देवर भाभी की चुदाई-11

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

प्रेषक : नामालूम
सम्पादक : जूजा जी
इतनी देर चुदाई के बाद भाभी को पेशाब आ गया था। वो उठ कर गुसलखाने में गईं लेकिन दरवाज़ा खुला ही छोड़ दिया।

इतना चुदवाने के बाद भाभी की शर्म बिल्कुल खत्म हो गई थी।
गुसलखाने से ‘प्सस्सस्सस्स…’ की आवाज़ आने लगी।
मैं समझ गया भाभी ने मूतना शुरू कर दिया है, भाभी के मूतने की आवाज़ सुन कर मैं भाभी को चोदने की लिए तड़प उठा।

भाभी वापस आई और मुस्कुराते हुए कुतिया बन कर बोलीं- आ मेरे राजा.. तेरी कुतिया चुदवाने के लिए हाज़िर है।

भाभी ने अपने चूतड़ ऊपर उठा रखे थे और उनका सीना बिस्तर पर टिका हुआ था।

उनके विशाल चूतड़ों के बीच से झांकती हुई चूत को देख कर मेरा लौड़ा फनफनाने लगा, मैं भाभी के पीछे बैठ कर भाभी की चूत को कुत्ते की तरह सूंघने और चाटने लगा।

‘अया…. ऊऊओ .. क्या कर रहा है? तू तो सचमुच कुत्ता बन गया है।’

‘भाभी अगर आप कुतिया हैं, तो मैं तो कुत्ता हुआ ना… कुतिया को तो कुत्ता ही चोद सकता है।’
मैं पीछे से भाभी की चूत चाटने लगा।
मेरे मुँह में नमकीन स्वाद आ रहा था, क्योंकि भाभी अभी मूत कर आई थीं।

इस मुद्रा में चूत चाटने से मेरी नाक भाभी की गाण्ड में लग रही थी।

अब मैंने भाभी के दोनों चूतड़ फैला दिए, भाभी की गाण्ड का गुलाबी छेद बहुत ही सुन्दर लग रहा था। मैंने अपनी जीभ से उस गुलाबी छेद को भी चाटना शुरू कर दिया और एक-दो बार जीभ गाण्ड के छेद में भी डाल दी।

‘अईया…ह …अईया ऊऊहह राजू बहुत अच्छा लग रहा है।’ काफ़ी देर तक मैंने भाभी की चूत और गाण्ड चाटी।

मैं भाभी को कुतिया की तरह चोदने के लिए तैयार था।
अब मैंने उठ कर अपने लौड़े का सुपारा भाभी की चूत के मुँह पर रखा और उनकी कमर पकड़ कर ज़ोरदार धक्का लगाया।

चूत बहुत ही गीली थी और इतनी देर से हो रही चुदाई के कारण चौड़ी हो गई थी। एक ही धक्के में पूरा 10 इंच लौड़ा भाभी की चूत में समा गया।
अब मैंने ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।

‘फ़च..फ़च..’ का मधुर संगीत कमरे में गूंज़ने लगा।

‘भाभी मज़ा आ रहा है मेरी जान?’

‘ऊहह…उई बहुत मज़ा आ रहा है मेरे राजा… उई…. फाड़ डालो मेरी चूत को आज… मार डालो मुझे… माँ….. मैं मर जाऊँगी।’

‘भाभी मेरा इनाम कब दोगी?’

‘अया….. उई…. जब मर्ज़ी लेले… उई बोल …अया … क्या चाहिए?’

‘भाभी मैं आपकी गाण्ड में अपना लंड डालना चाहता हूँ।’

‘नहीं रे… तेरा मूसल तो मेरी गाण्ड फाड़ देगा… ना बाबा ना… कुछ और माँग ले।’

‘भाभी मेरी जान जब से आप इस घर में आई हो आपकी मोटी गाण्ड देख कर ही मेरा लंड फनफना जाता है। एक बार तो इस लौड़े को अपनी गाण्ड का स्वाद लेने दो।’

‘तू तो बहुत ही ज़िद्दी है, ठीक है अगर तुझे मेरी गाण्ड इतनी पसंद है तो लेले। लेकिन मेरे राजा बहुत धीरे से डालना, तेरा लंड बहुत ही मोटा है।’

‘हाँ भाभी बिल्कुल धीरे से डालूँगा।’

मैं जल्दी से वैसलीन ले आया, भाभी के पीछे बैठ कर उनके चूतड़ दोनों हाथों से फैला दिए और उस गुलाबी छेद को कुत्ते की तरह चाटने लगा।

