बीवी को गैर मर्द से चुदवाने की मंशा-7

(Biwi ko Gair Mard se chudvane ki Mansha- Part 7)

This story is part of a series:

मेरी चूत में भी अब तूफान मच चुका था।
मैं ज़ोर से आनन्द से चिपक गई और आनन्द के मुँह में मुँह लगा दिया।
हमारी चुदाई शुरू हुए करीब एक घंटा होने को आया था।

अब आनन्द की साँसें तेज हो गई थीं और वो रफ़्तार बढ़ाने लगा था.. उसका बदन भी कुछ कँपने लगा.. मैं समझ गई कि अब आनन्द झड़ने वाला है।

मैंने भी आनन्द को कस कर पकड़ लिया.. फिर से मेरी चूत का पानी निकलने लगा और उसी वक़्त आनन्द ने ज़ोर से फटके मारने शुरू कर दिया और फिर उसके लंड से मलाई के फुव्वारे निकलने शुरू हो गए।
मुझे महसूस होने लगा आनन्द का गरम पानी मेरी चूत में निकलने लगा है… मैंने आनन्द को कस कर पकड़ लिया..

एक दो तीन चार पाँच… पता नहीं कितनी देर तक आनन्द के लंड से मलाई के फुव्वारे निकलते रहे थे।

फिर आनन्द मेरे बदन पर गिर गया।

अब हम दोनों ज़ोर-ज़ोर से हाँफने लगे थे।
मेरी चुदी हुई चूत..
हम दोनों की मलाई से भर चुकी थी।

लेकिन वो मलाई अब भी बाहर नहीं निकल रही थी क्योंकि चूत पर आनन्द के लंड का ढक्कन लगा था।

कुछ देर दोनों गहरी साँसें लेने लगे…

अब मेरी पकड़ भी शिथिल हो गई थी… दोनों के बदन पसीने से भरे थे।

कुछ देर बाद मुझे महसूस होने लगा कि आनन्द का लंड अब छोटा होने लगा है।

फिर कुछ देर बाद आनन्द ने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला.. वैसे ही मेरी चूत में से दोनों की मिक्स मलाई बाहर आकर मेरी टाँगों पर बहने लगी और आनन्द ने लंड निकाल कर सीधे मेरे मुँह में चूसने को दे दिया।

आनन्द के लंड पर भी दोनों की मिक्स मलाई लगी थी.. जो उसने मुझे चाटने को कहा।

यहाँ मेरे शौहर की हालत भी हमारी चुदाई देख कर खराब हो चुकी थी। फिर मैं उठी और लंगड़ाती हुई साफ़ करने बाथरूम चली गई..
वैसे ही मेरे पीछे आनन्द भी आ गया।
उसने मेरे हाथ में अपना लंड देकर साफ़ करने को कहा।

मैं आनन्द का लंड पानी से धो रही थी तब उसने मुझसे पूछा- कैसी लगी डार्लिंग इस सच्चे मर्द की चुदाई।

मैंने जवाब मे सिर्फ़ खड़े होकर उसको चुम्बन किया और आँखों से ही प्यार से कहा- मैं बहुत संतुष्ट हो गई हूँ।

फिर सब बाहर के कमरे में आ गए.. आनन्द ने फोन पर खाने को कुछ ऑर्डर किया।

अब भी हम दोनों नंगे ही थे.. मेरी भी शरम खत्म हो गई थी।

पता नहीं मैं इतनी बेशर्म कैसे हो गई कि मेरे शौहर के सामने आनन्द के पास नंगी बैठी थी।
शायद यह सब आनन्द की चुदाई का कमाल था।

आनन्द सलीम को बोला- देख बे.. गान्डू, औरत को ऐसे चोदते हैं.. साले तुम जैसे कमजोर इंसानों को कैसे ऐसे हसीन औरतें मिल जाती हैं। बेचारी जिंदगी भर असली मर्द के लंड के लिए तड़पती रहती हैं…

सलीम ने इस बार सिर्फ़ स्माइल दी और चुप रहा।

कुछ देर में खाना आ गया.. तब मैं अन्दर कमरे में चली गई थी।

आनन्द ने खाना लेकर बिल दे दिया और मुझे बाहर बुलाया।
हम सब खाना खाने बैठ गए।

आनन्द मुझसे बोला- अपने हाथ से मुझे आज खाना खिला।

मैं भी बिना झिझक के उसके मुँह में निवाला डालने लगी।
सलीम चुपचाप से देख रहा था।
अब मुझे किसी का डर नहीं था… सलीम ही तो मुझे यहाँ लेकर आया था.. तो मैं क्या ग़लत कर रही थी।

सब का खाना हो गया और फिर हम कमरे में आ गए।

अब आनन्द मुझसे बोला- डार्लिंग.. अब की बार मैं तुम्हारी गान्ड मारने वाला हूँ।

मैं ज़ोर से चिल्ला उठी- नहीं आनन्द.. गान्ड नहीं प्लीज़.. बहुत बड़ा है आपका लंड… मेरी गान्ड फट जाएगी.. प्लीज़ ऐसा मत करो..’

आनन्द बोला- डर मत डियर.. तेरी चूत भी छोटी थी.. फिर भी इतना बड़ा लंड ले ही लिया ना.. मैं तेरी गान्ड बड़े आराम से मारूँगा..
पता नहीं फिर भी मुझे डर लगने लगा था।

आनन्द ने मुझे पास बुला कर लंड चूसने को कहा।
कुछ देर चूसने के बाद हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए।
अब आनन्द मेरी चूत चाट रहा था.. मैं आनन्द का लंड चूस रही थी।

दस मिनट बाद आनन्द ने मुझे डॉगी-स्टाइल में कर दिया और मेरी गान्ड के छेद पर लंड का सुपाड़ा रखा।

तब मैं आनन्द से बोली- आनन्द प्लीज़ तेल लगा कर करो ना.. फिर दर्द कम होगा।

आनन्द हंसा और बोला- नहीं डियर, मुझे औरतों की चीखें सुनने में बड़ा मज़ा आता है.. तुझे जितना दर्द होगा.. उतनी मुझे खुशी होगी..

