बहन का लौड़ा -44

(Bahan Ka Lauda-44)

अभी तक आपने पढ़ा..

ममता- अरे बाप रे रात को मीरा बीबी जी से मन नहीं भरा क्या.. जो सुबह-सुबह गाण्ड मारने की बात कर रहे हो.. आज कहीं मेरी भी गाण्ड तो नहीं मारोगे मेरे राजा?

राधे- बिल्कुल ठीक समझी तू.. कल पापा आ जाएँगे.. तो ये चीखना-चिल्लाना होगा नहीं.. इसी लिए रात को मीरा की गाण्ड मारी.. अभी तुम्हारी मारूँगा.. उसके बाद तो कभी भी कहीं भी तुम दोनों की ठुकाई कर सकता हूँ। चलो.. मैं पहले थोड़ा फ्रेश हो जाता हूँ.. उसके बाद दोपहर तक तेरी ठुकाई करूँगा..

ममता- नहीं राजा… मुझे बच्चा चाहिए और गाण्ड मरवाने से बच्चा नहीं होगा.. आप तो मेरी चूत की प्यास ही मिटा दो बस..
राधे- अरे ममता रानी.. बच्चा ना चूत मारने से होता है.. ना गाण्ड मारने से.. बच्चा तो होता है वीर्य से.. जो मैं तेरी चूत में ही डालूँगा.. समझी.. चल अब कमरे में आ जा.. फ्रेश होने का प्लान कैंसिल.. अब तो तेरी गाण्ड मारकर ही सुकून आएगा..
ममता- आप मानोगे तो है नहीं.. तो चलो मैं भी कहाँ डरने वाली हूँ.. आज गाण्ड भी आपके नाम कर देती हूँ।

अब आगे..

दोनों कमरे में चले गए.. राधे ने जाते ही अपने कपड़े निकाल फेंके.. उसका लौड़ा आधा खड़ा था।
ममता- हाय कैसा मस्त लौड़ा है.. कितनी चुदाई करता है.. फिर भी पूरा कभी नहीं मुरझाता.. जब देखो चोदने के लिए तैयार ही रहता है..
राधे बिस्तर पर लेट गया और ममता से कहा कि नंगी होकर आ जाओ.. आज वो थका हुआ है.. तो उसको थोड़ा मसाज चाहिए.. उसके बाद वो चुदाई करेगा।
ममता नंगी होकर बिस्तर पर राधे के बदन को दबाने लगी.. बीच-बीच में लौड़े को सहलाती.. कभी चूम लेती.. राधे का लौड़ा धीरे-धीरे खड़ा होने लगा.. ममता से रहा नहीं गया.. तो वो लौड़े को चूसने लगी।

राधे- आह्ह.. साली.. तू नहीं मानेगी.. आह्ह.. चूस.. मैंने सोचा.. आह्ह.. थोड़ा रेस्ट कर लूँ.. मगर तेरी चूत में आग लगी है.. चूस.. पहले तेरी चूत को ठंडा करूँगा.. उसके बाद गाण्ड मारूँगा.. आह्ह.. तू भी क्या याद करेगी कि किसी मर्द से पाला पड़ा है..

ममता ने लंड को चूस कर गीला कर दिया और खुद वो लौड़े को चूसते-चूसते ही गर्म हो गई। राधे कुछ बोलता.. इसके पहले ममता राधे के ऊपर आई और लंड को चूत पर सैट करके बैठ गई.. ‘पक्क’ की आवाज़ के साथ लौड़ा अन्दर घुस गया।

राधे- आह्ह.. क्या बात है.. बड़ी आग लगी है तेरी चूत में.. सीधे ही लौड़ा घुसा लिया.. मुझे थोड़ा चूसने तो देती मेरी जान..

ममता- आह्ह.. अइ.. कल जब से इधर से गई हूँ.. आह्ह.. तब से चूत में आग लगी हुई है.. आह्ह.. कल की रात बड़ी मुश्किल से कटी है.. मैंने.. आह्ह.. छोड़ो ये सब.. आह्ह.. मिटा दो मेरी चूत की प्यास को।

राधे नीचे से झटके मारने लगा और ममता लौड़े पर कूदती रही। करीब 35 मिनट तक राधे पोज़ बदल-बदल कर ममता को चोदता रहा। ममता दो बार झड़ चुकी थी.. मगर राधे अब भी उसको घोड़ी बना कर धकापेल चोद रहा था। उसकी गुलाबी गाण्ड देख कर राधे को और जोश आ गया। अब वो स्पीड से चुदाई करने लगा और पूरा लंड रस चूत में भर दिया।

राधे ने ममता की चूत का हाल-बेहाल कर दिया था.. अब दोनों पास-पास लेटे हुए लंबी साँसे ले रहे थे।
दस मिनट तक दोनों वैसे ही पड़े रहे.. उसके बाद राधे ने कहा कि अब दोनों साथ में नहा कर मज़ा लेते हैं.. उसके बाद गाण्ड मराई की रस्म पूरी करेंगे।
दोनों ही खड़े हुए और नहाने चले गए।

लो दोस्तो, सॉरी इस बार की चुदाई जल्दी में बता दी मैंने.. अब रोज-रोज एक ही चीज को लंबा लेना ठीक नहीं.. हाँ गाण्ड मराई की रस्म में आपको पूरा मज़ा मिलेगा। इनको नहा लेने दो.. हम स्कूल चलते हैं.. अरे नहीं यार.. पढ़ने नहीं ले जा रही.. रोमा के पास ले जा रही हूँ.. समझते नहीं हो बात को..