जीभ को भी गाण्ड के अन्दर घुसेड़ दिया। मैंने ढेर सारी वैसलीन अपने लौड़े पर लगाई और फिर ढेर सारी अपनी ऊँगली पर लेकर भाभी की गाण्ड में लगाई।

अब मैंने अपने लंड का सुपारा भाभी की गाण्ड के छेद पर रखा और धीरे से दबाव डाल कर सुपारे को भाभी की गाण्ड में सरका दिया।
भाभी की गाण्ड का छेद मेरे मोटे लंड के घुसने से बुरी तरह फैल गया।

‘आआआआईयईईई ईईई… आआआहहा… मैं माआआआ… मर गई, बस कर राजू आआहह… ओइई माआआअ… ओह निकाल ले बहुत दर्द हो रहा है।’

भाभी बहुत ज़ोर से चीखीं।

थोड़ी देर में जब भाभी का दर्द कम हुआ तो मैंने थोड़ा और दबाव डाल कर करीब तीन इंच लंड भाभी की गाण्ड में पेल दिया।

भाभी को पसीने छूट गए थे।

मैंने और थोड़ा इंतज़ार किया और भाभी की चूचियाँ और चूतड़ों को सहलाता रहा।
फिर मैंने भाभी की कमर पकड़ कर एक हल्का सा धक्का लगाया और 5 इंच लंड भाभी की गाण्ड में पेल दिया।

‘आआआः… ऊऊ…आआआः….इसस्सस्स और कितना बाकी है राजू? फट जाएगी मेरी गाण्ड…!’

‘बस मेरी जान थोड़ा सा और।’ ये कहते हुए मैंने एक ज़ोर का धक्का लगा दिया। अब तो करीब-करीब 7 इंच लंड भाभी की गाण्ड में समा गया।

‘आआअ.. आआआआ… ओईईईई… माआआ ..छोड़ दे मुझे ज़ालिम कहीं का… आआअ हह आ.. मुझे नहीं मरवानी गाण्ड.. प्लीज़ राजू मैं तेरे हाथ जोड़ती हूँ.. निकाल ले… मैं नहीं सहन कर सकती माआ… आआहह उम्म्म्ममम।’

मैं थोड़ी देर तक बिना हिले लंड गाण्ड में डाले हुए पड़ा रहा।

जब भाभी का दर्द कम हुआ तो मैंने बहुत ही धीरे-धीरे अपना लंड भाभी की गाण्ड में अन्दर-बाहर करना शुरू किया।

भाभी का दर्द अब काफ़ी कम हो गया था।
मैंने अब पूरा लंड बाहर निकाल कर जड़ तक पेलना शुरू किया।
मैंने देखा कि भाभी भी अब अपने चूतड़ पीछे उचका कर मेरा लंड अपनी गाण्ड में ले रही थीं।

‘भाभी बोल कैसा लग रहा है?’ मैंने भाभी की चूचियाँ दबाते हुए पूछा।

‘आअहह… अब अच्छा लग रहा है.. मेरे राजा… उम्म्म्म थोड़ा और ज़ोर से चोद।’ अब तो मैं भाभी के चूतड़ पकड़ कर अपने लौड़े को भाभी की गाण्ड में जड़ तक पेलने लगा।
धीरे-धीरे मेरे धक्के तेज़ होते गए।

‘अया… उई अई…ह… ऊऊऊओ …आऐईयईईई, बहुत मज़ा आ रहा है… फाड़ दे अपने लौड़े से मेरी गाण्ड.. अया… पीछे से तो.. अब मैं तेरी बीवी हो गई हूँ… अईया… अईया… सुहागरात को तेरे भैया ने मेरी कुँवारी चूत चोदी थी और आज तू मेरी कुँवारी गाण्ड मार रहा है। चोद मेरे राजा चोद मुझे… जी भर के चोद उम्म उफ़फ्फ़ हाय्यी उम्म्म अहह।’

मेरे धक्के और भी भयंकर होते जा रहे थे।
भाभी की जिस गाण्ड ने मेरी नींद उड़ा दी थी, आज उसी गाण्ड में मेरा लौड़ा जड़ तक घुसा हुआ था।

भाभी को चोदते हुए अब करीब दस मिनट हो चले थे, मैं भी अब झड़ने वाला था, 15-20 धक्कों के बाद मैंने ढेर सारा वीर्य भाभी की गाण्ड में उड़ेल दिया।

मेरा वीर्य भाभी की गाण्ड में से निकल कर चूत की ओर बहने लगा।

मैंने अपना लंड भाभी की गाण्ड में से बाहर निकाल लिया। भाभी ने उठ कर बड़े प्यार से लंड को अपने मुँह में ले कर चाटना और चूसना शुरू कर दिया।

भाभी ने पूरे लंड और मेरे अमरूदों को चाट कर ऐसे साफ़ कर दिया मानो मेरे लंड ने कभी चुदाई ही ना की हो।

‘भाभी दर्द तो नहीं हो रहा?’

