बहन का लौड़ा -41

(Bahan Ka Lauda-41)

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अभी तक आपने पढ़ा..

राधे ने पास पड़ी प्याली से थोड़ा घी उंगली पर लगाया और मीरा की गाण्ड के छेद पर लगाने लगा..
मीरा की गाण्ड कभी सिकुड़ती.. कभी खुलती.. वो नज़ारा किसी को भी पागल बना देने के लिए काफ़ी था।
राधे ने आराम से उंगली गाण्ड में घुसा दी।

मीरा- आह्ह.. बहुत अच्छा लग रहा है राधे.. तुम बहुत अच्छे हो..
राधे- बोलो मत मीरा.. बस मज़ा लो.. मैं पहले उंगली से घी अन्दर तक घुसा देता हूँ.. ताकि जब लौड़ा अन्दर जाए तो तुम्हें दर्द कम महसूस हो..

मीरा- आह्ह.. मैं जानती हूँ.. मेरे आशिक.. मुझे तकलीफ़ देकर तुम खुद परेशान हो जाओगे.. मगर तुम्हारी मीरा कमजोर नहीं है.. आह्ह.. घुसा दो अपना लौड़ा.. आह्ह.. में हर दर्द को सह जाऊँगी..
राधे- मैं जानता हूँ.. मेरी जान.. अब बस तुम दाँत भींच लो.. मैं लौड़ा घुसा रहा हूँ।

अब आगे..

राधे ने उंगली घी में डुबोई और पूरी उंगली गाण्ड के अन्दर घुसा दी.. मीरा को थोड़ा दर्द हुआ.. मगर वो बस सिसक कर रह गई.. उसके बाद राधे ने लौड़े पर अच्छे से घी लगाया.. खास कर सुपाड़े को घी से तर कर लिया.. जिससे टाइट गाण्ड में लौड़ा आराम से घुस जाए।

अब राधे ने सुपाड़े को छेद पर रखा और ज़ोर लगाने लगा.. मगर लौड़ा घुसने की बजाय फिसल कर कभी ऊपर तो कभी नीचे चला जाता..

मीरा- क्या कर रहे हो राधे.. आह्ह.. घुसाओ ना.. आह्ह..
राधे- अरे मेरी जान.. तेरी गाण्ड का सुराख बहुत छोटा है.. साला लौड़ा ऐसे नहीं जाएगा.. तू ऐसा कर अपने दोनों हाथों से थोड़ा गाण्ड को फैला.. बस एक बार टोपी अन्दर घुस जाए.. उसके बाद तो पूरा लौड़ा अपने आप घुस जाएगा..

मीरा- ठीक है मेरे आशिक.. जैसा तुम कहो.. अब करना ही पड़ेगा.. तुमसे प्यार जो करती हूँ.. मीरा ने अपने हाथों से गाण्ड को फैलाया तो राधे ने झट से सुपाड़ा गाण्ड में फँसा दिया और दबाव बनाने लगा।

मीरा- आह्ह.. उई.. राधे मेरी गाण्ड आज फट जाएगी.. आह्ह.. अभी सुपाड़ा गया.. तो ऐसे लग रहा है.. जैसे ओई.. लोहे की रोड घुस गई हो गाण्ड में..
राधे- अरे ऐसे कैसे फट जाएगी.. मैं हूँ ना.. तू बस अपने हाथों को टाइट रख.. नीचे मत गिर जाना.. घी का कमाल दिखाता हूँ.. मैं अब लौड़ा धीरे-धीरे घुसाऊँगा.. तू बस हिम्मत रख..
मीरा- आह्ह.. ठीक है.. उफ़फ्फ़ बहुत जलन हो रही है.. आह्ह.. आगे घुसाओ आह्ह..

राधे ने कमर पर दबाव बनाया और थोड़ा लंड और अन्दर घुसा दिया। वैसे तो मीरा की गाण्ड बहुत टाइट थी मगर घी से लौड़े को फिसलने में आसानी हो रही थी।

राधे- उहह मीरा तेरी गाण्ड है.. या क्या है.. आह्ह.. लौड़े को कैसे दबा लिया.. सारी नसें दब कर रह गई हैं.. आह्ह.. मगर जब पूरा लौड़ा घुस जाएगा.. कसम से मुझे पेलने में बहुत मज़ा आएगा आह्ह..

राधे ने एक झटका मारा तो आधा लौड़ा अन्दर घुस गया.. इस बार मीरा की हालत खराब हो गई। उसकी आँखों में आँसू आ गए.. मगर उसने दाँत भींच लिए।

राधे- उहह सॉरी जान.. थोड़ा जल्दी घुसा दिया.. आह्ह.. मज़ा आ रहा है..
मीरा- ओई.. आह राधे.. आह्ह.. तुम फिकर मत करो.. आह्ह.. मुझे कुछ नहीं होगा.. आह्ह.. अभी पूरा मत घुसेड़ना बस.. आह्ह.. आधे को ही अन्दर-बाहर करो.. आह्ह.. थोड़ी जलन कम हो जाए.. तो पूरा घुसा देना आह्ह.. ओई…

राधे को पता था मीरा को दर्द तो बहुत हो रहा है.. मगर वो दर्द को सह गई। मीरा की इस अदा पर राधे को बहुत प्यार आया..
राधे अब धीरे-धीरे लौड़े को आगे-पीछे करने लगा..