स्कूल में रोमा और टीना पास में बैठी थीं और धीरे-धीरे बातें कर रही थीं।
टीना- यार रोमा.. तू कल से मुझसे नज़रें क्यों चुरा रही है.. ठीक से बात क्यों नहीं कर रही?
रोमा- अरे कहाँ नज़रें चुरा रही हूँ.. बात कर तो रही हूँ ना..
टीना- अच्छा.. तो बता.. कल कहाँ गई थीं.. ऐसा क्या काम था.. जो स्कूल से भागना पड़ा?
रोमा- अरे यार.. जरूरी तो नहीं ना.. कि तुझे सब बात बताऊँ..
टीना- हाँ जरूरी है.. हम अच्छे दोस्त हैं और दोस्तों की बीच कोई बात छुपी नहीं रहती है।

रोमा- यार मैंने कब मना किया है.. समय आने पर बता दूँगी ना.. प्लीज़ तू मेरी अच्छी दोस्त है ना.. मेरी कुछ मजबूरी है.. समझो बात को..
टीना- देख रोमा.. ये तो मैं नहीं जानती कि तेरे दिमाग़ में क्या चल रहा है.. मगर एक बात याद रखना.. कुछ ऐसा मत करना.. जिससे बाद में पछताना पड़े..
रोमा- अरे तू कहाँ से कहाँ चली गई.. मैंने ऐसा कुछ नहीं किया.. ओके.. चल अब क्लास का समय हो गया..

टीना के दिल में बहुत से सवाल घूम रहे थे.. मगर वो रोमा को ज़्यादा परेशान नहीं करना चाहती थी। वो उसके साथ क्लास में चली गई।

दोस्तो, नए रिस्ते बनाना अच्छी बात है.. मगर जब आपका नया रिश्ता.. आपको मजबूर कर दे.. तो समझ लो.. ये किसी अनहोनी का अंदेशा है.. क्योंकि आपको मजबूर करके कोई आपका फायदा उठा रहा है.. तो प्लीज़ दोस्तो.. ऐसे रिश्तों से बचो.. चलो मैं भी क्या ज्ञान देने लग गई.. आओ राधे के पास चलते हैं।

ममता मजे से राधे के लौड़े को चूस रही थी और राधे आँखें बंद किए पड़ा हुआ था।
राधे- ओह्ह.. ममता रानी.. चूस आ.. एकदम गीला कर दे.. सुपाड़े को.. ताकि तेरी गाण्ड में आराम से चला जाए..
ममता- लो हो गया गीला.. मेरे राजा जी.. अब घुसा दो लौड़ा मेरी गाण्ड में..
राधे- हाए मेरी किस्मत क्या मस्त है.. रात को मीरा की कुँवारी गाण्ड मिली.. अब तेरी गाण्ड मुहूर्त करवाने के लिए मिल गई.. आह्ह.. आज तो थूक लगा कर ऐसा चोदूँगा कि याद करेगी मेरे लौड़े को..
ममता- आह्ह.. अब घुसा भी दो न.. मेरे राजा.. कब से बोले जा रहे हो.. लो मैंने गाण्ड भी खोल दी है..

ममता घोड़ी बन गई और अपने हाथों से गाण्ड के छेद को खोल दिया था उसने… जिसे देख कर राधे खुश हो गया और उसने ममता की गाण्ड पर अच्छे से थूक लगा कर अपने लौड़े को भी चिकना कर लिया।

राधे ने लौड़े को छेद पर रखा और ज़ोर से धक्का मारा..
ममता- ओई.. मर गई रे एयेए..
राधे- क्यों ममता रानी.. अभी तो आधा लौड़ा गाण्ड में गया और तू चिल्लाने लगी.. अभी देख.. कैसे पूरा लौड़ा एक ही बार में अन्दर घुसता हूँ.. तब चीखना.. जितना मन करे..
ममता- आह्ह.. ओई.. इतने बेदर्द मत बनो.. मेरे राजा.. आह्ह.. आराम से भी तो डाल सकते हो.. आह्ह.. मीरा की गाण्ड भी ऐसे ही मारी थी क्या… आह्ह..

राधे- नहीं जानेमन उसकी गाण्ड तो बड़े प्यार से घी लगा कर मारी थी.. मगर मेरा दिल था कि तेरी गाण्ड मारने के समय में जंगली बन जाऊँ और तेरी गाण्ड को फाड़ दूँ।

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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