मैं चुप हो गई।

अब आनन्द मेरी गान्ड पर लंड का सुपाड़ा रख कर धीरे-धीरे अन्दर डालने की कोशिश करने लगा..

लेकिन मेरी गान्ड का होल बहुत छोटा था और आनन्द का लंड बहुत बड़ा था.. घुस ही नहीं रहा था।

फिर भी आनन्द डालने की ज़बरदस्ती कर रहा था।

कुछ ही पलों में उसका सुपारा गांड में चला गया.. मैं आँखें बन्द करके दर्द सहने की हिम्मत जुटा रही थी।

अब आनन्द मेरी पीठ के पीछे से हाथ आगे लेकर मेरे मम्मों को सहलाने लगा और पीछे गान्ड में धीरे-धीरे धक्के मारने लगा।

मुझे दर्द होने लगा.. 2-3 मिनट में मुझे महसूस होने लगा कि आनन्द का लंड का सुपाड़ा मेरी गान्ड के अन्दर चला गया है।

अब मेरी चूत भी पानी छोड़ने लगी थी।

फिर आनन्द सलीम को बोला- ओए सलीम.. ज़रा यहाँ आकर तेरी लुगाई की कमर एक हाथ से पकड़ और मेरा लंड दूसरे हाथ से पकड़ कर रख..

सलीम पास आ गया.. उसने एक हाथ से मेरी कमर पकड़ी और एक हाथ से आनन्द का लंड पकड़े रखा।

अब आनन्द धीरे-धीरे अपना लंड अन्दर घुसाने लगा।

मैं चिल्लाने लगी.. लेकिन उसको अब कुछ परवाह ही नहीं थी।

दो-तीन मिनट में शायद 3-4 इंच लंड घुस चुका था।

कुछ देर ऐसे ही रहा.. आनन्द फिर उसने लंड थोड़ा बाहर निकाला और एक ज़ोर का झटका मारा और 5 इंच तक लंड अन्दर घुसा दिया।
मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया।

मैं फफक कर रो पड़ी- आनन्द बाहर निकालो.. नहीं सहा जाता.. प्लीज़.. आनन्द मैं आपके पैर पड़ती हूँ.. तुम्हारा इतना मोटा लंड मेरी गान्ड नहीं ले पाएगी.. इसको बाहर निकालो..

लेकिन आनन्द कहाँ सुनने के मूड में था.. थोड़ा लंड बाहर खींच कर एक ज़ोर का धक्का मार कर और लंड को अन्दर धकेलने लगा था।

अब दस मिनट हुए थे लेकिन आनन्द का लंड अभी भी पूरा गया नहीं था।

मैं दर्द से रोने लग गई थी।

तब आनन्द ने लंड बहुत बाहर निकाल कर एक ज़ोरदार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड मेरी गान्ड में घुसा दिया।

मैं ज़ोर से चीख पड़ी और डॉगी-स्टाइल से गिर कर बिस्तर पर धराशाही हो गई।

मेरे सामने वापिस से ब्लैक आउट हो गया था।

आनन्द का पूरा लंड अब मेरी गान्ड के अन्दर चला गया था और गान्ड में जाकर लोहे जैसे सख़्त हो गया था।

मैं और कुछ समझ पाती तभी आनन्द ने मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया।

मुझे ऐसा लगने लगा कि ये लंड गान्ड में घुस कर चूत से तो बाहर निकल आएगा।

मैं चीख रही थी.. रो रही थी और आनन्द मेरी गान्ड मारते जा रहा था।

मैं मन ही मन में सोचने लगी कि अब के बाद कभी गान्ड नहीं मरवाऊँगी।

आनन्द ने पहले ही मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया था और अब गान्ड को गड्डा बना कर उसकी हालत खराब कर रहा था।

लेकिन कुछ देर बाद मेरा दर्द कम होने लगा और मैं भी आनन्द के साथ कुछ मस्ती करने लगी।

आनन्द मुझे अब ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।

करीब 40-45 मिनट बाद आनन्द की रफ़्तार बढ़ गई और उसने मेरी कमर कस कर पकड़ ली और उसकी मलाई मेरी गान्ड में छूटने लगी।

पहली बार के मुक़ाबले इस बार कम मलाई निकली और हाँफते हुए मेरी पीठ पर गिर गया।

हम दोनों दस मिनट वैसे ही पड़े रहे.. फिर मैं जैसे तैसे उठी और साफ़ करने बाथरूम गई.. उधर अपनी गान्ड को पानी से साफ़ करने लगी तो मुझे महसूस हुआ कि मेरी गान्ड काफ़ी फैल चुकी है।
मेरी 3 ऊँगलियाँ एक साथ गान्ड में जा रही थीं।

मैंने गान्ड पर पानी डाला.. तो नीचे देखा लाल पानी बह रहा है.. मैं समझ गई मेरी गान्ड में से खून निकल रहा था।
मेरी गान्ड फट चुकी थी।

फिर मुश्किल से खड़े होकर बाहर आई.. मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था। बाहर हॉल में आकर देखा तो आनन्द के सामने सलीम अपना लंड हिला रहा था।

मेरी इस सच्ची घटना पर आप सभी के सभ्य भाषा में विचारों का स्वागत है।
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कहानी जारी है।

 

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