मीरा- आह्ह.. ओई.. मारो आह्ह.. मेरे आशिक आह्ह.. तुम्हारा लौड़ा.. आह्ह.. मुझे.. आह्ह.. बहुत अच्छा लगता है.. आह्ह.. चोदो.. आह्ह.. मेरी गाण्ड की फिकर मत करो.. आह्ह.. फाड़ दो.. आह्ह.. घुसा दो पूरा लौड़ा.. आह्ह.. अब दर्द जरा कम सा हुआ है.. आईई..

राधे आधे लौड़े को आगे-पीछे कर रहा था.. मगर हर झटके के साथ आधा इन्च लौड़ा और अन्दर घुस जाता.. मीरा बोलती रही कि पूरा घुसा दो.. मगर उसको नहीं पता था.. राधे उसे दिलो जान से मोहब्बत करता था.. वो आराम से पूरा लौड़ा घुसाना चाहता था..

मीरा- आह्ह.. ओई.. घुसा दो उफ़.. फाड़ दो मेरी गाण्ड ओई.. आह..

राधे का लौड़ा अब गाण्ड में सैट हो गया था.. फुच्च..फुच्च की आवाजें आने लगी थीं.. राधे हर बार लौड़े को आगे सरकाता रहा.. और पूरा लौड़ा गाण्ड की अंधी खाई में खो गया। जब राधे की जाँघें मीरा की जाँघों से टकराईं.. तब उसको अहसास हुआ कि पूरा लौड़ा अन्दर घुस गया है।

मीरा- आह्ह.. उह.. राधे पूरा लौड़ा गाण्ड में घुस गया है.. वाह.. पता नहीं चला.. मज़ा आ गया.. जितना दर्द.. सोचा था ओई.. उतना नहीं हुआ.. आह्ह.. अब जल्दी-जल्दी चोदो.. आह्ह.. मारो.. आह्ह.. मेरी गाण्ड को आह.. खोल दो.. ओई…

राधे ने स्पीड से लौड़े को झटके देने शुरू कर दिए। अब मीरा हर धक्के के साथ आगे चली जाती.. मगर राधे ने कस कर मीरा की जाँघें पकड़ ली थीं.. वो बस ‘दे ठकाठक.. दे ठकाठक’ गाण्ड को ठोके जा रहा था।

मीरा भी अपनी गाण्ड को पीछे धकेल कर चुद रही थी..

मीरा- आह्ह.. आईईइ.. राधे आह्ह.. तुम लौड़ा गाण्ड से निकाल कर आह्ह.. थोड़ी देर चूत में घुसा दो.. आह्ह.. बड़ी गुदगुदी हो रही है.. आह्ह.. ओई…
राधे ने लौड़ा गाण्ड से निकाला.. तो पक्क की तेज आवाज़ आई.. जैसे किसी कोल्डड्रिंक का ढक्कन खुलने पर आती है..
राधे ने एक ही झटके में पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया..
मीरा- आह उईईइ.. मज़ा आ गया.. अब स्पीड से मेरी चूत को चोदो आह्ह.. उह.. जल्दी करो आह्ह..

राधे- उफ़.. साला लौड़ा कितना फँसा हुआ था.. तेरी गाण्ड में.. आह्ह.. अब आराम मिला.. उहह ले मेरी जान.. उहह संभाल उफ़.. तेरी चूत.. क्या मस्त गीली हो रही है.. आह्ह.. ले ले..

मीरा पहले ही झड़ने के करीब थी। राधे के लौड़े ने चूत का माहौल और गर्म कर दिया। दो ही मिनट में वो कामरस छोड़ने लगी..
मीरा- आह फास्ट.. आह फास्ट.. मैं गई आह.. उह… आह आह..

राधे ने स्पीड से लौड़े को बाहर निकाला और अबकी बार एक ही झटके में पूरा गाण्ड की गहराई में घुसा दिया..

मीरा- आआआ आआआ.. मर गई रे.. आह्ह.. जालिम.. चूत से निकाल कर सीधा ही घुसा दिया.. उफ़.. आह्ह..

राधे अब स्पीड से गाण्ड मारने लगा था। उसका लौड़ा भी अब तनकर फटने को तैयार हो गया था.. किसी भी पल माल की मूसलाधार बारिश हो सकती थी।
पांच मिनट की गाण्ड ठुकाई के बाद राधे के लौड़े ने मीरा की गाण्ड को पानी-पानी कर दिया। अब राधे ने लौड़ा गाण्ड से बाहर निकाल लिया और गाण्ड के छेद को देखने लगा।

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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