‘अपना 10 इंच का मूसल मेरी गाण्ड में डालने के बाद पूछ रहा है दर्द तो नहीं हो रहा। लगता है एक महीने तक ठीक से चल भी नहीं पाऊँगी।’

‘तो फिर आपको मज़ा नहीं आया?’

‘कैसी बातें कर रहा है? इससे चुदवाने के बाद किस औरत को मज़ा नहीं आएगा? लेकिन तेरे दिल की तमन्ना पूरी हुई की नहीं?’ भाभी मेरे लौड़े को प्यार से सहलाते हुए बोलीं।

‘हाँ मेरी प्यारी भाभी… आपके भारी नितम्बों को मटकते देख कर मेरे दिल पर छुरियाँ चल जाती थीं, मेरा लंड फनफना उठता था और आपके चूतड़ों के बीच में घुसने को बेकरार हो जाता था। आज तो मैं निहाल हो गया।’

‘सच.. मुझे नहीं पता था कि मेरे चूतड़ तुझे इतना तड़पाते हैं, मैं बहुत खुश हूँ कि तेरे दिल की तमन्ना पूरी हुई। अब तो तू एक बार मेरी गाण्ड मार ही चुका है। जब भी तेरा दिल करेगा तुझे कभी मना नहीं करूँगी… तेरी ही चीज़ है।’

‘आप कितनी अच्छी हो भाभी… देखना अब आपके कूल्हों में कितना निखार आएगा… राह चलते लोगों का लंड आपके चूतड़ों को देख कर खड़ा हो जाएगा।’

‘मुझे किसी का लंड नहीं खड़ा करना, तेरा खड़ा होता रहे उतना ही काफ़ी है। अभी तो मेरी गाण्ड का छेद फटा सा जा रहा है।’

‘एक बात पूछूँ भाभी? भैया आपको कौन कौन सी मुद्राओं में चोदते हैं?’

‘अरे.. तेरे भैया तो अनाड़ी हैं, उन्हें तो सिर्फ़ मेरी टाँगों के बीच बैठ कर ही चोदना आता है। अक्सर तो पूरी तरह नंगी भी नहीं करते, साड़ी उठाई और पेल दिया… और 10-12 मिनट में ही काम खत्म…!’

‘आपको नंगी हो कर चुदवाने में मज़ा आता है?’

‘हाँ मेरे राजा… किस औरत को नहीं आएगा? और फिर मर्द को भी तो औरत को पूरी तरह नंगी करके चोदने में मज़ा आता है। तू बता तुझे किस मुद्रा में चोदना अच्छा लगता है?’

‘भाभी आपके जैसी खूबसूरत औरत को तो किसी भी मुद्रा में चोदने में मज़ा आता है, लेकिन सबसे ज़्यादा मज़ा तो आपको घोड़ी बना कर, आपके मोटे-मोटे चूतड़ फैला कर घोड़े की तरह चोदने में आता है। इस मुद्रा में आपकी फूली हुई रस भरी चूत और गुलाबी गाण्ड, दोनों के दर्शन हो जाते हैं और दोनों को ही आसानी से चोदा जा सकता है।’

‘अच्छा तो तू अब काफ़ी माहिर हो गया है।’

अब तो मैं और भाभी घर में हमेशा नंगे ही रहते थे और मैं दिन में तीन-चार बार भाभी को चोदता था और गाण्ड भी मारता था।

एक दिन भैया वापस आ गए।
वापस आने के बाद तीन-चार दिन तो भैया ने भाभी को जम कर चोदा, लेकिन उसके बाद फिर वही पुराना सिलसिला शुरू हो गया।
भाभी की चूत की प्यास को मिटाने की ज़िम्मेदारी फिर मेरे 10 इंच के लौड़े पर आ पड़ी। अब तो भाभी को गाण्ड मरवाने का इतना शौक हो गया कि हफ्ते में दो-तीन बार मुझे उनकी गाण्ड भी मारनी पड़ती थी।

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