अंतरा

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तो हुआ यूँ

On 2007-07-06 Category: चुदाई की कहानी Tags:

प्रेषिका : अन्तरा आप सबको आपकी अंतरा का रस भरा नमस्कार तो हुआ यूँ : अब बाली उमर में मेरा दाना मस्तियाने लगा। उमर इतनी भी नहीं थी कि शादी की सोचती ! बड़ी बहनें भी तो थी ! मेरी चूचियाँ कमबख्त मेरी ही चोली की रगड़ से कड़ी हो जाती और कभी मूतने के […]

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