हो ही नहीं। हम अपने लिए लिए एक चरित्र, एक आदर्श व्यक्तित्व जिसका हम अपने जीवन में अनुपालन करना चाहते की कल्पना तो अवश्य ही करते हैं और यही कल्पना हमारे जीवन को आगे बढ़ाने का काम करती है। हमारी निजी ज़िन्दगी में भी हम तमाम ऐसी कल्पनायें करते हैं जो सच में संभव नहीं होती। या सिर्फ यूँ कहें की कल्पना इस समग्र विश्व की साम्राज्ञी है।

मैं, मैं तो सिर्फ अपनी कल्पनाओं को आपके साथ साझा करता हूँ।

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अब प्यार न कर पाएँगे हम किसी से

मेरी आँखें बंद थीं लेकिन फिर भी मैं इशानी को अपनी बाँहों में भर कर उसके अंग-अंग को छू कर महसूस कर रहा था हम दोनों ही अपने प्रेम की उत्तेजना से सराबोर थे। यह वो कामोत्तेजना थी.. जो युग-युग से प्यासे प्रेमियों पर आज जी भर कर बरसने वाली थी।

ख्वाहिश पूरी की

दोस्तो, मैं अर्पित सिंह एक बार फिर से अपनी अधूरी प्रेम कहानी की आगे की दास्ताँ ले कर हाज़िर हुआ हूँ। मेरी पिछली कहानियों एक दूसरे में समाये-1 एक दूसरे में समाये-2 एक दूसरे में समाये-3 एवं बेइन्तिहा मुहब्बत को आप सब का इतना प्यार मिला उसका मैं बहुत आभारी हूँ लेकिन आपका गुनहगार भी […]

बेइन्तिहा मुहब्बत

On 2011-02-04 Category: चुदाई की कहानी Tags:

दोस्तो, मैं अर्पित एक बार फिर से आप के पास अपनी जिंदगी के कुछ यादगार लम्हे बांटने आया हूँ… आप सबने मेरी पिछली कहानियों में मेरे पहले प्यार के बारे में पढ़ा और मुझे ऐसे बहुत सी मेल मिली जिनमें आगे की दास्ताँ के बारे में पूछा गया… तो चलिए एक बार फिर आप सब […]

एक दूसरे में समाये-3

इशानी मचलने लगी और उसने अपनी टांगें चौड़ी कर के मेरे लिए जगह बना दी.. मैं अपना लिंग उसकी योनि पर रगड़ रहा था और इशानी अपनी आँखें बंद किए हुए उन मादक क्षणों का पूरा आनन्द ले रही थी...

एक दूसरे में समाये-2

सेक्स का ज्ञान न तो मुझे ही था और न ही इशानी को.. यह सब उत्तेजना में अपने आप ही होता जा रहा था.. उसकी योनि को मुँह में भरते ही इशानी के मुँह से चीख निकल गई और उसने मेरे सर के ऊपर अपने दोनों हाथों को रखा और अपनी योनि पर दबाने लगी..

एक दूसरे में समाये-1

उसने जो बोला, सुन कर मेरे होश ही उड़ गए.. उसने मुझे बताया कि वो बचपन से ही मेरे बारे में सिर्फ अच्छा ही सुनती आ रही है और मन ही मन मुझे प्यार करती है...

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